11 December, 2018

बिजली दर को लेकर आयोग में दाखिल की आपत्तिय

लखनऊ। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के समक्ष बिजली दर को लेकर अनेक आपत्तिया पेश करते हुए सौभाग्या योजना के तहत निशुल्क बिजली कनेक्शन पाने वाले गरीब उपभोक्ताओं के लिये एक से डेढ रूपये के बीच नयी टैरिफ श्रेणी बनाने की मांग की है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बुधवार को नियामक आयोग सचिव संजय श्रीवास्तव से मिल कर उन्हें आपत्तिया सौंपी। अपनी आपत्तियों में उपभोक्ता परिषद द्वारा आयेाग में लंबित अपनी दो याचिकाओं में सुनाये गये फैसले के आधार पर उत्पादन लागत में 54 पैसा प्रति यूनिट की कमी के आधार पर बिजली दरों में कमी करने का मुददा उठाया। इसी के साथ वर्तमान रेग्यूलेटरी सरचार्ज 4.28 प्रतिशत को अविलम्ब समाप्त कर उपभोक्ताओं को रेग्यूलेटरी लाभ दिये जाने की मांग भी उठायी है। परिषद ने घरेलू शहरी विद्युत उपभोक्ताओं के फिक्स चार्ज को समाप्त करने एवं वाणिज्यक विद्युत उपभोक्ताओं के मिनिमम चार्ज को समाप्त करने के लिए विधिक तथ्य पेश किये हैं।
परिषद की ओर से पावर कारपोरेशन पर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि वर्ष 2000 में मात्र 77 करोड के घाटे में बिजली कम्पनियॉं अब 85 हजार करोड के घाटे पर कैसे पहुंच गई है। परिषद ने बिजली कम्पनियों की अक्षमता का खामियाजा उपभोक्ताओं पर नहीं डालते हुए बिजली दरों में कमी के लिये दिये पुख्ता सबूत पेश किए है।
उपभोक्ता परिषद द्वारा अपनी आपत्तियों में प्रमुख रूप से यह मुददा उठाया गया कि प्रदेश की बिजली कमपनियॉं सुधार के बडे बडे दावे करती हैं लेकिन वर्ष 2000-2001 में बिजली कम्पनियों का जो कुल घाटा मात्र 77 करोड था वह अब बढकर लगभग 85 हजार करोड कैसे हो गया। सबसे बडा चौकाने वाला मामला यह है कि उदय अनुबन्ध जब हुआ था तब घाटा मात्र 70 हजार 738 करोड़ था और उदय अनुबन्ध कर बड़े- बड़े दावे किये गये थे,लेकिन मार्च 2018 तक बिजली कम्पनियों का सरकारी विभागों पर 10 हजार 756 करोड़ का बकाया हो गया।
उ0 प्र0 में पहले बिजली दुर्घटनाओं से जहॉं पूरे साल में 400 लोगों की जाने जाती थीं वहीं अब लगभग 958 लोगों की जानें गयी हैं। बिजली कम्पनियॉं सबको 24 घंटे बिजली देने की बात कर रही हैं लेकिन पावर फार आल में 33 केवी स्तर पर वितरण ट्रांसफार्मरों की कुल क्षमता लगभग 44677 एमवीए बतायी गयी है यानि सिस्टम की क्षमता लगभग 3 करोड़ 79 लाख किलोवाट। जबकि सितम्बर 2018 तक कुल विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 2 करोड़ 21 लाख है और उनके द्वारा स्वीकृत भार जो उपभोक्ताओं द्वारा लिया गया है वह 5 करोड़ 45 लाख किलोवाट है। ऐसे में कारपोरेशन की क्षमता और उपभोक्ताओं के द्वारा लिये गये भार के बीच लगभग 2 करोड़ किलोवाट का अंतर है। इसके अलावा 25 प्रतिशत बिजली चोरी का लोस होता है। ऐसे में पीक आवर्स में गर्मी में डायवर्सी फैक्टर एक अनुपात एक पर यह सिस्टम कैसे चलेगा।
परिषद ने बिजली कम्पनियों पर आरोप लगाते हुये कहा कि वर्ष 2006 के बाद कानून पारित होने के बाद भी अनेकों प्राविधानों में उपभोक्ताओं को बिजली कम्पनियों द्वारा आज तक कोई मुआवजा नही दिया गया। ग्रामीण अनमीटर्ड घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के 400 रूपये प्रति किलोवाट की वर्तमान बिजली दर को मनमाना बताते हुए उसमें भारी कमी करने की मांग उठायी। उपभोक्ता परिषद ने आगे कहा कि प्रदेश के ऊ$र्जा मंत्री ने उत्पादन लागत पर कमी एवं लाइन लास में कमी के आधार पर विधान सभा में 3400 करोड़ रूपये का फायदा होना बताया था। इसलिये बिजली दरों में स्वत: कमी की जाये।

 

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