27 May, 2018

भाजपा सांसद ने खोली यूपी के खेल की दुर्दशा की पोल

एम. एम. सरोज

लखनऊ।  लोकसभा क्षेत्र के भाजपा सांसद और भारतीय कुश्ती संघ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने फेसबुक पर प्रदेश के खिलाडिय़ों की व्यथा-कथा लिखकर यूपी के खेल विभाग और मंत्री की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है। खेल मंत्री और अपर मुख्य सचिव खेल के संरक्षण में खेल निदेशक की अनियमित नीति से जहां खेल बजट में खूब बाजीगरी हो रही है वहीं खेल और खिलाड़ी प्रभावित हैं। खेल विभाग में चल रही अनियमितताओं के निष्पक्ष दिव्य संदेश में खुलासे पर मुख्य सचिव ने अपर मुख्य सचिव खेल से स्पष्टïीकरण तलब किया है।
उल्लेखनीय है कि निष्पक्ष दिव्य संदेश ने खेल विभाग में चल रहे अनियमितताओं के खेल को उजागर किया है। भारी संख्या में खिलाड़ी और खेल विभाग के अफसर खेल निदेशक डा. राम प्रकाश सिंह की कमाओ-खाओ कार्यशैली की वजह से अजिज हैं। निष्पक्ष दिव्य संदेश में छपी खबरों को संज्ञान में लेकर मुख्य सचिव राजीव कुमार ने पिछले माह अपर मुख्य सचिव खेल मोहम्मद इफ्तेखारूद्दीन से स्पष्टïीकरण तलब किया है।
खेल विभाग के सूत्रों का कहना है कि खेल मंत्री चेतन चौहान और अपर मुख्य सचिव खेल मोहम्मद इफ्तेखारूद्दीन खेल निदेशक डा. राम प्रकाश सिंह पर अंधभक्तों की तरह विश्वास करते हैं। कई विधायकों ने भी खेल निदेशक के कारनामों की शिकायत सरकार से की है। यही वजह है कि तमाम अनियमिताओं की शिकायतों पर चुप्पी साध ली है। लेकिन मुख्य सचिव द्वारा खेल विभाग के कारनामों पर मांगी गई स्पष्टïीकरण से हड़कम्प मचा हुआ है। खेल मंत्री और और अपर मुख्य सचिव खेल मोहम्मद इफ्तेखारूद्दीन ने मुख्य सचिव को स्पष्टïीकरण भेज दिया है। जिसमें खेल निदेशक का बचाव किया गया है।
फेसबुक के जरिये बयां किया खिलाडिय़ों का दर्द
मुख्यमंत्री जी, बहुत हो चुका अब नहीं होता बर्दाश्त। प्रदेश को खेलों में शर्मसार होने से बचा लीजिए। खेल मंत्री के खिलाड़ी रहते हुए भी ऐसी हालत है, छोटे-छोटे राज्यों की तुलना में यहां के खिलाड़ी नहीं कर पाते प्रदर्शन। ये लाइनें कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र के भाजपा सांसद और भारतीय कुश्ती संघ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह द्वारा फेसबुक पर पोस्ट मुख्यमंत्री के नाम चि_ी में अंकित हैं। सांसद की नाराजगी प्रदेश में खिलाडिय़ों की दशा को लेकर लिखी गई है लेकिन लोग इसके राजनीतिक निहितार्थ भी निकालने से गुरेज नहीं कर रहे। सांसद ने हाल के दिनों में हुए कामनवेल्थ गेम्स में प्रदेश के खिलाडिय़ों की दयनीय हालत पर चिंता ही नहीं जताई है, बल्कि शर्मिंदगी भी व्यक्त की है। साथ ही यूपी ओलंपिक एसोसिएशन पर भी सवाल उठाया है। खुद को जागरूक नागरिक होने का हवाला देते हुए सांसद ने लिखा है कि यूपी को इस प्रतियोगिता में महज पांच पदक ही मिले। यह हालत तब है जबकि प्रदेश के राज्य मंत्री खुद खिलाड़ी रह चुके हैं। खिलाडिय़ों की इस दशा के लिए उन्हें रोजगार मुहैया न कराया जाना काफी हद तक जिम्मेदार है। खेल कोटा खत्म करने वाली पूर्ववर्ती सरकारों को आड़े हाथों लिया है। साथ ही यह भी लिखा है कि पूर्ववर्ती सरकारों पर सवाल हम तब उठा सकते हैं जबकि अपनी सरकार में इस दिशा में ठोस कदम उठाया गया हो। अभी तक प्रदेश सरकार विभिन्न खेलों में 50 से 60 खिलाडिय़ों का ही ट्रायल करा पाई। आगे लिखा है कि जब खिलाडिय़ों के पेट में अन्न नहीं होगा और रोजगार की गारंटी नहीं होगी तो कोई खेल को क्यों अपनाएगा। वहीं जकार्ता में आयोजित एशियन गेम्स में और खराब दशा होने की आशंका जताई है। अंत में लिखा है कि मुख्यमंत्री जी आपसे मुझे कुछ नहीं चाहिए, बस प्रदेश को खेल के क्षेत्र में शर्मसार होने से बचा लीजिए। इस पत्र पर तरह-तरह के कमेंट आ रहे, जिसका सांसद द्वारा जवाब भी दिया जा रहा।

 

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