15 August, 2018

भाजपा की नियत अतिपिछड़ों को न्याय देने की नहीं, पिछड़ों को बांट कर कमजोर करने की है 

  • यादव-निषाद-जाटव वोटबैंक में सेंधमारी के लिए गंदी राजनीति कर रही भाजपा-लौटनराम निषाद
लखनऊ। भाजपा की नियत अतिपिछड़ों, अत्यन्त पिछड़ों, वंचितों व अतिदलितों को सामाजिक न्याय देने की नहीं बल्कि उपवर्गीकरण के नाम पर पिछड़ों दलितों को बांट कर नफरत व कटुता की भावना पैदा कर उनकी ताकत को कमजोर करने की साजिश है। उक्त प्रतिक्र्रिया व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय निषाद संघ (एन.ए.एफ.) के राष्ट्रीय सचिव चैधरी लौटन राम निषाद ने कहा कि ओबीसी को पिछड़ा-अतिपिछड़ा-सर्वाधिक पिछड़ा (ओबीसी-ईबीसी-एमबीसी) व अनुसूचित जाति को दलित, अतिदलित के रूप में बांटने का राजनीतिक षडयन्त्र कर यादव-निषाद-जाटव वोट बैंक में सेंधमारी के लिए गंदी राजनीति कर रही है। भाजपा के इशारे पर सारनाथ वाराणसी में 8 जून को सम्पन्न पूर्वांचल यादव सम्मेलन में भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री व काशीक्षेत्र के अध्यक्ष ने यादव समाज में नफरत की भावना पैदा करने के लिए गोत्र व उपजाति की गंदी राजनीति किये, जो अत्यन्त निन्दनीय है। भाजपा शुरू से यादव- गैर यादव पिछड़ों व जाटव- गैर जाटव दलितों में नफरत पैदा कर वोट बैंक की राजनीति करती आ रही है।
श्री निषाद ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा जस्टिस रोहिणी आयोग व उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जस्टिस राघवेन्द्र कुमार समिति का गठन अतिपिछड़ों को भ्रमित करने व लालीपाॅप दिखाने की राजनीति का हिस्सा है।  उन्होंने कहा कि भाजपा सामाजिक न्याय व समता की पक्षधर है और अतिपिछड़ों व अतिदलितों को सामाजिक न्याय देने की मंशा रखती है तो सविंधान के अनुच्छेद 16(4) व 16(4-1) के तहत एससी/एसटी की भांति ओबीसी को जनसंख्यानुपाती आरक्षण देकर मण्डल कमीशन के सदस्य एल.आर. नायक के डिसेन्ट नोट व मिसलेनियस के अनुसार ओबीसी का उपवर्गीकरण करें। उन्होने कहा कि ओबीसी की जनगणना रिपोर्ट को उजागर कर समानुपाती आरक्षण की व्यवस्था किये बिना उपवर्गीकरण किया जाना पिछड़ों को न्याय देने की नहीं बल्कि आपस में लड़ाकर इनकी ताकत को कमजोर करने व सामाजिक न्याय से वंचित करने की साजिश है। भाजपा लोकसभा चुनाव- 2019 को ध्यान में रखकर केवल पिछड़ों व दलितों को आपस में लड़ाकर वोट बैंक की राजनीति की भूमिका के तहत राजनीति कर रही है। उसकी मंशा अतिदलितों व अतिपिछड़ों को सामाजिक न्याय व आरक्षण का लाभ देने की नहीं है।
निषाद ने कहा कि 21 अप्रैल 2017 को मा0 उच्चतम न्यायालय के युगल पीठ के निर्णय के आधार पर ओबीसी, एससी व एसटी को उनके कोटा तक ही सीमित कर 50.5 प्रतिशत अनारक्षित कोटा को सामान्य वर्ग को अघोषित तौर पर आरक्षण दे दिया गया, पर अपने को पिछड़ी जाति का बताने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस निर्णय को निष्प्रभावी करने के लिए संविधान पीठ व पूर्ण पीठ के सामने सरकार का पक्ष नहीं रखा बल्कि उल्टे उक्त निर्णय के आलोक में ओ.एम.आर. जारी करा दिया। भाजपा व संघ का उक्त कथन- ‘‘हिन्दू व हिन्दुत्व खतरे में‘‘ पिछड़ों दलितों को मुसलमानों के खिलाफ ध्रुवीकृत करने की गन्दी राजनीति हैं। क्या मण्डल कमीशन का विरोध मुसलमानों ने किया ? क्या वर्ण व्यवस्था व जातिवाद को मुसलमानों ने बढावा दिया ? शूद्रों (पिछड़ों – दलितों- आदिवासियों) को पढने से रोकने व शिक्षा से वंचित करने का काम क्या मुसलमानों व ईसाईयों ने  किया ? उन्होंने कहा कि अगर मुसलमानों ने उक्त कुकर्म नहीं किया तो हिन्दुत्व खतरें में कैसे और मुसलमान ओबीसी, एससी, एसटी का दुश्मन कैसे ? जो मण्डल विरोधी, वर्ण व्यवस्था का पोषक है, वह सामाजिक न्याय का समर्थक नहीं हो सकता। जलवाहा, चरवाहा, हरवाहा, व करवाहा समाज भाजपा व संघ की सामाजिक न्याय विरोधी नीतियों को भंलि-भांति जान चुका है और 2019 में उसके बहकावे में न आकर उसे 73 से 3 सीट तक सीट तक सीमित करने का काम करेगा।

rgautamlko@gmail.com

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