21 October, 2018

रोजाना बाबरी मस्जिद केस की सुनवाई कर दो साल में होगा निपटारा

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नई दिल्ली। सीबीआई ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत 13 नेताओं के खिलाफ बाबरी मस्जिद गिराने की साजिश रचने के आरोप फिर से बहाल करने के लिए दलीलें दीं। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि रायबरेली और लखनऊ में चल रहे दो केसों पर एकसाथ लखनऊ में सुनवाई का आदेश दिया जा सकता है। यह भी कहा कि मामले को 25 साल हो चुके हैं। अब तक गवाहों के बयान ही चल रहे हैं। ऐसे में रोजाना केस की सुनवाई कर इसे दो साल में निपटाना चाहिए।

आडवाणी और जोशी के वकील ने जॉइंट ट्रायल और केस ट्रांसफर का विरोध किया। सीबीआई ने कहा कि वह जॉइंट ट्रायल पर दलील नहीं दे रही, लेकिन नेताओं के खिलाफ साजिश के आरोप बहाल होने चाहिए। सीबीआई ने बताया कि रायबरेली में 57 गवाहों के बयान हुए हैं, 100 गवाहों के बयान दर्ज होने हैं। ट्रायल एकसाथ करने से केस में वक्त लगेगा, क्योंकि गवाहों को दोबारा बुलाया जाएगा। फिर बचाव पक्ष गवाहों से जिरह करेगा। बाबरी मस्जिद गिराने के आरोपित कारसेवकों के खिलाफ लखनऊ में केस पेंडिंग हैं। रायबरेली में बीजेपी नेताओं के खिलाफ मामला चल रहा है। सीबीआई ने बाद में बीजेपी नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश की धारा 120-बी जोड़ी थी, जिसे स्पेशल कोर्ट ने तकनीकी आधार पर रद कर दिया था। उस पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी मुहर लगा दी थी। सीबीआई इसी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट आई है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि महज तकनीकी आधार पर राहत नहीं दी जा सकती, इनके खिलाफ साजिश के आरोप में सुनवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि हम रायबरेली से केस लखनऊ ट्रांसफर करवाना चाहते हैं और इसके लिए हम अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल कर सकते हैं।

1992 में हुए विध्वंस में राम जन्म भूमि के इंचार्ज वादी गंगा प्रसाद तिवारी की याचिका पर मामला दर्ज किया गया था। रायबरेली कोर्ट में इस मामले की पहली सुनवाई 16 अप्रैल 2003 को हुई थी। 2007 से गवाहियां शुरू हुई थीं। अब तक 57 गवाह पेश हो चुके है। 1993 में फैज़ाबाद कोर्ट में चल रहा यह मामला ललितपुर में आया, जिसके बाद प्रदेश की तत्कालीन सीएम मायावती की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया गया। हलफनामे में कहा गया कि इस मामले की सुनवाई रायबरेली में भी हो सकती है, जिसके बाद 2003 में यह मामला रायबरेली ट्रांसफर कर दिया गया। मामले के एक पक्षकार की ओर से पेश कपिल सिब्बल ने दलील दी कि आपराधिक साजिश का केस एक साथ चलना चाहिए। हाई कोर्ट ने तकनीकी आधार पर आरोप हटाए हैं, केस को मेरिट के आधार पर देखा ही नहीं गया। जॉइंट ट्रायल जरूरी है। एक घटना के कारण ही दोनों केस हैं और दोनों में एक ही साजिश का मामला है। अदालत ने सभी पक्षकारों से लिखित दलील मंगलवार तक पेश करने को कहा है।

2003 में हुई थी पहली सुनवाई

•लालकृष्ण आडवाणी
•मुरली मनोहर जोशी
•उमा भारती
•साध्वी ऋतंभरा
•विष्णु हरि डालमिया
•गिरिराज किशोर*
•विनय कटियार
•अशोक सिंघल*
*अशोक सिंघल और गिरिराज किशोर का िनधन हो चुका है।

rgautamlko@gmail.com

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