19 November, 2018

संगीन धाराओं में दर्ज मुलजिम फिर बनेगा सीसीएसयू का कुलपति!

Chaudhary Charan Singh University, Vice Chancellor Narendra kumar Taneja, corruption

लखनऊ। अगर आप राजनीतिक मैनेंजमेंट के माहिर तिकड़मबाज हैं और आप कितने ही आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे हैं, मुकदमें दर्ज हैं, तो भी यूपी में सभी गुनाह माफ माने जाएंगे। इस तरह का उदाहरण आप चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के कुलपति के काले कारनामों की लम्बी फेहरिस्त से देख सकते हैं। जब गुरू ही गुरू घंटाल बन जाए तो आप उम्मीद कर सकते हैं कि हमारे नौनिहाल किस तरह का पाठ पढ़ रहे हैं। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के कुलपति के अनियमित कारनामों से जहां शिक्षा का मंदिर बदनाम हुआ है वहीं अपने पैसे और पहुंच के बल पर फिर से दोबारा कुलपति का चार्ज पाने के लिए राजनीतिक आकाओं की चरण वंदना शुरू कर दी है।

उल्लेखनीय है कि नरेन्द्र कुमार तनेजा अपने राजनीतिक जोड़-तोड़ के बल पर अगस्त 2015 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति बने थे। 3 नवम्बर को यह कार्यकाल पूरा हो रहा है। अपने इस कार्यकाल में अनगिनत ऐसे काले कारनामें अंजाम दिए, जिससे यह विश्वविद्यालय काफी सुर्खियों में रहा। यूजीसी के नियमों को ताक पर रखकर 40 से अधिक अयोग्य अस्सिटेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति की है। आरोप यह भी है कि एमबीबीएस के पेपर लीक और कॉपियां बदलवाने में भी कुलपति की अहम भूमिका रही है।

विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर एस.के. काक और वर्तमान कुलपति प्रोफेसर नरेन्द्र कुमार तनेजा समेत 13 अफसरों-कर्मचारियों और कॉलेज संचालक को विजिलेंस ने भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामले में दोषी करार दिया था। लेकिन की राजनीतिक पकड़ के कारण यह प्रकरण ठंडे बस्ते में डलवा कर दुबारा कुलपति का कार्यकाल बढ़वाने के लिए कुलपति प्रोफेसर नरेन्द्र कुमार तनेजा भगीरथी प्रयास कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान सेक्टर मेरठ की तरफ से 6 दिसंबर 2017 को मेडिकल थाने में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप थे कि कुलपति प्रोफेसर एस.के. काक ने पद पर रहते हुए आपसी हित लाभ देखकर कर्मचारियों की नियुक्तियां कीं। विजिलेंस ने खुली जांच में माना कि कुललपति विवि के प्रिंसीपल एक्जीक्यूटिव एवं एकेडमिक अधिकारी हैं। कॉलेजों की संबद्घता प्रदान करने के लिए यूजीसी के जो विधिक प्रावधान हैं, उनका पालन प्रोफेसर काक ने नहीं किया था। रुद्राक्ष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के मामले में पाया गया कि सत्र 2009-10 के लिए 100 सीटों की संबद्धता किए जाने के संबंध में कुलपति प्रोफेसर एस.के. काक ने निरीक्षण मंडल गठित किया। उक्त संस्थान के निरीक्षण के दौरान कमेटी को मौके पर संस्थान का कोई भवन नहीं मिल। जबकि इस मामले में तत्कालीन कुल सचिव वी.के.सिन्हा ने उच्च शिक्षा अनुभाग को बताया था कि तीन सदस्यीय समिति द्वारा निरीक्षण की आख्या मिलने के बाद संस्तुति दी गई।

प्रोफेसर नरेन्द्र कुमार तनेजा तत्कालीन संयोजक निरीक्षण मंडल ने लिखित रूप से 4 मार्च 2009 को बताया कि वे उक्त कॉलेज में निरीक्षण के लिए अकेले गए थे। उक्त संस्थान के निरीक्षण के संबंध में डॉ. शिखा चतुर्वेदी ने निरीक्षण करने के संबंध में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया। इससे स्पष्ट है कि प्रोफेसर एस.के. काक ने स्वावित्त पोषित संस्थानों को संबद्धता दिए जाने में नियमों का उल्लंघन किया। विजिलेंस सूत्रों के मुताबिक शासन से अनुमोदन के बाद गिरफ्तारी कर आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा। तत्कालीन वीसी प्रोफेसर एस.के. काक, तत्कालीन कुलसचिव वी.के. सिन्हा, तत्कालीन कुलसचिव प्रभात रंजन, तत्कालीन उप कुलसचिव प्रशासन नारायण प्रसाद, तत्कालीन कुलसचिव प्रशासन रामकुमार, तत्कालीन सहायक लेखा अधीक्षक हरवंश लाल, तत्कालीन वरिष्ठ सहायक अरविंद कुमार, प्रभारी सामान्य एसएस शर्मा, पीए शिव कुमार गुप्ता, वित्त नियंत्रक अतुल कुमार, तत्कालीन प्रवक्ता अर्थशास्त्र प्रोफेसर एन.के. तनेजा वर्तमान में कुलपति, प्रवक्ता डॉ.शिखा चतुर्वेदी, रुद्राक्ष इंस्टीट्यूट के सचिव अमित गिरि शामिल थे। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के कुलपति के नरेन्द्र कुमार तनेजा से कई सम्पर्क किए जाने पर प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।

rgautamlko@gmail.com

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