मायावती ने एससी/एसटी आयोग को किया कमजोर : बृजलाल

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  • उन्होंने बसपा नेत्री मायावती पर पार्टी संस्थापक कांशीराम के मिशन से भटकने का आरोप लगाया है।

लखनऊ। प्रदेश के पूर्व डीजीपी और राज्य अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के अध्यक्ष बृजलाल ने बसपा अध्यक्ष सुश्री मायावती पर एससी/एसटी आयोग को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मंगलवार को यहां जारी अपने बयान में कहा कि मायावती ने 2007 में एससी/एसटी एक्ट में संशोधन कर गैरदलित वर्ग के लोगों को भी आयोग में नियुक्त करने का रास्ता खोला था। बृजलाल ने कहा कि 1995 में गठित इस आयोग में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के पदों पर सिर्फ एससी वर्ग के ही व्यक्तियों की नियुक्ति का प्रावधान था। मगर बसपा की पूर्ण बहुमत सरकार की बनने पर 21 नवम्बर 2007 में आयोग की संरचना को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने संशोधित कर दिया।

ऐसा करके आयोग में दलितों के अलावा अन्य जातियों के लोगों की नियुक्ति का रास्ता खोल दिया गया। इसके कारण राज्य में सपा सरकार में 2012 से 2017 के बीच आयोग में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व 17 सदस्यों के पदों में से पांच को छोड़ शेष पर गैरदलित वर्ग के लोगों की नियुक्ति की गयी। बृजलाल ने आरोप लगाया है कि पूर्ण बहुमत की सरकार बनने पर बसपा सरकार ने 18 मई 2007 में शासनादेश जारी हत्या, हत्या का प्रयास, बलात्कार को छोड़कर अन्य मुकदमों में एससी/एसटी एक्ट नहीं लगाने की व्यवस्था की। महिलाओं के बारे में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने आदेश किया कि बलात्कार के मुकदमें डाक्टरी परीक्षण के बाद ही दर्ज किये जायेंगे। उन्होंने कहा है कोई सरकारी आदेश कानून को नहीं बदल सकता, लेकिन तत्कालीन बसपा सरकार की मुख्यमंत्री ने इस आदेश के जरिए दलित और महिला हितों को चोट पहुंचाई।

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