14 December, 2018

दिलीप महासे के प्रयासों से अमेरिकन पार्लियामेंट में मनाई जाएगी बाबा साहब डा. भीमराव राम जी आंबेडकर की 127वीं जयंती

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  • विश्व से जातीय भेदभाव को मिटाने का संकल्प लिया फाउंडेशन फॉर ह्यूमन होरायजन

मैं तूफानों में चलने का आदी हूँ।
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो।।
हैं फूल रोकते, काटें मुझे चलाते।
मरुस्थल, पहाड़ चलने की चाह बढ़ाते।
सच कहता हूं जब मुश्किलें ना होती हैं।
मेरे पग तब चलने में भी शर्माते।

लखनऊ। यूपी के कवि गोपालदास नीरज द्वारा रचित कविता भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक दिलीप महासे पर सटीक साबित होती है। महाराष्टï्र के मराठावाडा से लेकर अमेरिका तक गरीबी में पले-बढ़े महासे का जीवन संघर्ष समाज के लिए एक प्रेरणादायी है। विश्व में सिम्बल ऑफ नॉलेज के प्रतीक भारत रत्न बाबा साहब डा. भीमराव राम जी आंबेडकर के जीवन संघर्ष से प्रेरणा लेकर बाबा साहब के विचार और सिद्घांत को अमेरिका में प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। समाजसेवी और शिक्षाविद् दिलीप महासे के प्रयासों से अमेरिकी पार्लियामेंट में बीते दो सालों से बाबा साहब की जयंती धूम-धाम से का सिलसिला जारी है।

उल्लेखनीय है कि आईआईटी, हार्वर्ड और यूपीएन शिक्षित भारतीय अमेरिकी दिलीप महासे का शुरूवाती जीवन बहुत ही अभावों और संघर्षों में बीता। महाराष्टï्र के मराठवाडा गांव के एक दलित परिवार में जन्मे दिलीप महासे के परिवार के पास दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं थी। घर का खर्च मां कूड़ा बीन कर अर्जित पैसे से चलाती थी। घर में आर्थिक संकट से उभरने के लिए बचपन में दिलीप महासे भी कूड़ा बीनते थे। मां का अपने बच्चे को शिक्षा दिलाने पर काफी फोकस था। मां की प्रेरणा और प्रयासों से दिलीप महासे को नवोदय विद्यालय में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। कुशाग्र बुद्घि के बदौलत 10 वर्ष की उम्र में नवोदय कालेज से शुरू हुआ शिक्षा का सफर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) तक पहुंचा। शिक्षा के साथ अन्य खर्चाे के लिए श्रमिक लेबर के रूप में काम किया। यहां से स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए अपना एक शोध पत्र अमेरिका के पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय को भेजा। शैक्षिक योग्यता को देखते हुए विश्वविद्यालय ने पीएचडी के छात्रवृत्ति भी प्रदान की। इसके बाद महासे ने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के स्वास्थ्य विज्ञान में मास्टर की डिग्री भी अर्जित की। अमेरिका के न्यू जर्सी में मरीजों के लिए एक क्लिनिक को खोला।

महासे की योग्यता को देखते हुए अमेरिका में स्वास्थ्य देखभाल सलाहकार बन गए। महासे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के राजनीतिक अभियानों में सक्रिय रूप से सहयोग किया। स्वाथ्य राजनीति के पक्षधर दिलीप महासे ने प्रसिद्घ समाजसेवी अन्ना हजारे के भ्रष्टïाचार विरोधी आंदोलन में सक्रिय रूप से काम किया। इसके बाद आम आदमी पार्टी की नीतियों से प्रभावित होकर शामिल हुए।

वर्ष 2016 से दिलीप महासे ने जातीय भेदभाव को दुनिया से समाप्त करने के लिए अपनी मुहिम को तेज कर दिया है। इसी मुहिम के तहत दिलीप महासे के प्रयासों से अमेरिका पार्लियामेंट में बाबा साहब डा. भीमराव राम जी आंबेडकर की जयंती मनाई जा रही है। इस वर्ष 14 अप्रैल 2018 को विश्व संगठन के मुख्यालय में संयुक्त राष्ट्र और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक मामलों के संयुक्त राष्ट्र विभाग (यूएनडीईएसए) बाबा साहब डा. भीमराव राम जी आंबेडकर की 127वीं जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी। इस जयंती में अमेरिका समेत विश्व के दूसरे देशों के नागरिक शामिल होंगे। इसके साथ ही दिलीप महासे ने अपने सामाजिक दायित्वों को निभाने के लिए एनजीओ फाउंडेशन फॉर ह्यूमन होरायजन का गठन किया है। इस एनजीओ के तहत पूरी दुनिया से जातीय भेदभाव मुक्त कराने का मुहिम छेड़ रखी है। समाजसेवी और शिक्षाविद् दिलीप महासे ने कहा कि विश्व में जातीय भेदभाव मात्र बाबा साहब डा. भीमराव राम जी आंबेडकर के सिद्घांत और नीतियों से ही समाप्त किया जा सकता है। आज विश्व में बाबा साहब सिद्घांतों की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है। यह 125 करोड़ की आबादी वाले भारत देश के लिए बड़े गर्व की बात है।

rgautamlko@gmail.com

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