21 April, 2018

कबीर के साधना की साक्षी रही आमी नदी इंसान के भौतिकवादी मानसिकता के भेंट चढी

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संत कबीर नगर उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर में विश्व प्रसिद्ध सूफी संत कबीर के साधना की साक्षी रही मगहर से बहने वाली पवित्र आमी नदी इंसान के भौतिकवादी मानसिकता की भेंट चढ़ चुकी है। कबीर के साधना की मूक साक्षी रही एवं उनके निर्वाण स्थल मगहर से बहने वाली यह नदी आज प्रदूषण और अतिक्रमण का शिकार होकर एक गंदे नाले का रूप ले चुकी है। युगों के बदलते इतिहास की प्रत्यक्षदर्शी आमी नदी के उद्भव इतिहास तो वैसे सदियों पुराना है जिसे अम्बिका या बुद्ध के काल में अनोमा नदी के नाम से भी जाना जाता था। 

कबीर की गंगा कही गई जीवनदायनी आमी नदी अब कबीरपंथियों सहित स्थानीय लोगों के लिए जानलेवा बन चुकी है जिसकी सबसे बड़ी वजह आसपास एव अन्य जिलों में स्थापित औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले कचरे का इस नदी में विसर्जन है। इस कारण वर्तमान में आमी इस कदर प्रदूषित हो गई है कि पूरा पानी काला पड़ चुका है जिसे भूल कर जानवर भी पी लें तो वह काल के गाल में समा जाता है। इस नदी को पवित्र करने और साफ़ सफाई के नाम पर तमाम राजनैतिक पार्टियों के अलावा साधु-संतो द्वारा समय-समय पर आन्दोलन भी किए गए लेकिन आज तक अपने अस्तित्व को तलाशती आमी नदी की धार को साफ़ नहीं किया जा सका। इसके विपरीत आने वाले दिनों में ये ऐतिहासिक एवं पवित्र नदी खत्म जरूर हो जायेगी।

सरकारी स्तर पर कभी भी इस नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाई गई। जिसके चलते आज यह पवित्र नदी अपनी बदहाली पर आँसू बहा रही है। नदी को साफ़ सुथरा करने में जहां राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी रही वहीं प्रशासनिक तौर पर भी इसकी उपेक्षा होती रही है। आमी नदी को प्रदूषण मुक्त करने का अभियान चलाने वाले समाजसेवी विश्वविजय सिंह आज भी इस नदी को स्वच्छ बनाने के लिए लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं जिसमें काफी हद तक उन्हें सफलता भी मिली है। जिसके तहत एनजीटी ने यह आदेश भी जारी कर रखा है कि प्रदूषण से जुड़े मानकों को ताक पर रखने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए लेकिन संतकबीरनगर और आसपास के जिलों में जिम्मेदारों की ढिलमुल नीति के चलते एनजीटी के आदेश भी प्रभावहीन नजर आ रहा है।

श्री सिहं का कहना है कि देश की धार्मिक महत्व की पवित्र नदियों के जल को निर्मल करने के बड़े-बड़े सरकारी दावे किए जाते हैं वहीं केन्द्र सरकार ने नमामि गंगे के नाम से बड़ी महत्वाकांक्षी योजना भी बनाई है। नदियों को साफ़ सुथरा रखने और जल संरक्षण के नाम पर सरकारें भले ही करोड़ों रूपये बहाती हों लेकिन मगहर से बहने वाली पवित्र आमी नदी इंसान के भौतिकवादी मानसिकता की भेंट चढ़ चुकी है।

rgautamlko@gmail.com

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