23 March, 2019

कैडर पुनर्गठन को आया 69 लाख का बजट पानी में!

  • आईआईएम के प्रतिनिधियों व संघ के पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक बेनतीजा
  • अभी तक जीएसटी का अध्ययन ही नहीं शुरू हुआसीएम के आदेश के बाद जांच को बुलाये गए आईआईएम के प्रोफेसर

लखनऊ। प्रदेश के वाणिज्य कर विभाग में जीएसटी एक्ट व कायरे की आवश्यकता के मुताबिक कैडर पुनर्गठन की प्रक्रिया बीरबल की खिचड़ी हो गयी है। दिसम्बर-2018 को 69 लाख रूपये का भारी भरकम बजट आईआईएम को देकर जो प्रक्रिया शुरू की गयी थी, उसकी पोल सोमवार को खुल गयी, क्योंकि अब तक इस बात का अध्ययन नहीं शुरू हो सकता है कि विभाग में तैनात अधिकारियों/ कर्मचारियों का किस तरह से उपयोग किया जाएगा। ऐसे में अगर कहा जाए की कैडर पुनर्गठन के नाम पर आईआईएम को दिया गया बजट पानी में चला गया है तो गलत नहीं होगा, क्योंकि विभाग के अधिकारी/ कर्मचारी किस तरह काम करेंगे इसका निर्धारण प्रबंध संस्था द्वारा किया जाना अंग्रेजी के टीचर से संस्कृत पढ़वाने जैसा होगा। इन हालातों में कैडर्र पुनर्गठन का काम 31 मार्च तक किसी भी हाल में पूरा नहीं होगा।यूपी देश का पहला राज्य है, जहां जुलाई 2017 में जीएसटी तो लागू हो गया है, अधिकारी जीएसटी के कानून के मुताबिक करनिर्धारण का काम भी करने लगे हैं, लेकिन अभी तक यह तय नहीं हो पाया। कि किस कार्य के लिए कितने अधिकारियों/ कर्मचारियों की जरूरत होगी।

विभाग के अधिकारियों को अपनी मांग को सरकार तक पहुचाने के लिए सड़क पर उतरना पड़ा। बाद में विभाग के पूर्व अपर मुख्यसचिव कर एंव निबन्धन के कार्यकाल में यह तय किया गया कि कैडर पुनर्गठन का कार्य प्रबंध संस्था आईआईएम से कराया जाएगा। इसके लिए 69 लाख का बजट आईआईएम को दिया गया, जो कि सरकारी विभाग के इतिहास में अनोखा कदम था, क्योंकि राज्य सरकार ने कार्मिक विभाग के होते हुए किसी वाह्य संस्था को कैडर का कार्य नहीं दिया गया है। आईआईएम के प्रो. हिमांशु राय जिनको की यह प्रोजेक्ट दिया गया था उन्होंने जैसे ही इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया, उसके एक सप्ताह के भीतर ही उनका इंदौर तबादला हो गया है, इससे पहले हिमांशु राय की विभाग के किसी भी संघ के साथ कैडर पुनर्गठन पर कोई बैठक ही नही हुई। उनके जाने के बाद उनके प्रतिनिधि के रूप में नवनीत राय अलग-अलग अधिकारियों व कमिश्नर के साथ मुलाकात करते रहे।

उनकी ये मुलाकातें वाणिज्य कर मुख्यालय या फिर मंडल कार्यालय तक ही सीमित रहीं, उन्होंने प्रदेश के किसी अन्य जिले का भ्रमण किया ही नहीं किया। इसके बाद वाणिज्य कर सेवासंघ के अध्यक्ष राजवर्धन सिंह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुरेश यादव व चालक संघ के महामंत्री प्रेम प्रकाश ने आईआईएम से कैडर पुनर्गठन कराये जाने पर सवाल खड़े कर दिये। तर्क ये था कि सरकारी तंत्र होने के बावजूद किसी ऐसी वाह्य संस्था जिसको जीएसटी एक्ट व विभाग की कार्य पण्राली का कोई अनुभव नहीं है उसे कैडर पुनर्गठन का काम किस उद्देश्य के साथ दिया गया है। सुरेश यादव व चालक संघ के महामंत्री प्रेम प्रकाश ने जनता दर्शन के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन सौप दिया, जिससे मामले की जांच के आदेश होते ही हड़कम्प मच गया। सोमवार को आईआईएम के प्रो. हिमांशु राय इंदौर से कमिश्नर वाणिज्य कर कार्यालय आए, यहां सभी संघों के साथ उनकी सामूहिक बैठक होनी थी, लेकिन एक साथ बैठक न होकर अलग-अलग मुलाकात की गयी, जिसमें सबसे पहले सीधी भर्ती संघ के अध्यक्ष राज वर्धन सिंह मिले, इसके बाद सुरेश यादव व प्रेम प्रकाश मिले। दोनों पक्षों में चली वार्ता में यह बात निकल कर सामने आयी कि अभी तक आईआईएम के प्रतिनिधियों ने कैडर पुनर्गठन कैसे किया जाना है, इस पर अध्यन ही शुरू नही किया है।

rgautamlko@gmail.com

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