25 June, 2018

लखनऊ। राज्य सूचना आयोग में गुरुवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय के जनसूचना अधिकारी (पीआइओ) को हाजिर होना था। सुनवाई का नंबर आया तो पता चला कि पीआइओ ने खुद आने के बजाय अपने दफ्तर के एक बाबू को

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सुरेश गांधी जी हां, चार साल के सपा सरकार में जगह-जगह हुए 210 से अधिक दंगे, सरेराह व्यापारियों सहित बैंकों की लूट, रंगदारी ने देने पर खुलेआम हत्या, डकैती, सरेराह किशोरियों व महिलाओं का बलातकार, बलातकार के बाद हत्या, पूंजीपति बलातकारियों से लाखो-करोड़ों लेकर उन्हें बचाना,

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मीडिया में बढ़ रही है अनट्रेड पत्रकारों की भीड़ प्रश्न:-आपका बाल्यकाल जीवन कैसा था? उत्तर:- मेरा जन्म मेरठ  जिले के हस्तिनापुर में हुआ था। पिता स्व. मंगल सिंह किसान थे, ग्रामीण पृष्ठïभूमि होने के बावजूद शिक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। मैंने भारती जनसंचार संस्थान, नयी

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औद्योगिक विकास विभाग के पूर्व प्रमुख सचिव संजीव सरन का कारनामा त्रिनाथ के. शर्मा लखनऊ। 'जब रोम जल रहा था, तब नीरो बंसी बजा रहा थाÓ यह कहावत औद्योगिक विकास विभाग पर चरितार्थ होती है। भले ही सरकार की मंशा के अनुरूप प्रदेश में निवेश न हो

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एनडीएस ब्यूरो लखनऊ/गोंडा। बड़ी-बड़ी चीनी मिलें गन्ना किसानों का अरबों रुपए दबाए बैठी हैं। किसानों का बकाए रुपए की वसूली के लिए सरकार ने चीनी मिलों पर दबाव बढ़ा दिया है। इसके तहत जहां 15 चीनी मिलों को भुगतान किए जाने का नोटिस भेजा है वहीं

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प्रभाष श्रीवास्तव लखनऊ। राहुल गांधी की नसीहत और पीके यानी प्रशांत किशोर के आने की दस्तक भी कांग्रेसियों में कोई जोश नहीं भरपाई है। चुनावी तैयारियों को देखते हुए कांग्रेसियों को यह मानने में इंकार नहीं कि यूपी में एक बार महा मुकाबला सपा-बसपा के बीच

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विजय माल्या टाइप उद्योगपतियों के कारनामों से कराह रही है यूपी राजेन्द्र के. गौतम लखनऊ। विलफुल डिफाल्टर राज्यसभा सांसद और उद्योगपति विजय माल्या देश के 17 बैंकों का लगभग 9000 करोड़ रुपए लेकर चंपत हो गया। यही हाल उत्तर प्रदेश में भी है। दि प्रदेशीय इंडस्ट्रियल एंड

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कांग्रेस के सामने प्रत्याशियों का संकट प्रभाष श्रीवास्तव लखनऊ। राहुल गांधी की नसीहत और पीके यानी प्रशांत किशोर के आने दस्तक भी कांग्रेसियों में कोई जोश नहीं भरपाई है। चुनावी तैयारियों को देखते हुए कांग्रेसियों को यह मानने में इंकार नहीं कि यूपी में एक बार

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योगेश श्रीवास्तव लखनऊ। यूपी की सरजमीं बाहुबलियों के लिए शुरू से उर्वरक रही है। पहले चुनाव लड़ाते थे अब खुद लड़ते है और मरने के बाद अब उनके मंदिर बनने लगे है। हालांकि डकैतों को महिमामंडित करने में कोई दल कभी पीछे नहीं रहा। 1991

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प्रमोद रंजन यह जानना जरूरी है कि 1966 में भारत सरकार के एक विशेष एक्ट के तहत बना यह उच्च अध्ययन संस्थान वामपंथ का गढ़ क्यों बन सका। इसका उत्तर इसकी विशेष आरक्षण प्रणाली में है। इस विश्वविद्यालय में आरंभ से ही पिछड़े जिलों से आने

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