20 February, 2019

खाद्यान्न उत्पादन 18 लाख मीट्रिक टन बढ़ा

एनडीएस ब्यूरो

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने दावा किया कि किसानों को खेती के नए तरीकों के बारे में प्रशिक्षित करने एवं किसान हितकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन से राज्य में खाद्यान्न उत्पादन करीब 18 लाख मीट्रिक टन बढा है।
श्री शाही ने गुरूवार को बताया कि मिलियन फार्मर्स स्कूल के जरिए किसानों को दो चरणो में खेती के बारे में प्रशिक्षित करने से करीब दस लाख मीट्रिक टन खरीफ,सात लाख मीट्रिक टन गेंहू तथा एक लाख मीट्रिक टन तिलहन का उत्पादन बढा है। सूखा और बाढ़ के बावजूद रोपाई का क्षेत्रफल कम नहीं होने दिया गया।
उन्होंने बताया कि बुन्देलखण्ड में खरीफ की फसल के बीजों पर 80 प्रतिशत अनुदान दिया गया जिसके अनुकूल परिणाम मिले हैं। प्रदेश में कृषि उत्पादन में बढ़ोत्तरी खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता भी एक कारण है। मंडी कानून में किए गए बदलावों का भी सकारात्मक प्रभाव पडा है। ई मार्केङ्क्षटग के जरिए करीब साढे चार हजार करोड़ का व्यापार हुआ है। धान गेहू , दलहन चना मसूर सरसों और राई आदि की खरीद की व्यवस्था कराई गई जिससे किसानों को बिचैलियों से बचा कर उसे फसल का सही दाम मिल सका। कृषि मंत्री ने बताया कि हाल ही में एक राष्ट्रीय पत्रिका द्वारा कराए गए सर्वे में उत्तर प्रदेश कृषि के क्षेत्र में लम्बी छलांग लगाते हुए 18वें स्थान से तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। पिछले 70 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। उत्तर प्रदेश आज के समय में सबसे अधिक खाद्यान उत्पादन करनेवाला राज्य है। गेंहू का सबसे अधिक उत्पादन यूपी में ही हुआ है। उत्पादकता भी इस अवधि में बढ़ी है। केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री की ओर से जो योजनाए भेजी गई है जिनमें प्रमुख रूप से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना आदि का इस उपलब्धि में सकारात्मक योगदान है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश को पहले पायदान पर पहुंचाना है।
शाही ने कहा कि यूपी सरकार ने अनुदान को खाते में सीधे भेजने की व्यवस्था को ठीक किया। कर्जमाफी इस बदलाव का सबसे बडा कारण था, जिससे किसान आॢथक दबाव से मुक्त हुआ और उसे राहत मिली। उसने मन लगाकर खेती में निवेश किया जिससे प्रदेश का कृषि उत्पादन बढ़ा। नीतियो को सरलीकृत किया गया एवं अनुदान को समय से किसान तक भेजने की व्यवस्था की गई। पिछले साल करीब 22.5 लाख किसानों को विभिन्न मदो में 456 करोड़ रुपए अनुदान के तौर पर डीबीटी के जरिए वितरित किए गए। इसमें बीज अनुदान, कृषि यंत्रों का अनुदान संप्रिकलर सेट सोलर पम्प वर्मी कम्पोस्ट आदि का अनुदान शामिल है। प्रधानमंत्री फसली बीमा योजना के तहत किसानों की कवरेज कराई गई। यूपी के किसानों के दो करोड पांच लाख स्वायल हेल्थ कार्ड बनाकर वितरित किए गए ।

 

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