22 January, 2019

मंदिर से राम-राम विकास को किया सलाम

योगेश श्रीवास्तव

लखनऊ। आगामी लोकसभा चुनाव में फतह के लिए सभी राजनीतिक दलों ने चौसर बिछाना आरंभ कर दिया है। इसी कड़ी में भाजपा ने टेंं्रड बदलते हुए पूर्व की तरह राम मंदिर से राम-राम कर विकास के माडल पर चुनावी जंग में उतरने की तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चर्चाओं पर विराम लगाते हुए दो टूक कह दिया कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए वह संसद मे अध्यादेश नहीं लाने जा रही है। इसे लेकर भाजपा के मातृ संगठन विश्व हिंदू परिषद ने नाराजगी जतायी है जबकि राष्ट्रीय सेवक संघ ने इस बयान को सकारात्मक कदम बताया है।

मालूम हो कि अयोध्या में राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 2011 से मामला लंबित है। लोग अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच बीते कई माह से राम मंदिर निर्माण को लेकर भाजपा, संघ एवं विहिप के पदाधिकारी लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। साथ ही विहिप से गत 25 नवम्बर को अयोध्या में ही धर्मसभा का आयोजन कर युवाओं को ढाई दशक पूर्व हुए राम मंदिर आंदोलन से परिचित कराने की कोशिश की। विहिप ने दिल्ली सहित कई स्थानों धर्मसंभा का आयोजन किया। वहीं प्रयागराज में आयोजित होने वाले कुंभ में धर्म संसद का आयोजन होने जा रहा है इसमें भी राम मंदिर को लेकर चर्चा होना तय है। इन्हीं बयानबाजी एवं आयोजनों के बीच पीएम मोदी ने विराम लगाते हुए कहा कि राम मंदिर का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है वहां से कोई निर्णय होने के बाद ही विचार किया जायेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार संसद में मंदिर को लेकर कोई अध्यादेश नहीं लाने जा रही है। इस तरह पीएम ने राम मंदिर निर्माण को लेकर सभी चर्चाओं पर विराम लगा दिया। इसका मतलब साफ  है कि भाजपा विकास के एजेण्डे के सहारे ही 2019 की वैतरणी फिर से पार करना चाहती है। इसमें वह जातियों का सहारा लेेने के साथ ही विरोधियों पर हमला भी तेज करेगी।

इस बयान को लेकर विहिप ने हुंकार भरी है है। परिषद के प्रांतीय महामत्री भोलेन्द्र ने कहा कि बहुंसख्यक हिंदू समाज अनंत काल तक राम मंदिर को लेकर इंतजार नहीं कर सकता। सरकार को संसद में कानून बनाकर अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। इस मामले को लेकर विहिप नेताओं ने देश के 350 सासदों ने सम्पर्क किया था जिसका उन्होंने समर्थन भी किया था। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में आगामी 15 जनवरी से आरंभ होने वाले कुंभ में धर्म संसद का आयोजन होगा जिसमें इस मामले में आगे की रणनीति तय की जायेगी। वही संघ ने मोदी के इस बयान को सकारात्मक कदम बताया है।  लेकिन सरकार से जन अपेक्षाओं को पूरा करने की दरकार की है। इस तरह राम मंदिर का मुद्दा फिलहाल अभी बना रहेगा।

फिर मोदी के सहारे भाजपा 

आम चुनाव भले ही कुछ माह बाद हो लेकिन सभी दलों ने तैयारी तेज कर दी है। इसमें भाजपा सबसे आगे हैं। भाजपा 2014 की तर्ज पर विकास के माडल पर ही चुनाव मैदान में उतरने जा रही है। रहीं बात चेहरे की तो वह पीएम मोदी ही होंगे। इसका कितना असर होगा यह तो चुनाव के नतीजे ही बतायेंगे। वहीं कांग्रेस विधायक अजय कुमार लल्लू का कहना है कि भाजपा असल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के जुमले उछालती रहती है। लेकिन इस बार यह सब नहीं चलेगा जनता इन दोनो ही हुकूमत से बेहद नाराज है वह ठोंक कर देती है और ठोंक कर ले भी लेती है।

rgautamlko@gmail.com

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