24 February, 2019

शिशु पाल सिंह लखनऊ। पीएचडी की डिग्री लेने के लिए शोद्य छात्रों को क्या-क्या पापड़ बेलने पड़ते हैं, इसका अंदाजा आप लखनऊ विश्वविद्यालय में शोद्य कर रहे दलित छात्र के उत्पीडऩ से लगाया जा सकता है। घर में चाकरी करवाने के लिए दो साल से जहां

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एनडीएस ब्यूरो कानपुर। प्रधनामंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ब्राह्मणों के सबसे बड़े विरोधी हैं। इसीलिए भाजपा में सभी बड़े ब्राह्मण नेताओं को किनारे कर दिया गया है। सपा सरकार में भी ब्राह्मणों का कोई पुरसाहाल नहीं है। केवल बसपा में

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लखनऊ (एनडीएस)। अपने बयानों से चर्चा में रहने वाले मंत्री आजम खां ने बुलंदशहर दुष्कर्म कांड पर उनकी टिप्पणी के खिलाफ दाखिल याचिका पर पैरवी के लिए सरकारी वकील को वापस कर दिया है। वकील देने के आदेश में 'प्रभावी पैरवीÓ शब्द पर एतराज करते

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मेरी दृष्टिï से मोदी सरकार की नई डीएवीपी नीति ठीक नहीं है। इस नीति से बड़े घरानों के समाचार पत्रों का वर्चस्व मजबूत होगा,जो छोटे-मझौले समाचार पत्रों के लिए घातक सिद्घ होगा। सरकार बड़े समाचार पत्रों को मैनेज कर लेती है,लेकिन छोटे-मझौले अखबारों का समूह

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नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र शुक्रवार को समाप्त हो गया। यह सत्र न सिर्फ  कामकाज के मामले में बेहतर रहा बल्कि कई अन्य मामलों में ऐतिहासिक साबित हुआ। सत्र के दौरान संसद की 20 बैठकों में जहां दशक भर से प्रतीक्षित वस्तु एवं सेवा

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लखनऊ। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने अवैध खनन की जांच शुरू कर दी है, जांच अधिकारियों ने शुक्रवार को कौशांबी जिले के खनन घाटों का निरीक्षण किया और अधिकारियों से वर्ष 2012 के पहले और बाद के पट्टों का ब्योरा तलब किया है। स्वतंत्रता

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शेखर पंडित  लखनऊ। सियायत के लिहाज से उत्तर प्रदेश की जमीं कुछ ज्यादा ही जरखेज है। इसीलिए न सिर्फ दूसरे राज्यों के नेता यहां चुनाव लडऩे आते है बल्कि दूसरे राज्यों के राजनीतिक दल भी यहां अपनी जमीन तलाशने और जड़े जमाने की गरज से

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लखनऊ। मुस्लिम वोटों को लेकर इस समय सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी में खासी बैचेनी है। उसकी बैचेनी बेसबब नहीं है। कांग्रेस और बसपा इस बार के विधानसभा चुनाव में सपा का मिथक तोडऩे की तैयारी में है कि मुस्लिम वोटों पर उसकी का एकाधिकार नहीं है।

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बदलाव के दौर में हिन्दी पत्रकारिता की भाषा गुम हो गई और पत्रकारिता पर टेक्नालॉजी हॉवी हो गई है। अर्थात पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांतों और मूल्यों को त्याग कर हम तकनीकी पत्रकारिता के दौर में पहुंच गये हैं। तकनीकी ने पत्रकारिता के स्वरूप को बहुयामी

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