16 December, 2018

भ्रष्टाचार की ‘बहती गंगा’ में हाथ धो रहे हैं कृषि निदेशक!

Agricultural director Soraj Singh, corruption, 'Holy Ganga'

राजेन्द्र के. गौतम

लखनऊ।  ‘बहती गंगा में हाथ धोना’ प्रचलित कहावत कृषि विभाग में चरितार्थ हो रही है। किसानों की आय भले ही दोगुनी कर पाने में फेल हुए कृषि विभाग के आला अफसर अपनी जेबों को भरने के लिए पुरानी योजनाओं में खेल शुरू कर दिया है। नियमों का ताक पर रखकर ऑन लाइन डाटा फीडिंग के लिए हुए एमओयू के नाम पर जहां कृषि विभाग के आला अफसर अपनी जेबों को गरम कर रहे हैं वहीं सर्विस प्रोवाइडर फर्म अग्रवाल भार्गवा एंड एसोसियेटस पर कृषि निदेशक की मेहरबानी सवालों के घेरे में है। इस मामले पर जिम्मेदारों ने चुप्पी साध ली है।

भ्रष्टाचार की ‘बहती गंगा’ में हाथ धो रहे हैं कृषि निदेशक!

बताते चलें कि पूर्ववर्ती सरकार में कृषि विभाग में भ्रष्टïाचार को रोकने के नाम पर ऑन लाइन डाटा फीडिंग योजना को जोर-शोर से चलाया गया। इसके तहत कृषि की सभी योजनाओं के लाभार्थी किसानों का डाटा तैयार करने के लिए 16 फरवरी 2015 को एक सीए फर्म अग्रवाल भार्गवा एंड एसोसियेटस से एमओयू किया गया था। ध्यान देने वाली बात यह थी कि नामचीन कम्पनियों से यह कार्य न करा कर गैर अनुभवी संस्था से एमओयू किए जाने से शासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि ऑन लाइन डाटा तैयार करने के लिए कृषि विभाग ने सर्विस प्रोवाइडर फर्म अग्रवाल भार्गवा एंड एसोसियेटस को प्रति वर्ष 14 करोड़ बारह लाख नब्बे हजार दिए जाने के लिए अनुबंध किया था। यह एमओयू मात्र तीन साल के लिए था। लेकिन कृषि निदेशक सोराज सिंह की मेहबानी के चलते 31 मार्च 2018 तक बढ़ा दिया गया था।

धड़ल्ले से हो रहा है एमओयू की शर्तों का उल्लंघन
कृषि विभाग की समस्त योजनाओं में पारदर्शी बनाने के लिए ऑन लाइन अनुश्रवण एवं वित्तीय प्रबंधन व सॉफ्टवेयर विकास के लिए सर्विस प्रोवाइडर के चयन प्रक्रिया शुरू की है। यह योजना सर्विस प्रोवाइडर सूबे के सभी किसानों और मजदूरों के घर-घर जाकर पंजीकरण करेंगे। पंजीकरण के माध्यम से किसानों और मजदूरों को कृषि विभाग से मिलने वाली विभिन्न योजनाओं की सभी जानकारियां लेकर ऑन लाइन (बायोमेट्रिक सिस्टम) की जाएंगी। एक बार लाभ मिल जाने के बाद दुबारा उस किसान और मजूदर को निर्धारित समय तक कोई दूसरा लाभ नहीं मिलेगा। इस व्यवस्था के माध्यम से कृषि विभाग रोटेशन के आधार पर सभी जरूरतमंद किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ कॉमन सर्विस सेंटर, पंचायत भवन और राशन की दुकान पर मिलेगा। किसानों और मजदूरों को एसएमएस के माध्यम से भी सूचना दी जाएगी। इस योजना पर अमल करने के लिए शासन ने चार्टेड एकाउंटेंट  अग्रवाल-भार्गव एंड एसोसिएट्स के साथ तीन वर्ष का एक अनुबंध किया है। इस अनुबंध के तहत इस फर्म को ऑन लाइन अनुश्रवण एवं वित्तीय प्रबंधन और सॉफ्टवेयर विकास की जिम्मेदारी दी गई है। देखने में यह योजना सुखद एहसास कराती है, लेकिन है एक मृगमारिचका जैसी। इसकी निष्पक्ष दिव्य संदेश द्वारा पड़ताल करने पर कई चौंकाने वाले तथ्य प्रकाश में आए। शासन ने जिस फर्म  से एमओयू किया है, उस फर्म चार्टेड एकाउंटेंट अग्रवाल-भार्गव एंड एसोसिएट्स ने अपना पंजीकृत कार्यालय सी-97 सेक्टर एम अलीगंज दिखाया गया है। फर्म ने जिस आवास संख्या पर अपना पंजीकृत कार्यालय दिखाया है, वह है ही नहीं। साथ फर्म की योग्यता में तमाम खामियां हैं। इन खामियों को नजर अंदाज किया गया है।
कृषि विभाग के सूत्रों का कहना है कि इस योजना से किसानों को भले ही लाभ नहीं पहुंचा हो, लेकिन कृषि विभाग के आला अफसरों के लिए कमाई का जरिया जरूर बन गया है। पिक एंड चूज के आधार पर हुए एमओयू सर्विस प्रोवाइडर फर्म अग्रवाल भार्गवा एंड एसोसियेटस को मनमानी धनराशि पर दी गई। जबकि नामचीन कम्पनियां काफी कम धनराशि में इस काम को करने के लिए तैयारी हैं। सूत्रों का कहना है कि सर्विस प्रोवाइडर फर्म अग्रवाल भार्गवा एंड एसोसियेटस ने कृषि विभाग से हुए एमओयू की जमकर धज्जियां उड़ाई हैं। अधिकतर डाटा फीडिंग कागजों पर किया गया है। इसमें कृषि विभाग के आला अफसरों ने खूब साथ दिया है, जबकि फील्ड में तैनात कई अफसरों ने सर्विस प्रोवाइडर फर्म अग्रवाल भार्गवा एंड एसोसियेटस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कार्रवाई किए जाने की संस्तुति की थी। लेकिन कृषि विभाग के निदेशक और शासन के कुछ आला अफसरों की मिलीभगत के चलते अधिकतर शिकायतें दबा दी गई हैं। इस संबंध में कृषि निदेशक सोराज सिंंह ने कहा कि पुरानी व्यवस्था है, इसमें मैं क्या कर सकता हूं, अगर कोई अनियमितता हो रही है, तो उसका संज्ञान में लेकर जांच करवा कर कार्रवाई करूंगा। प्रमुख सचिव कृषि अमित मोहन प्रसाद और कृषि उत्पादन आयुक्त आर.पी. सिंह से सम्पर्क किए जाने पर प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।

 

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