18 July, 2018

किसानों को बीज उपलब्ध करा पाने में फेल कृषि विभाग, सहकारिता, यूपी एग्रो, बीज विकास निगम

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  • किसानों को बीज उपलब्ध नहीं करा पा रहा कृषि विभाग
  • सहकारिता, यूपी एग्रो, बीज विकास निगम समेत सभी विभाग फिसड्डी
  • निजी कम्पनियों के सहारे रहते हैं किसान

लखनऊ। किसानों को नवीन तकनीक बताकर उन्नतशील खेती कराने का दावा करने वाला कृषि विभाग जरूरत के बीज भी उपलब्ध नहीं करा पाता है। चालू खरीफ की फसल के दौरान भी किसानों को मोटे अनाजों में मक्का, ज्वार व बाजरा जैसी फसलों के बीजों के लिए निजी कम्पनियों के सहारे रहना पड़ा।

कृषि से जुड़े सहकारिता, यूपी एग्रो, उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम, कृभको, आईएफएफडीसी आदि विभाग भी किसानों को नाम मात्र का बीज देकर अपना कर्तव्य निभा देते हैं। ऐसी परिस्थितियों में किसानों को या तो निजी बीज कम्पनियों से बीज खरीदना पड़ता है या फिर अपने घर में रखे परम्परागत बीजों के सहारे ही खेती करते हैं। इसका सीधा असर फसलों के उत्पादन पर पड़ता है।

फसल चक्र शुरू होने से पहले ही कृषि विभाग सहित किसानों से जुड़े सभी विभाग उनके लिए बीज, उर्वरक, कृषि रक्षा रसायन व कृषि यंत्र आदि व्यवस्था करने की अपनी योजना बनाते हैं। इसमें कृषि विभाग सभी विभागों का नोडल होता है, लेकिन यह विभाग किसी भी फसल में किसानों को उनकी मांग के अनुरूप बीज तक नहीं उपलब्ध करा पाते हैं जिसके कारण किसानों को निजी बीज कम्पनियों के सहारे रहना पड़ता है। अभी हाल में ही बोई गयी खरीफ की फसल को ही यदि देखा जाए तो कृषि विभाग मुख्य फसल धान सहित मक्का, ज्वार, बाजरा, उरद, मूंग, अरहर, तिल, सोयाबीन, मूंगफली आदि फसलों का बीज किसानों की जरूरत के हिसाब ने नहीं उपलब्ध कराया पाया।

कृषि विभाग ने धान की बीज उपलब्ध कराने के लिए 54897 कुन्तल का लक्ष्य रखा था, जिसमें से 50963 कुन्तल की ही उपलब्धता हो पायी और इसमें 49797 कुन्तल ही वितरित हो पाया। इसी तरह सहकारिता विभाग ने दो हजार कुन्तल के लक्ष्य में 408 कुन्तल, यूपी एग्रो ने एक हजार कुन्तल के लक्ष्य में 538 कुन्तल, उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम ने 1500 कुन्तल के लक्ष्य में 283 कुन्तल, कृभको ने 1500 कुन्तल के लक्ष्य में 327 कुन्तल, आईएफएफडीसी ने 2000 कुन्तल के लक्ष्य में 107 कुन्तल का ही वितरण किया। ठीक इसके विपरीत निजी क्षेत्र की कम्पनियों के प्रमाणित बीज के लिए विभाग ने 618103 कुन्तल के लक्ष्य में 635789 कुन्तल धान के बीज की बिक्री की।

इसी तरह मोटे अनाजों में मक्का, ज्वार, बाजरा का बीज किसी भी विभाग के पास नहीं था। तीनों फसलों के बीज के लिए किसान सिर्फ निजी कम्पनियों के सहारे ही रहे। उरद, मूंग, अरहर, तिल, सोयाबीन, मूंगफली, ढैंचा आदि के बीज में कृषि विभाग की तो कुछ उपलब्धता जरूर रही, लेकिन सहकारिता, यूपी एग्रो, उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम, कृभको, आईएफएफडीसी ने कोई बीज उपलब्ध नहीं कराया, जबकि उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम को इन बीजों को उपलब्ध कराने का लक्ष्य भी दिया गया था। सरकारी व अर्ध सरकारी विभागों व निगमों के इस रवैये के चलते किसानों को उनकी जरूरत के हिसाब से शुद्ध बीज नहीं मिल पाता है। ऐसे में वह निजी कम्पनियों की ओर भागते हैं।

rgautamlko@gmail.com

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