25 March, 2019

40 लाख तक के कारोबारी GST से बाहर

  • जीएसटी परिषद की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण फैसले
  • रीयल एस्टेट के लिए मंत्री समूह

जीएसटी परिषद ने रीयल एस्टेट को जीएसटी के तहत रियायतें देने तथा राज्यों द्वारा संचालित लाटरी पर जीएसटी के संबंध में परिषद के तहत ही मंत्रियों के दो समूह बनाने का निर्णय लिया है। जेटली ने कहा कि इस दोनों मुद्दों पर राज्यों के बीच बहुत मतभेद हैं। इसलिए दोनों के लिए मंत्रियों के अलग-अलग समूह बनाने का निर्णय लिया गया है। रीयल एस्टेट के लिए सात सदस्यीय मंत्री समूह बनेगा। लाटरी पर भी इसी तरह के मंत्री समूह का गठन किया जाएगा। राज्यों के वित्त मंत्री इन समूहों के सदस्य होंगे जिनके नाम बाद में तय किए जाएंगे। केरल को मिली अधिभार लगाने की छूटजीएसटी परिषद ने बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित केरल को राज्य के भीतर होने वाले कारोबार पर दो वर्ष तक अधिकतम एक फीसद अधिभार लगाने की छूट दे दी है। जेटली ने कहा कि बाढ़ प्रभावित केरल ने इसकी मांग की थी और इस पर गहन विचार-विमर्श के बाद संबंधित राज्य को दो वर्ष के लिए अधिकतम एक फीसद अधिभार लगाने की छूट दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केरल सिर्फ राज्य के भीतर होने वाले कारोबार पर यह अधिभार लगा सकेगा।

  • कंपोजिशन स्कीम की सीमा बढ़ाकर 1.5 करोड़ की गई
  • इस योजना को चुनने वालों को भरना होगा वार्षिक रिटर्नहालांकि हर तिमाही में एक बार करना होगा कर भुगतान

वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) परिषद ने छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत देते हुए बृहस्पतिवार को जीएसटी से छूट की सीमा को बढ़ाकर दोगुना कर दिया। अब सालाना 40 लाख रपए तक कारोबार करने वाले व्यापारी जीएसटी से बाहर हो गए हैं। इसके अलावा कंपोजिशन योजना का लाभ लेने की सीमा को भी बढ़ा दिया गया है।वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि जीएसटी परिषद ने छोटे कारोबारियों को जीएसटी से राहत देते हुए छूट सीमा को 20 लाख से बढ़ाकर 40 लाख रपए वार्षिक कर दिया है जबकि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए इसे बढ़ाकर 20 लाख रपए किया गया है। इसके अलावा जीएसटी कंपोजिशन योजना का लाभ लेने की सीमा भी बढ़ाई गई है। इस योजना के तहत छोटे व्यापारियों और कंपनियों को उत्पादों के मूल्यवर्धन के बजाय अपने कारोबार के हिसाब से मामूली दर पर कर देना होता है। कंपोजिशन योजना के लिए निर्धारित सीमा को एक करोड़ रपए से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रपए कर दिया गया है। कंपोजिशन योजना का विकल्प चुनने वालों को सालाना सिर्फ एक कर रिटर्न दाखिल करना होगा। हालांकि उन्हें हर तिमाही में एक बार कर भुगतान करना होगा।

rgautamlko@gmail.com

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