20 April, 2018

इसे महज एक दुर्योग मात्र नहीं समझा जाना चाहिए कि जिस इलाके की जमीन प्राकृतिक संसाधनों और बहुमूल्य खनिजों से लबालब भरी हो, उस इलाके की नाबालिग और मासूम लड़कियां महज तीन हजार रुपए महीने पर हैदराबाद, केरल, दिल्ली, एनसीआर और मुंबई जैसे शहरों के

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बेशक, विप़क्ष के तमाम हंगामे व उठापटक के बाद भी जनता में मोदी की लहर अब भी बरकरार है। एबीपी न्यूज-नीलसन के सर्वे के मुताबिक देश का मूड अब भी नरेंद्र मोदी और एनडीए गठबंधन सरकार के साथ दिख रहा है। खास बात यह है

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वस्त सेनापति अमित शाह को तीन वर्ष की अवधि के लिए फिर से भाजपा का अध्यक्ष चुन लिया गया है। 24 जनवरी को इस पद के लिए उनका चुनाव निर्विरोध संपन्न हुआ। भाजपा नेता अविनाश राय खन्ना ने जब इसकी घोषणा

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त्रिनाथ के. शर्मा लखनऊ। बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को मिली भरपूर सफलता और यूपी में आसन्न विधानसभा चुनाव में बिहार के नेताओं की बढ़ती सक्रियता से सपा नेतृत्व काफी हलकान है। अव्वल तो उसे पहले ही यहां बसपा और भाजपा से कड़ी चुनौती मिलने वाली

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चैनलों ने स्टिंग ऑपरेशन और खोजी पत्रकारिता के नाम पर चलाए जा रहे तरीकों से मीडिया की विश्वसनीयता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। खबर बनाने के लिए मर्यादा को पूरी तरह ताक पर रखा जा रहा है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा प्रिण्ट मीडिया

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दर्द अपनाता है पराए कौन कौन सुनता है और सुनाए कौन कौन दोहराए वो पुरानी बात गम अभी सोया है जगाए कौन वो जो अपने हैं क्या वो अपने हैं कौन दुख झेले आजमाए कौन अब सुकूँ है तो भूलने में है लेकिन उस शख्स को भुलाए कौन आज फिर दिल है कुछ

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प्रभाष श्रीवास्तव लखनऊ। कभी अपने का मुलायम का हनुमान बताने वाले अमर सिंह की बढ़ती सक्रियता ने जहां सपा कुनबे के कई लोगों के मुंह का जायका खराब कर रखा है तो कुछ लोगों को उम्मीद जागी है अब तो पार्टी को जहां से भी

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द महान अमेरिकी समाजविद, दु बोया (सन्दर्भ: 'द सोल ऑफ  ब्लैक फोक्सÓ) छ साल पहले बद्री नारायण द्वारा लिखी एक किताब आयी थी 'फेसिनेटिंग हिंदुत्व: सेफ्रन पॉलिटिक्स एण्ड दलित मोबिलायजेशनÓ (सेज 2009)। किताब का फोकस था दलित पहचान के गतिविज्ञान को उकेरना तथा जिसमें 'हिंदुत्ववादीÓ शक्तियों द्वारा

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हम दलित साहित्यकारों को पुरस्कार मिलता ही नहीं है, वर्ना वापस करके हम भी विरोध जताते और चर्चित होते। उच्च जाति या सत्ता में पहुंच की वजह से सम्मान और अकादमियों में पद पाते हैं।  विश्वविद्यालयों में दलित साहित्यकारों को मानद उपाधि लायक नहीं समझा

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प्रभाष श्रीवास्तव लखनऊ। खाकी से खादी ओढऩे वाले आईपीएस अफसरों के नाम में पूर्व डीजीपी ए. के. जैन का नाम भी शुमार हो जाएगा। खाकी उतारने के बाद डीजीपी से लेकर कांस्टेबिल तक खादी पहनकर जनसेवा करने का उतावलापन देखते बन रहे है। दिल्ली में देश

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