21 October, 2018

मिशन पर अमर-शिवपाल!

त्रिनाथ के. शर्मा
लखनऊ। सपा-बसपा के संभावित सियासी गठबंधन को चित्त करने के लिए परदे के पीछे खेल शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव द्वारा बनाएं गए समाजवादी सेक्युलर मोर्चे ने सूबे का सियासी पारा बढ़ा दिया है। इससे जहां महागठबंधन बनने की तैयारियों को एक बड़ा झटका माना जा रहा है वहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को लगता है कि यही मोर्चा और सपा से नाराज चल रहे सांसद अमर सिंह ही महागठबंधन की गांठे खोलने में अपरोक्ष रूप से उसकी मदद करेंगे। इस मुद्दे पर भले भाजपा अभी दूर से तमाशा देख रही हो लेकिन उसके लिए तस्सलीबक्श बात यह है कि इस मोर्चे ने उसकी चिंता को कुछ कम जरूर किया है। यूपी में यदि महागठबंधन का वजूद में आता है तो भाजपा की दुश्वारियां बढ़ेगी इससे राजनीतिक प्रेक्षकों को इंकार नहीं हैं लेकिन एकाएक इस घटनाक्रम से लगता है कि कहीं न कहीं सूबे में हो रही विपक्षी एकता में यह मोर्चा एक स्पीड ब्रेकर का काम कर सकता है। सपा के वरिष्ठ नेता रहे अमर सिंह जिन्हें शिवपाल सिंह यादव का काफी करीबी माना जाता है ने खुलकर कह दिया कि वे भाजपा में शामिल नहीं होंगे, लेकिन चुनाव में वे मोदी के लिए प्रचार करेंगे। अमर सिंह की भाजपा की बढ़ती नजदीकियों के बीच शिवपाल यादव के इस मास्टर स्ट्रोक को सपा प्रमुख अखिलेश यादव भाजपा की चाल बता रहे है। हालांकि सपा के वरिष्ठ नेता रहे शिवपाल यादव ने अपने मोर्चे की अधिकारिक घोषणा की है, लेकिन इसके गठन का एलान वे साल 2017 में 5 मई को ही कर चुके थे। सपा में अखिलेश और शिवपाल की रार किसी से छिपी नहीं रही। सैफई से सड़क तक यादव परिवार में मचे घमासान का सदन से सड़क तक बैठा हर शख्स गवाह बना।  साल 2017 के चुनाव से ठीक पहले 2016 के आखिरी महीनों में जिस तरह सपा मुख्यालय पार्टी के शीर्षस्थ नेताओं प्रमुख पदाधिकारियों कार्यकर्ताओं के सामने मंच पर जिस तरह दो के बीच तल्खी दिखी उसी के बाद से यह माना जा रहा था कि सपा में यह सब होना ही था। घर की सिर फुटव्वल का खामियाजा भी सपा को भुगतना पड़ा। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए मुलायम सिंह यादव ने जब अखिलेश यादव को हटाकर साल 2016 में 13 सितंबर को शिवपाल सिंह यादव को प्रदेशाध्यक्ष बनाया तो नाराज अखिलेश ने 23 अक्टूबर 2016 को शिवपाल समेत  कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश सिंह, नारद राय, और राज्यमंत्री सैय्यदा शादाब फातिमा को बर्खास्त किया था उसके बाद 1 जनवरी 2017 को जनेश्वर मिश्र पार्क में आयोजिक पार्टी पदाधिकारियों के सम्मेलन में उन्हें प्रदेशाध्यक्ष पद से भी बर्खास्त  था। सपा में प्रदेशाध्यक्ष से लेकर मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रह चुके शिवपाल यादव के नए मोर्चे में फिलवक्त सपा का कोई बड़ा चेहरा नहीं दिख रहा है पूर्व मंत्री शारदा प्रताप शुक्ल और पूर्व विधायक कमाल युसुफ  मलिक के अलावा लेकिन माना जा रहा है लोकसभा चुनाव आने तक यह  मोर्चा में सपा में हाशिए पर चल रहे नेताओं के लिए संजीवनी का काम कर सकता है।

समाजवादी सेक्युलर मोर्चा लड़ेगा लोकसभा चुनाव

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के बागी नेता व विधायक शिवपाल सिंह यादव ने अपनी नई पार्टी समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के बैनर तले आगामी लोकसभा चुनाव में यूपी की सभी सीटों पर लडऩे का ऐलान कर दिया है। श्री यादव ने दो दिन पहले ही अपने मोर्चा गठन की घोषणा की थी। उन्होंने अपने मोर्चा की राजनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जनसंवाद शुरू कर दिया है। इसी सिलसिले में श्री यादव शुक्रवार को बागपत पहुंचे। यहां उन्होंने दरकवदा गांव में मीडिया से बातचीत में कहा सपा में उपेक्षित और अपमानित होने पर मोर्चा गठित किया। मोर्चा का मकसद उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलना है। भाजपा में शामिल होने के सवाल को सिरे से खारिज करते हुए मोर्चा अध्यक्ष श्री यादव ने कहा कि बड़े भाई मुलायम सिंह यादव के साथ मिलकर सपा का गठन किया था। सपा में उनको ही नहीं कई वरिष्ठ नेताओं को अपमानित किया जा रहा था। सभी को पार्टी में हाशिये पर रख दिया गया था। इस मौके पर 2014 में कांग्रेस के टिकट पर संभल से चुनाव लडऩे वाले आचार्य प्रमोद कृष्णम भी मौजूद थे। शिवपाल ने मोर्चा से जुड़े कार्यकर्ताओं से अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए अभी से तैयारियों में जुट जाने का आह्वान करते हुए कहा कि उनकी पार्टी सभी 80 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगा। श्री यादव ने अपने भतीजे और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के उस बयान को भी निराधार बताया जिसमें उनकी भाजपा से सांठगांठ की बात कही गयी थी। पत्रकारों के इस सवाल पर कि उनकी सपा से नाराजगी है या पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से, उन्होंने कहा कि उनकी किसी से मुखालफत नहीं है। वह उन लोगों की लड़ाई लड़ रहे हैं जो सपा में उपेक्षित और अपमानित किये जा रहे हैं। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव का भी सपा में सम्मान नहीं रहा है। इससे वह बहुत आहत हैं। ऐसे लोग जिनका सपा में अपमान हो रहा है, उन्हें एक मंच पर लाने के साथ ही अन्य क्षेत्रीय दलों को भी मोर्चा से जोडऩे का प्रयास किया जायेगा। उन्होंने कहा समाजवादी पार्टी जिसे बनाया अब इसके टूटने का उन्हें दुख भी है। परिवार को एक साथ रखने की बहुत कोशिश की लेकिन अपमान सहने की भी एक सीमा होती है। उन्होंने कहा कि मोर्चा के पदाधिकारी गांव-गांव घूमकर लोगों से मुलाकात करेंगे। मोर्चा को जो समर्थन मिल रहा है उससे साफ  है कि लोगों में काफी उत्साह है और बड़ी संख्या में लोग उनके साथ जुड़ रहे हैं।

 

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