22 January, 2019

अलोक वर्मा की CBI से छुट्टी

  • चयन समिति ने 2-1 से किया फैसला, खड़गे ने किया विरोध
  • राफेल पर जांच के डर से हटाया वर्मा को
  • वर्मा को पक्ष रखने का मिले मौका

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति ने अलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाकर दमकल, असैन्य रक्षा एवं होम गार्ड महानिदेशक बनाया गया। वह इस पद पर अपनी सेवानिवृत्ति यानि 31 जनवरी 2019 तक बने रहेंगे। अतिरिक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को नए निदेशक की नियुक्ति तक सीबीआई प्रमुख का पद फिर सौंपा गया। विश्वस्त सूत्रों ने अनुसार प्रधानमंत्री, लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस के नेता मल्लिकाजरुन खड़गे तथा उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के प्रतिनिधि न्यायमूर्ति अर्जन कुमार सीकरी की यहां बैठक हुई, जिसमें वर्मा को निदेशक के पद से हटाने का निर्णय लिया। यह निर्णय 2:1 के बहुमत के आधार पर किया गया। मोदी और न्यायमूर्ति सीकरी जहां वर्मा को हटाने के पक्ष में थे, वहीं खड़गे ने इसका विरोध किया और अंतत: बहुमत के फैसले के आधार पर वर्मा को हटाने का निर्णय लिया गया।मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई वर्मा की याचिका की सुनवाई करने वाली उस खंडपीठ का हिस्सा थे, जिसने गत मंगलवार को उन्हें (वर्मा को) निदेशक पद पर पुन: बहाल करने का आदेश दिया था।

इसलिए चयन समिति में वह खुद नहीं शामिल हुए थे और उन्होंने न्यायमूर्ति सिकरी को अपना प्रतिनिधि बनाकर भेजा था। समिति ने इन मुद्दों पर गौर कर लिया निर्णय : सूत्रों के मुताबिक चयन समिति ने वर्मा के खिलाफ सीवीसी द्वारा उठाए गए मुद्दों को बेहद गंभीर माना। इसी के मद्देनजर समिति ने यह पाया कि अतिसंवेदनशील संस्था में वर्मा अपनी वह विश्वसनीयता बरकरार रखने में नाकाम रहे, जिसकी अपेक्षा इस पद के लिए की जाती है। सीवीसी द्वारा दिए गए साक्ष्यों में यह भी दावा किया गया है कि मोईन कुरैशी मामले की जांच को न सिर्फ प्रभावित किया गया है बल्कि इस मामले में दो करोड़ रपए की रिश्वत लेने के भी पुख्ता प्रमाण हैं। इतना ही नहीं सीवीसी ने यह भी पाया है कि आईआरसीटीसी मामले में वर्मा ने जानबूझकर एक व्यक्ति का नाम एफआईआर से निकाल दिया। इसकी वजह वह खुद जानें।वर्मा थे एक्शन में : सीबीआई प्रमुख वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे जिसके बाद उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया था। वर्मा ने बुधवार को पदभार पुन: संभालते हुए एम नागेश्वर राव द्वारा किये गए ज्यादातर तबादले रद्द कर दिये। राव वर्मा की अनुपस्थिति में अंतरिम सीबीआई प्रमुख नियुक्त किए गए थे।

कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने दावा किया आलोक वर्मा को हटाने का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राफेल में हुए भ्रष्टाचार से बचने के लिए किया है। उन्होंने कहा कि क्या वजह है कि वर्मा के खिलाफ कार्रवाई उस समय की गई जब यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने सीबीआई को राफेल के दस्तावेज सौंपे और जांच की मांग की। राहुल गांधी ने भी बृहस्पतिवार को एक ट्वीट किया था कि वर्मा को हटाने की जल्दी जांच से बचने के लिए है।

बैठक के पहले, खड़गे ने कहा कि उन्होंने मामले में केंद्रीय सतर्कता आयोग की जांच रिपोर्ट सहित विभिन्न दस्तावेज मांगे हैं। उन्होंने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा, मैंने मामले में सीवीसी की जांच रिपोर्ट सहित कुछ दस्तावेज देने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि वर्मा को भी कमेटी के सामने उपस्थित होने का मौका मिलना चाहिए और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका देना चाहिए। अहम बैठक से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी सरकार पर हमला बोला और कहा कि राफेल मामले के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीबीआई प्रमुख अलोक वर्मा को हटाने की जल्दबाजी में हैं। राहुल ने ट्वीट कर कहा, प्रधानमंत्री सीबीआई प्रमुख को हटाने की इतनी जल्दबाजी में क्यों हैं? उन्होंने सीबीआई प्रमुख को चयन समिति के समक्ष अपना पक्ष रखने की अनुमति क्यों नहीं दी? उन्होंने कहा, जवाब है: राफेल। उच्चतम न्यायालय ने सरकार से फैसले के एक हफ्ते के अंदर ही बैठक बुलाने को कहा था।

rgautamlko@gmail.com

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