23 March, 2019

अपने आदेश को अमल कराने में छह माह लग गए सीएम को !

  • मशहूर महिला आईएएस रेणुका कुमार फिर सुर्खियों में 

राजेन्द्र के. गौतम

लखनऊ।  नेताओं और मंत्रियों से पंगा लेने के लिए मशहूर महिला आईएएस रेणुका कुमार फिर सुर्खियों में हैं। दागी अपर निदेशक चकबंदी को सेवा से बर्खास्त करने के मुख्यमंत्री के स्पष्टï आदेश को बीते छह माह से दबाए रखा था। मुख्यमंत्री कार्यालय के सख्त रुख के बाद अब प्रमुख सचिव राजस्व ने अपनी निरंकुशता और लापरवाही को छिपाने के लिए दागी के खिलाफ निलम्बन की कार्यवाही करने के साथ अब जांच कृषि उत्पादन आयुक्त को सौंपी है।

बताते चलें कि पंचमतल से लेकर जिलों तक ईमानदारी और निष्पक्षता का दावा ठोंकने वाले अफसर सख्त व ईमानदार मुख्यमंत्री के आदेशों को लागू करा पाने में फेल हैं। इससे साबित होता है कि आला अफसर किस तरह से भ्रष्टïाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को कुंद करने में लगे हुए हैं। राजस्व विभाग के अधीन अपर निदेशक चकबंदी के अनियमितताओं के कारनामों पर हुई दो जांचों में दोषी साबित होने के बावजूद प्रमुख सचिव राजस्व के संरक्षण के कारण मुख्यमंत्री का इस अफसर को सेवा से बर्खास्त करने के आदेश को दबा रखा गया था।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 1996-97 में गौतमबुद्घ नगर और गाजियाबाद में तैनाती के दौरान बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के पद पर तैनात रहे अपर निदेशक चकबंदी सुरेश यादव ने कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों को नाजायज फायदा पहुंचाने के लिए गांव सभा की जमीनों को उनके चकों में शामिल करके

करोड़ों रुपए की शासकीय क्षति पहुंचाई थी। इस मामले की शिकायत पर सरकार ने जांच करवाई थी। पहली जांच मुख्यमंत्री के विशेष सचिव शुभ्रांत शुक्ला ने जून 2018 में की थी। दूसरी जांच एडीएम वित्त ने की थी। दोनों जांचों में दोषी पाए गए। सितम्बर 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने विभागीय मंत्री के तौर पर अधीन अपर निदेशक चकबंदी सुरेश यादव को सेवा से बर्खास्त करने के आदेश दिए थे। तब से बर्खास्तगी का यह आदेश इधर-उधर फाइलों भटक रहा था।

राजस्व विभाग के सूत्रों का कहना है कि अपर निदेशक चकबंदी सुरेश यादव ने अनगिनत अनियमितताएं की हैं। अत्याधिक अवैध धन कमा लेने के बाद इस अफसर की पैरवी में कई मंत्री, विधायक और शासन के आला अफसर लगे हुए हैं। सरकार ने अपर निदेशक चकबंदी सुरेश यादव को बर्खास्त करने के लिए लोकसेवा आयोग से सहमति मंागी थी। इस बीच लोकसेवा आयोग में सांठ-गांठ करके सुरेश यादव ने कुछ आपत्तियां लगवाई। लोकसेवा आयोग ने सरकार से कुछ बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी थी। लेकिन शासन ने अभी तक सूचनाएं नहीं भेजी हैं।

पुन: हुई शिकायत के बाद मुख्यमंत्री ने संबंधित अफसरों को जमकर फटकार लगाई। इसके बाद पंचमतल हरकत में आया। प्रमुख सचिव राजस्व रेणुका कुमार को सख्त कार्रवाई करने के लिए निर्देश दिए। इस मामले में अपनी गर्दन बचाने के लिए प्रमुख सचिव रेणुका कुमार ने जहां दागी अफसर को निलम्बन की कार्यवाही की वहीं अपने को साफ-सुथरा रखने और मुद्दे को डायवर्ट के लिए चकबंदी आयुक्त के खिलाफ जांच के आदेश दे दिया हैं। अब इस मामले की जांच ईमानदार छवि के अफसर और कृषि उत्पादन आयुक्त डा. प्रभात कुमार को सौंपे जाने की चर्चा है।

इस प्रकरण पर अपर निदेशक चकबंदी सुरेश यादव ने कहा कि उन्होंने कोई भी अनियिमतता नहीं की है। विरोधियों ने फर्जी शिकायत करके टारगेट किया है। जांच में भी फंसवा दिया है। सम्पर्क किए जाने पर प्रमुख सचिव राजस्व रेणुका कुमार से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई। जबकि कृषि उत्पादन आयुक्त डा. प्रभात कुमार से इस प्रकरण पर सम्पर्क किए जाने पर कहा कि उन्हें अभी पता नहीं है कि यह जांच उन्हें मिली है।

कई मंत्रियों के खिलाफ पत्र लिखने का रिकार्ड!

अखिलेश यादव सरकार में महिला कल्याण मंत्री शादाब फातिमा की कार्यप्रणाली को लेकर रेणुका कुमार ने पूर्व मुख्यसचिव आलोक रंजन को चार पेज की चिट्टïी लिखी थी। उस समय यह मामला काफी चर्चा का विषय बना था। योगी सरकार में प्रमुख सचिव वन के पद पर रहते हुए रेणुका कुमार ने बगैर कोई जांच के वन क्षेत्रों में ईको रेस्टोरेशन की आड़ में नियम विरूद्घ खनन को बढ़ावा देने के आरोप लगाते हुए वन निगम के तीन अफसरों के लिए एफआईआर दर्ज करवाई थी। इस मामले में भी वन मंत्री दारा सिंह चौहान के खिलाफ आठ पेज का पत्र लिखा था। जिसको लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय काफी नाराज था। सरकार की नाराजगी के कारण रेणुका कुमार से वन विभाग हटाकर राजस्व विभाग भेज दिया गया था। इससे नाराज रेणुका कुमार कुछ दिनों के बाद छुट्टïी पर चली गई थी।

 

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