20 June, 2018

नौकरशाही पर फूटेगा हार का ठीकरा

त्रिनाथ के. शर्मा
लखनऊ। प्रथम से लेकर पंचम तल तक तैनात अफसरों की सरकार के एजेंडे के बजाए खुद को सेफ जोन में रखने की कमजोरी योगी सरकार पर भारी पड़ रही है। पहले गोरखपुर-फूलपुर और अब कैराना-नूरपुर की करारी हार से योगी सरकार के अफसरों की कार्यप्रणाली कठघरे में है। सत्तारूढ़ दल को मिली करारी हार के बाद से अब उम्मीद की जा रही है कि पंचमतल से लेकर जिलों तक के अड़ंगेबाज अफसरों पर गाज गिरेगी।
उल्लेखनीय है कि योगी सरकार के सूबे में लगभग 15 माह का कार्यकाल पूरा कर चुकी है। सत्तारूढ़ दल गोरखपुर-फूलपुर, कैराना लोकसभा और नूरपूर विधान सभा की प्रतिष्ठिïत लोकसभा सीट हार गया। सत्तारूढ़ दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोकसभा चुनाव की 71 सीटों को बचाए रखने की है। 15 माह के कार्यकाल में प्रथम से लेकर पंचम तल और जिलों तक तैनात अफसरों की कार्यप्रणाली काफी कमजोर साबित हुई है। मुख्यमंत्री योगी के लाख प्रयासों के बावजूद सरकारी योजनाओं का लाभ जमीन पर नहीं पहुंच पा रहा है। इसका अनुभव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रतापगढ़ के एक गांव में रात्रि विश्राम के समय ग्रामीणों और अफसरों की चौपाल में हुआ था। पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार के पहले दो वर्ष के कार्यकाल में नौकरशाही के लापरवाही की वजह से 2014 में हुए लोकसभा के चुनाव में समाजवादी पार्टी को मात्र पांच सीटें मिली थीं। इस झटके के बाद सपा ने अपने विकास एजेंडे का धार दिया था। साथ ही प्रथम तल से लेकर पंचम तल के अफसरों को हटाया था। अब इसी समस्या योगी सरकार भी जूझ रही है।
प्रथम और पंचम तल के सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एस.पी. गोयल, सचिव मुख्यमंत्री मृत्युंजय नारायण और विशेष सचिव डा. आदर्श कुमार ङ्क्षसह, नीतिश कुमार, अमित सिंह, अविनाश कुमार, सुभ्रांत कुमार शुक्ला की पोस्टिंग हैं। इनमें दो वरिष्ठï अफसरों को छोड़कर अधिकतर अफसरों को प्रशासनिक कार्यों के मामले में अनुभवहीन हैं, निर्णय नहीं ले पाते हैं। अधिकतर वरिष्ठï आईएएस अफसर अपने से जूनियर अफसरों से बात करने में हिचकिचाते और संकोच करते हैं। प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एस.पी. गोयल ईमानदार और विनम्र जरूर हैं, लेकिन प्रभावशाली नहीं हैं। सह्दयता का यह हाल है कि अपने अधीनस्थ अफसरों के कमरे में जाकर गपशप करते हैं। यही वजह है कि योगी सरकार की महत्वपूर्ण जनसुनवाई पोर्टल, भ्रष्टïाचार निवारण पोर्टल और ई ऑफिस योजना का बुरा हाल है। सचिव मुख्यमंत्री मृत्युंजय नारायण बीती कई सरकारों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं, ईमानदार भी हैं। लेकिन हनक और धमक की कमी की वजह से अधीनस्थ अफसर कोई तवज्जो नहीं देते हैं। यही हाल अधिकतर प्रमुख सचिव और सचिव का है। मुख्य सचिव राजीव कुमार ईमानदार हैं, लेकिन अपनी साख और छवि को बचाए रखने के लिए सरकार के एजेंडे पर उतना ही दर्द लेते हैं, जितने में उनकी छवि साफ-सुथरी बनी रहे। शासन के सूत्रों कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रथम से लेकर पंचम तल तक के अफसरों का रिपोर्ट कार्ड हाईकमान के समक्ष रखा है। आने वाले समस्याओं के बारे में अवगत कराया है। अपनी प्रशासनिक अफसरों की टीम के लिए कई नाम भी रखे हैं। संभावना है कि प्रथम से लेकर पंचम तल के अफसरों को हटाया जा सकता है।

