20 November, 2017

चार्जशीट खोल रही है ‘मायावती की हर पोल’

राजेन्द्र के. गौतम

लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने गलत तरीकों से साहब कांशीराम जी पर अनैतिक दबाव बनाकर ब्लैकमेलिंग के सहारे धीरे-धीरे पार्टी पर कब्जा किया। मान्यवर कांशीराम की बीमारी के चलते कैद कर लिया था। 8 अक्टूबर 2006 को रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई। पूर्व राज्य सभा सांसद प्रमोद कुरील ने मायावती की बहुजन मूवमेंट विरोधी काली करतूतों पर एक चार्जशीट जारी कर आरोप लगाए हैं। 64 पेज की चार्जशीट में बसपा सुप्रीमो मायावती के कई राज खोले हैं।

पूर्व सांसद प्रमोद कुरील ने चार्जशीट के भाग एक और दो में बसपा सुप्रीमो मायावती की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करते हुए लिखित आरोप लगाया है कि मायावती ने बहुजन मूवमेंट को ब्राह्मïणवाद से मिलकर खत्म किया है। सबसे पहले भगवान गौतम बुद्घ, महात्मा फुले, शाहूजी महाराज, नारायणा गुरू, पेरियार, बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर और मान्यवर कांशीराम का सिद्घांत बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय को मायावती ने अपने स्वार्थ के लिए पूरी तरह से बदल दिया। मान्यवर कांशीराम के अथक प्रयासों से यूपी में 2007 में बसपा पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। लेकिन जिस तरह से कांशीराम जी की टीम के मिशनरी कार्यकर्ताओं और नेताओं को पार्टी से बेइज्जत करके निकाला, उसका हश्र यह हुआ है कि बसपा राष्टï्रीय स्तर पार्टी का तमगा छिनने के कगार पर पहुंच गई। साथ ही जनाधार भी छिन गया। फर्जी वसीयत के जरिए खुद को पार्टी का एकमात्र उत्तराधिकारी घोषित करने का षडयंत्र किया।  बसपा सुप्रीामे मायावती स्पष्टï करें कि 10 अगस्त 2003 और 7 फरवरी 2005 में से कौन सी वसीयत असली है।  इसके लिए पार्टी में अपने चमचों की फौज का सहारा लिया। बहुजन समाज के महापुरूष ईवी रामास्वामी पेरियार द्वारा लिखी गई सच्ची रामायाण को 2007 में मायावती ने बैन कर दिया था। साथ ही लखनऊ से प्रकाशित पत्रिका अम्बेडकर टुडे को भी बैन किया गया था। विलासिता पूर्ण जीवन जीने वाले मायावती ने महापुरूषों के साथ अपनी प्रतिमा स्थापित करके अपनी छोटी सोच को जाहिर किया है।

बसपा सुप्रीमो मायावती को अपने नाम के आगे एडवोकेट लिखने की अजीब बीमारी है। लेकिन आज तक कोई यह नहीं जान पाया है कि मायावती ने कब, कहां और किस संस्थान से एलएलबी की है। मायावती अपने संघर्षमय जीवन पर एक किताब बहुजन मूवमेंट अर्थात ब्लू बुक को खुद के द्वारा लिखने का दावा करती हैं, जबकि यह किताब ठेके पर लिखाई जाती है। यह कृत्य इसलिए किया गया है कि यूपी में मान्यवर कांशीराम के योगदान को नगन्य करके अपना इतिहास साबित किया जा सके। बसपा पार्टी के गठन के समय मायावती गुमनाम थी। वर्ष 1997 में मान्यवर कांशीराम ने स्वतंत्र भारत में बहुजन समाज आश्रित क्यों नामक पुस्तक लिखी थी। इस पुस्तक का मैटर चोरी करके अपने नाम से अपने संघर्षमय जीवन पुस्तक में प्रकाशित करवा दिया। खुद को महिमामंडित करने के लिए बहुजन नायकों का इतिहास बदल रही हैं। 2007 में यूपी में बनी बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार में दलितों का उत्थान करने के बजाए हर स्तर पर कानूनी रूप से चोट पहुंचाई। पदोन्नति में आरक्षण की वजह से दलित समाज आज भी सजा भुगत रहा है। पूर्व सांसद प्रमोद कुरील ने कहा कि उनकी मंशा बसपा सुप्रीमो मायावती की छवि को धूमिल करने की नहीं, बल्कि दलित समाज को मायावती की बहुजन मूवमेंट विरोधी सच्चाई से परिचित करवाने की है। जिससे दलित समाज बार-बार ठगा न जा सके।

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