11 December, 2018

प्रमोद रंजन यह जानना जरूरी है कि 1966 में भारत सरकार के एक विशेष एक्ट के तहत बना यह उच्च अध्ययन संस्थान वामपंथ का गढ़ क्यों बन सका। इसका उत्तर इसकी विशेष आरक्षण प्रणाली में है। इस विश्वविद्यालय में आरंभ से ही पिछड़े जिलों से आने

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राजेन्द्र के. गौतम लखनऊ। 'मन, मैला, तन ऊजरा, भाषण लच्छेदार, ऊपर सत्याचार है, भीतर भ्रष्टाचार। झूठों के घर पंडित बाँचें, कथा सत्य भगवान की, जय बोलो बेईमान कीÓ मशहूर कवित काका हाथरसी की यह कविता दि प्रदेशीय इंडस्ट्रियल एंड इन्वेस्टमेंट कारपोरेशन ऑफ यूपी लिमिटेड (पिकप)

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योगेश श्रीवास्तव लखनऊ। सियासत के लिहाज से यूपी की सरजमीं शुरू से काफी उर्वरक रही। दूसरे प्रदेश के आए नेताओं को भी यहां की जनता ने सिर आंखों पर बिठाया। राजनीति के अलावा बॉलीवुड में सक्रिय महिला नेत्रियों को भी यहां की सरजमीं काफी मुफीद

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त्रिनाथ के. शर्मा लखनऊ। 'माल ए मुफ्त दिल ए बेरहमÓ इसका नजारा देखना है तो आप उद्योग बंधु की ओर नजर डाल सकते हैं। उद्योग बंधु को मिल रहे सरकारी धन की न कोई हिसाब-किताब और न ही कोई सरकारी एजेंसी ऑडिट कर रही है।

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योगेश श्रीवास्तव लखनऊ। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए लेडी पावर रेडी है। यूपी की महिलाओं को रिझाने के लिए हर दल के पास एक न एक ऐसा चेहरा है जो न सिर्फ भीड़ जुटाऊ है बल्कि कुछ तक पार्टी के बेहतर प्रदर्शन मेंं भी निर्णायक

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प्रभाष श्रीवास्तव लखनऊ। आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर जहां सपा-बसपा और कांग्रेस भाजपा में चुनावी तैयारियां हो रही है। हर बार की तरह कई छुटभैय्ये दल भी चुनावी तैयारियों में पीछे नहीं है। इन दलों की दिलचस्पी चुनाव लडऩे से ज्यादा बड़े दलों से गठबंधन

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पाठकों से डिलीवरी चार्ज दिए जाने की गुहार एनडीएस संवाददाता लखनऊ। समाचार पत्र विक्रता एवं जन कल्याण समिति द्वारा संचालित लखनऊ समाचार पत्र वितरक विकास मंच की ओर से महानगर गोल मार्केट में शुक्रवार को एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए अध्यक्ष

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वक्त ने पत्रकारिता में काफी बदलाव किए हैं। तकनीक पत्रकारिता को जनता के और करीब ला दिया है। पहले प्रिंट और दूरदर्शन ही मीडिया था, अब अखबारों के साथ ही इलेक्ट्रिानिक चैनलों की भरमार हो गई है। इसके साथ ही सोशल मीडिया के मैदान में

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मुख्यमंत्री के महत्वकांक्षी लक्ष्य पर मंडराए संकट के बादल राजेन्द्र के. गौतम लखनऊ।  नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाने वाले आईएएस राजीव कुमार भले ही जेल जाने के कगार पर खड़े हो, लेकिन आईएएस अफसर अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। उद्योग बंधु और नवगठित एनआरआई विभाग

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त्रिनाथ के. शर्मा लखनऊ। पर्यावरण की हितों की रक्षा के लिए बनी उत्तर प्रदेश राज्य पर्यावरण प्रभाव प्राक्कलन समिति (एसईएसी) की कार्यप्रणाली कठघरे में है। समिति के अध्यक्ष की मनमानी और हिटलरशाही को लेकर केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय में शिकायत हुई है। शिकायत के बाद जहां समिति

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