दलितों को लुभाने के लिए चंद्र प्रकाश को बना सकते हैं नए मुख्य सचिव

लखनऊ। दलितों का भाजपा के प्रति तेजी से होते मोहभंग को रोकने के लिए योगी सरकार मुख्य सचिव पद पर दलित अफसर को तैनात करके दलित कार्ड खेल सकती है। मुख्य सचिव की कुर्सी को पाने के लिए यूपी के आईएएस अफसर पीएमओ से लेकर आरएसएस के दरवाजे तक पसीना बहाना शुरू कर दिया है।
मालूम हो कि 1981 बैच के ईमानदार छवि के आईएएस अफसर राजीव कुमार अगले माह जून में मुख्य सचिव के पद से रिटायर होने वाले हैं। मुख्य सचिव पद से राजीव कुमार के रिटायरमेंट और सेवा विस्तार की चर्चाओं के बीच इस कुर्सी को पाने के लिए 1982 से लेकर 84 बैच के आईएएस अफसर लगे हुए हैं। 1982 बैच में राजस्व परिषद के अध्यक्ष प्रवीर कुमार, अविनाश कुमार श्रीवास्तव चंद्र प्रकाश, दिनेश सिंह, 1983 बैच में राजीव कपूर, केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात पूर्व मुख्य सचिव राहुल प्रसाद भटनागर, चंचल तिवारी, संजीव सरन, 1984 बैच के अनंत कुमार सिंह, दुर्गा शंकर मिश्र, अनूप चंद्र पाण्डेय, संजय अग्रवाल मैदान में ताल ठोंकना शुरू कर दिया है। इनमें से कुछ एपीसी के पद के जरिए मुख्य सचिव की कुर्सी तक पहुंचना चाहते हैं। सत्ता के गलियारे में मुख्य सचिव पद के लिए केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति में तैनात सबसे ऊपर नाम 1984 बैच के तेजतर्रार आईएएस अनंत कुमार सिंह माना जा रहा था, लेकिन कैराना और नूरपुर की हार से अब स्थितियां तेजी से बदल रही हैं। ईमानदार छवि की बताए जा रहे

दुर्गा शंकर मिश्र का नाम भी चर्चा में है। श्री मिश्र की पैरवी पीएमओ में तैनात यूपी  कॉडर के आईएएस जुटे हुए हैं। यूपी में आईआईडीसी के पद पर तैनात अनूप चंद्र पाण्डेय भी मुख्य सचिव की कुर्सी पाने के लिए खूब पसीना बहा रहे हैं। इंवेस्टर्स समिट के जरिए अपनी कार्यक्षमता का प्रदर्शन कर चुके हैं। अपनी कार्यशैली से हर दल के नेताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले और अपने कारनामों से चर्चित आईएएस संजय अग्रवाल भी मैदान में हैं। केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए इम्पैनल होने के बावजूद कृषि उत्पादन आयुक्त से लेकर मुख्य सचिव की कुर्सी को हासिल करने के लिए चक्कर में दो-दो उप मुख्यमंत्री के विभागों के प्रमुख सचिव हैं। संजय अग्रवाल को यूपी का मुख्य सचिव बनवाने के लिए औद्योगिक कारोबारियों का एक बड़ा गु्रप सक्रिय हो गया है।
उच्चपदस्थ सूत्रों का कहना है कि अनंत कुमार सिंह, दुर्गा शंकर मिश्र, अनूप चंद्र पाण्डेय और संजय अग्रवाल के नामों पर चर्चा है। इसके साथ ही अविनाश कुमार श्रीवास्तव भी यूपी के मुख्य सचिव की रेस में हैं। वर्तमान मुख्य सचिव राजीव कुमार अपना उत्तराधिकारी के तौर पर संजय अग्रवाल को प्राथमिकता दे रहे हैं। जबकि दुर्गा शंकर मिश्र का साफ-सुथरा कैरियर होने के कारण आरएसएस और ब्राह्मïण समाज पैरवी में जुटे हुए हैं। गोरखपुर, फुलपुर, कैराना और नूरपुर की हार ने अब भाजपा के शीर्ष नेतृत्व अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए दलितों को लुभाने के लिए वरिष्ठï आईएएस चंद्र प्रकाश को मुख्य सचिव की कुर्सी पर तैनाती दे सकता है। इसके संकेत में सामने आ रहे हैं। मुख्य सचिव राजीव कुमार के विदेश यात्रा के दौरान छुट्टïी पर होने के कारण वरिष्ठï आईएएस देवेन्द्र चौधरी को कार्यवाहक मुख्य सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई थी।

 

grish1985@gmail.com

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