18 January, 2018

शेखर पंडित लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है की आरएसएस व इसकी राजनीतिक संगठन भाजपा की दलित एवं अन्य पिछड़े वर्ग विरोधी मानसिकता तथा केन्द्र में इनकी सरकार की कथनी व करनी में व्यापक अन्तर भेद को रेखांकित

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त्रिनाथ के. शर्मा लखनऊ। इंडक्शन टे्रनिंग प्रोग्राम (आईटीपी) न करने वाले सूबे के प्रमोटी आईएएस अफसरों के लिए बुरी खबर है। केन्द्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने पीसीएस से प्रमोट हुए आईएएस अफसरों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अगर

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राकेश के. यादव लखनऊ। आगामी 2017 के विधान सभा चुनावों के लिए सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी ने सबसे पहले प्रत्याशियों की सूची जारी करके विपक्षी पार्टियों को भौंचक्का कर दिया है। मुख्य विपक्षी पार्टी बसपा भले ही अनाधिकृत तौर पर प्रत्याशी घोषित किए हैं, लेकिन भाजपा,

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राजेन्द्र के. गौतम लखनऊ। 'घर का भेदी लंका ढाएÓ वाली कहावत बहुजन समाज पार्टी पर सटीक साबित होती है। पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा और राज्यसभा सांसद रहे जुगुल किशोर के बाद अब बसपाइयों ने यह तमगा बसपा के राष्टï्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी को दिया

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लखनऊ। कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (सीपीए) का कोई अधिकृत कार्यक्रम नहीं है, लेकिन उत्तर प्रदेश के विधायकों का एक दल सीपीए के नाम पर ‘अध्ययन’ करने तीन देशों के दौरे पर जा रहा है जिसमें जापान भी शामिल है जो सीपीए का सदस्य ही नहीं है।

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लखनऊ। प्रांतीय सिविल सेवा यानी पीसीएस एसोसियेशन उत्तर प्रदेश में कोमा में चली गई है, तभी तो दस साल बीत जाने के बावजूद एसोसियेशन की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) नहीं हो पाई है। दस सालों में एसोसियेशन न तो अध्यक्ष चुनने की हिम्मत जुटा पाई

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भ्रष्टाचार से लेकर छेडख़ानी तक में गए जेल प्रभाष श्रीवास्तव लखनऊ। उत्तर प्रदेश की नौकरशाही ने जहां लखनऊ से दिल्ली तक प्रशासनिक पदों से लेकर सवैधानिक पदों पर पहुंचने में कीर्तिमान स्थापित किया है वहीं भ्रष्टïाचार से लेकर छेडख़ानी तक के मामले में जेल जाने में

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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी फिर सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले पर अमल करने जा रही है। 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम गठजोड़ के भरोसे सत्ता को साधा था। 403 सीटों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में अपने अकेले दम पर 201 के

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पहले पत्रकारिता एक सामाजिक मिशन के रूप में जाना जाता था, आज की पत्रकारिता व्यवसाय का रुप ले चुकी है। आज पेड़ न्यूज और विज्ञापन का बोलबाला हैं। अखबारों में खबरों के बजाए विज्ञापन को अधिक महत्व दिया जाता है। इसकी वजह से आज सम्पादक

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