20 November, 2018

योगी फिर तोड़ेंगे अंधविश्वास की दीवारें!

Chief Minister of Uttar Pradesh Yogi Adityanath, superstition, Lok Bhawabn
त्रिनाथ के. शर्मा
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ फिर अंधविश्वास की दीवारें तोडऩे की तैयारी में हैं। लोकभवन को अभिशप्त मानकर दूरी बनाए रखने वाली नौकरशाही को अब मुख्यमंत्री के तगड़े डोज के बाद मुख्य सचिव समेत अधिकतर महत्वपूर्ण अफसरों के कार्यालय लोकभवन में जल्द शिफ्ट होंगे। सचिवालय प्रशासन विभाग ने मुख्यमंत्री समेत तमाम अफसरों के कार्यालयों का कक्ष आवंटित कर दिया है।
मालूम हो कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बड़े जोर-शोर के साथ 3 अक्टूबर 2016 को 6े02 करोड़ की लागत से बनकर तैयार आलीशान लोकभवन का उद्घाटन किया था। इस मौके पर दावा किया था कि अगला छठ बजट मुख्यमंत्री के तौर पेश करेंगे। लेकिन 2017 में हुए विधान सभा के चुनाव में समाजवादी पार्टी की बुरी तरह से हार हुई और 19 मार्च 2018 को यूपी की बागडोर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों में आ गई। तब से इस भवन में मुख्यमंत्री समेत तमाम महत्वपूर्ण अफसरों के शिफ्ट होने की यदा-कदा खबरें आती थी, लेकिन 19 माह बीत जाने के बावजूद शिफ्ट नहीं हुए। वजह बताई गई कि अभी लोकभवन पूरी तरह से तैयार नहीं है।  जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी कैबिनेट बैठकें लोकभवन में ही कर रहे हैं। योगी सरकार बनने के कुछ माह के भीतर ही लोकभवन पूरी तरह से बनकर तैयार हो गया था। किसी ने यह अफवाह फैला दी कि लोकभवन अभिशप्त है। अफसर इस डर से बाहर नहीं आ पाए। जब यह बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पता चली तो अफसरों को अफवाह से बाज आने का तगड़ा डोज दिया। साथ ही सचिवालय प्रशासन विभाग को निर्देश दिया कि जल्द ही मुख्यमंत्री कार्यालय समेत तमाम महत्वपूर्ण अफसरों को शिफ्ट किया जाए। सनद हो कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा जाने का वह अंधविश्वास तोड़ा है, जहां कहा जाता है कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा गया, दुबारा मुख्यमंत्री नहीं बन पाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई बार नोएडा जाकर यह अंधविश्वास तोड़ चुके हैं।
मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश के बाद सचिवालय प्रशासन विभाग हरकत में आया। 19 सितम्बर 2018 को एक कार्यालय आदेश का कक्ष आवंटित कर दिए। अब लाल बहादुर शास्त्री भवन से लोकभवन के प्रथम तल पर मुख्य सचिव अनूप चंद्र पाण्डेय और प्रमुख सचिव नियुक्ति विभाग मुकुल सिंघल समेत उनका स्टाफ को कक्ष आवंटित किए गए हैं। दूसरे तल पर सचिव मुख्यमंत्री और पंचम तल पर मुख्यमंत्री समेत प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री और विशेष सचिवों के कक्षों का आवंटन किया गया है। शासन के सूत्रों का कहना है कि सचिवालय प्रशासन विभाग ने अफसरों के कक्ष आवंटित जरूर कर दिए गए हैं, लेकिन पितृ पक्ष होने के कारण अभी कोई भी अफसर अपने आवंटित कक्ष में जाने की तैयारी में नहीं है। नवरात्रि के दौरान पूजा-पाठ के बाद मुख्य सचिव समेत तमाम अफसर अपने कक्ष में शिफ्ट होंगे।
कार्यदायी निर्माण एजेंसी यूपीआरएनएन से जुड़े कई अफसरों का कहना है कि जब से लोकभवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब से कोई न कोई दिक्कत हमेशा आती रही। जनवरी माह में लोकभवन में एक बच्ची की मौत हो गई थी। 80 वर्षीय हुसैनगंज निवासी अबरार अहमद का कहना है कि बचपन में देखा था इस जगह पर कर्बे होती थी। लोकभवन के पीछे एक पुरानी मस्जिद भी है।  दारूलशफ और विधान सभा बनने के बाद इस स्थान में काफी बदलाव आया। लेकिन यह जगह छोड़ दी गई थी। काफी समय तक इस स्थान पर धरना स्थल रहा। चार साल पहले इस भूमि पर लोकभवन का निर्माण होना शुरू हुआ।

 

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