20 July, 2018

योगी के ‘दम’, माया के ‘खम’ से अखिलेश ‘बेदम’

Yogi Adityanath, Loksabha By Poll, Uttar Pradesh
एनडीएस ब्यूरो
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करिश्मे ने जहां भारतीय जनता पार्टी को प्रदेश की 16 में से 14 नगर निगम सीटें दिला दीं वहीं लखनऊ नगर निगम चुनाव में लगातार पांचवीं बार भाजपा का परचम लहराया। लखनऊ से पार्टी की संयुक्ता भाटिया ने नगर निगम की पहली महिला महापौर निर्वाचित होकर इतिहास बनाया है। उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी सपा की प्रत्याशी मीरा वर्धन को 1,31,356 मतों के अंतर से परास्त कर रिकार्ड जीत दर्ज की। संयुक्ता भाटिया को 3,77,166 मत मिले, जबकि मीरा वर्धन को 2,45,810 मतों से ही संतोष करना पड़ा। वर्ष 1995 से लेकर अब तक विजयी रहे भाजपा के महापौर प्रत्याशियों में संयुक्ता ने सर्वाधिक 3,77,166 मत हासिल कर रिकार्ड बनाया है। कांग्रेस की प्रत्याशी प्रेमा अवस्थी 1,09,571 मत प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रहीं। बसपा की बुलबुल गोदियाल को महज 83,120 मत मिले और वह चौथे स्थान पर रहीं। पहली बार नगर निगम चुनाव में उतरी आम आदमी पार्टी के हाथ निराशा ही लगी है। आप की प्रत्याशी प्रियंका महेश्वरी महज 24,577 मत ही हासिल कर सकीं। 26 नवम्बर को पड़े मतों की गिनती रमाबाई अम्बेडकर मैदान में शक्रवार सुबह शुरू हुई और शाम तक महापौर सहित सभी 110 पार्षद पदों के परिणाम घोषित कर दिये गये।
राजधानी के 110 वार्डो वाले लखनऊ नगर निगम में भाजपा ने पिछले सभी रिकार्ड ध्वस्त करते हुए पहली बार 59 सीटों पर विजय हासिल की। समाजवादी पार्टी को इस चुनाव में कोई खास सफलता नहीं मिली। उधर प्रदेश के 16 नगर निगमों में से 14 पर भाजपा ने कब्जा कर लिया है। दो सीटों पर बसपा ने बाजी मारी है। समाजवादी पार्टी व कांग्रेस का महापौर पद पर खाता नहीं खुल सका है। नगर पालिका परिषदों व नगर पंचायतों में भी भाजपा ने अन्य दलों की अपेक्षा बाजी मारी है। मतगणना के दौरान देवरिया व मेरठ में प्रत्याशियों व उनके समर्थकों ने जमकर हंगामा किया है। अमेठी में कांग्रेस को मतदाताओं ने नकार दिया है। प्रदेश के नवनिर्वाचित मेयरों में लखनऊ में संयुक्ता भाटिया, आगरा में नवीन जैन, कानपुर नगर में प्रमिला पाण्डेय झांसी में रामतीर्थ सिंहल, वाराणसी में मृदुला जायसवाल, इलाहाबाद में अभिलाषा गुप्ता नंदी, गोरखपुर में सीताराम जायसवाल, मथुरा-वृन्दावन में मुकेश आर्य, फिरोजाबाद में नूतन राठौर, गाजियाबाद में आशा शर्मा, सहारनपुर में संजीव वालिया, बरेली में उमेश गौतम, मुरादाबाद में विनोद अग्रवाल व अयोध्या में ऋषिकेश उपाध्याय ने मेयर का चुनाव जीत भाजपा का परचम लहराया है। इसके अलावा दो सीटों पर बसपा ने बाजी मारी। इसमें मेरठ में सुनीता वर्मा व अलीगढ़ से फुरकान को जीत हासिल हुई है। 16 नगर निगमों में पार्षद के 1300 पदों में भाजपा को अकेले 564 सीटें हासिल हुई हैं। सपा को 201, बसपा को 147 व कांग्रेस को 110 वार्ड पर जीत हासिल हुई है। नगर पालिका परिषद की सीटों पर भी भाजपा सबसे ऊपर है।
भाजपा को नगर पालिका परिषद के 198 अध्यक्ष पदों में 68 पर सफलता मिली है। समाजवादी पार्टी 45 सीट पाकर दूसरे स्थान पर जबकि बसपा 29 सीटें पाकर तीसरे व कांग्रेस नौ सीटें पाकर चौथे स्थान पर रही। नगर पालिका परिषद के सदस्य पदों में 5261 पदों में से 907 पर भाजपा, 463 पर सपा, 252 पर बसपा और 146 सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की है। शेष पदों पर निर्दलीय व अन्य दलों की जीत हुई है। इस बार नगर पंचायतों में भी भाजपा अपना परचम लहराने में सफल रही है। प्रदेश में 438 नगर पंचायत की सीटों में से अध्यक्ष पद पर 100 सीटों पर कब्जा कर लिया है। सपा को 83, बसपा को 45 व कांग्रेस को 17 नगर पंचायतों में अध्यक्ष मिले हैं। इसी तरह नगर पंचायत के सदस्य के 5434 पदों में से 661 भाजपा को, 453 सपा को, 214 बसपा को तथा 125 सदस्य कांग्रेस को मिले हैं। आगरा की नगर पालिका परिषद शमसाबाद की मतगणना करा रहे उपजिलाधिकारी की लापरवाही के चलते यहां पर दोबारा मतगणना करानी पड़ी। यहां पर एसडीएम ने प्रत्येक चक्र की मतगणना के बाद प्रत्याशियों या उनके एजेन्टों से हस्ताक्षर कराना भूल गये। नतीजे में भाजपा लगभग तीन सौ वोटों से हार गयी। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया और कहा कि मुझसे परिणाम वाली सीट पर हस्ताक्षर ही नहीं कराये गये। मामला राज्य निर्वाचन आयोग तक पहुंचा लेकिन बाद में परिणाम घोषित कर दिये गए।

 

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