11 December, 2018

योगी की नजरें इनायत होने के बावजूद अम्बेडकर-कांशीराम स्मारक व पार्क बदहाल

Ambedkar,Kanshiram, Memorial-Park, yogi government, Mayawati
  • अनुरक्षण के नाम पर करोड़ों की हेरा-फेरी
  • देशी-विदेशी पर्यटकों की आमद से बढ़ी एलडीए कमाई

लखनऊ। देश और दुनिया के पयर्टकों के लिए बड़ी पहचान बन चुके अम्बेडकर और कांशीराम स्मारक और पार्क में अनुरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपए का गोलमाल किया जा रहा हैं। इन स्मारकों और पार्कों पर योगी सरकार की नजरें इनायत होने के बावजूद स्मारकों और पार्कों की बदहाली को देखकर अनुरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के दावों की पोल खोल रहा है। जबकि हैरत की बात यह है कि स्मारकों और पार्कों में पर्यटकों की बढ़ती आमद से लखनऊ विकास प्राधिकरण के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्घि हुई है।

Ambedkar,Kanshiram, Memorial-Park, yogi government, Mayawati

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011 में स्मारक आम लोगों के लिए खोले गए थे। तब लगभग 4500 करोड़ रुपये की लागत से स्मारकों का निर्माण करवाया गया था। गोमती नगर स्थित डॉ. अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल, भागीदारी भवन, म्यूजिकल फाउंटेन पार्क और वाह्य क्षेत्र के दो पार्क का निर्माण करवाया गया था। इसी तरह से कानपुर रोड पर कांशीराम ईको गार्डेन, बौद्ध विहार शांति उपवन और कांशीराम स्मारक स्थल बनाए गए थे। पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार की भेदभाव कार्यप्रणाली की वजह से अनुरक्षण के अभाव में पिछले साढ़े छह साल से स्मारकों और पार्क का बुरा हाल होता चला गया। हाथी जगह-जगह से टूटने लगे। जगह-जगह से महंगे पत्थर उखडऩे लगे हैं। ज्यादातर वाटर पंप खराब हो चुके हैं। फायर फाइटिंग सिस्टम और सिक्योरिटी सिस्टम फेल हो चुके हैं। पानी भरने के लिए एक दर्जन से ज्यादा बोरिंग खराब पड़ी हैं। जानकारी के अनुसार सैंडस्टोन से बनाए गए हाथियों की मरम्मत व पेंटिंग पर करीब 28 लाख रुपये खर्च करने का बजट अनुमानित किया गया था। इसी प्रकार 31 लाख में सबमर्सिबल और मोनोब्लॉक पंपों की मरम्मत, नए आरओ और वाटर कूलर के वार्षिक अनुरक्षण पर करीब 10 लाखए फाउंटेन और वाटर बॉडी पर करीब 76 लाख का बजट बना। पार्क और संबंधित क्षेत्र में फायर फाइटिंग सिस्टम के नवीनीकरण के लिए करीब 85 लाख खर्च होने थे। इसी तरह से कई अन्य कार्य के लिए बजट मिला था, मगर स्मारक व पार्कों में एक भी काम होता हुआ नहीं नजर आ रहा है।

Ambedkar,Kanshiram, Memorial-Park, yogi government, Mayawati

मालूम हो कि बसपा सुप्रीमो मायावती के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार स्मारकों, पार्कों में अनुरक्षण के नाम पर वित्तीय अनियमितता की जा रही है। शिड्यूल कास्ट के महापुरूषों की याद में बनाए गए स्मारकों और पार्कों पर योगी सरकार ने मरम्मत के लिए लगभग छह करोड़ रुपए का बजट में प्रावधान किया था। इस बजट से पार्क और स्मारकों को नए सिरे से संवारा जाना था। लेकिन स्मारकों व पार्कों की हालत कुछ और ही बयां कर रही है। स्मारक में लगे हाथियों को न तो ठीक कराया गया है, न ही वाटर कूलर ठीक कराए गए हैं। जबकि स्मारक कर्मचारी बाहर पानी की बोतल पर्यटकों को बेच रहे हैं। स्मारकों और पार्कों में लगे पेड़ और पौधे पानी के अभाव में सूख रहे हैं। जबकि सिंचाई के लिए सबमर्सिबल बोरिंग के नाम पर भी हर वर्ष लाखों रुपए खर्च हो रहे हैं।

फरवरी माह में हुए ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट से पहले सरकार ने सारे काम पूरे करवाए जाने के निर्देश थे। स्मारक व पार्कों में पत्थर उखड़ चुके हैं, उनको दोबारा सही करवाया जाना था। वाटर प्यूरीफायर और वाटर कूलर बदले जाने के लिए सरकार से बजट जारी हुआ था। सभी फाउंटेन दुरुस्त होते मगर फाउंटेन बंद हैं। स्मारक संरक्षण समिति की ओर से इससे संबंधित टेंडर जारी किए गए थे। मगर काम कराए ही नहीं गए और बजट खत्म हो गया। स्थिति यह है कि गोमती नगर स्थित गोमती नगर स्थित डा. आम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल में करीब चार में से दो वाटर कूलर खराब पड़े हैं। स्मारकों और पार्कों का भ्रमण करने आए कई देश और विदेश के पर्यटकों का कहा है कि स्मारक और पार्क बहुत सुंदर बनाए गए हैं। लेकिन कुछ समस्याएं हैं, जैसे पानी और ट्वायलेट की बड़ी समस्या है। पार्क काफी बड़ा है, घंटे घूमने के कारण प्यास लगने पर पानी के लिए तरसना पड़ता है। स्मारक संरक्षण समिति के मुख्य प्रबंधक एम.पी. सिंह का कहना है कि कुछ काम हुए कुछ होने के लिए रह गए हैं। इसके बाद भी अगर बजट मिलने के बाद काम न होने की शिकायत है तो इसकी जांच करायी जाएगी। दोषी होने पर सख्त कार्रवाई होगी।

rgautamlko@gmail.com

Review overview
NO COMMENTS

POST A COMMENT