25 March, 2019

चुनावी मौसम में शुरू हुआ अन्नदाता का हितैषी बनने का ड्रामा

त्रिनाथ के. शर्मा

लखनऊ। चर्चित फिल्म सड़क के मशहूर गाना तुझे अपना बनाने की कसम खाई है की तर्ज पर सभी सियासी दल किसानों को अपना बनाने की कसम खा चुके हैं। इसीलिए हर दल इस बड़े वर्ग को अपने पक्ष में लाने के लिए किसानों की चौखट पर दस्तक देने की तैयारी कर रहे हैं। इस तरह हर कोई किसानों की समस्याओं से रुबरु होना चाह रहा है लेकिन अन्नदाता खामोशी से सियासी हवा का रुख भांपने की कोशिश में है।

हाल में हुए पांच राज्यों के विधानसभा में यह साफ  हो गया कि किसान मौजूदा व्यवस्था से खुश नहीं हैं। इसका लाभ उठाने के लिए कांग्रेस ने कर्ज माफी का ऐलान कर दिया। इसे अमल में भी लाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन इससे पडऩे वाले सरकारी बोझ एवं बैंकों की हालत पर कोई गौर नहीं कर रहा है। वहीं किसान भी इस चुनावी मौसम में मुफ्त की और सुविधा मिलने की टकटकी लगाये शांत बैठे हैं। इसे लेकर सभी दलों का मुख्य फोकस अब किसान ही हो गये हैं और उन्हें अपनाने की होड़ सी लगी है।

आगामी लोकसभा चुनाव में किसानों को साथ हासिल करने के लिए भाजपा कृषि कुंभ करने जा रही है। यह आयोजन 10 जनवरी से एक माह तक चलेगा। इस दौरान प्रदेश की करीब 9 हजार ग्राम पंचायतों में कृषि कुंभ का आयोजन कर सरकारी कृषि योजनाओं का असर जांचने के साथ ही उनकी नाराजगी दूर करने का भी प्रयास किया जायेगा। इसके लिए

सभी जनपदों में किसान कार्यशाला का आयोजन कर किसान मोर्चा के कार्यकर्ताओं को कुम्भ के लिए प्रशिक्षित करने की तैयारी है। वहीं 21 एवं 22 फरवरी को गोरखपुर में किसान मोर्चा का राष्टï्रीय अधिवेशन का आयोजन कर देश भर से मोर्चा पदाधिकारी की राय जानने की कोशिश की जायेगी। इससे पूर्व प्रदेश सरकार भी राजधानी लखनऊ में कृषि कुंभ का आयोजन कर चुकी है।

विरोधी दल सपा भी किसानों को सत्ता विरोधी लहर के जरिये अपने पाले में करना चाह रही है। सपा भी 7 जनवरी से 20 फरवरी तक किसानों की नाराजगी जान उसके निराकरण की कोशिश की जायेगी। इस दौरान सपा कार्यकर्ता किसानों को अपना विजन पत्र भी देंगे। वहीं कांग्रेस भी किसानों के बीच इसी माह से जाने की तैयारी कर रही है। वह केन्द्र एवं प्रदेश सरकार की कृषि योजनाओं का पोस्टमार्टम करने के साथ ही कर्ज माफी का वायदा करेगी। इसके साथ ही रालोद भी किसानों के बीच पंचायत कार्यक्रम इसी माह से आरंभ करने जा रहा है। इस तरह किसानों के लिए सभी दलों ने अपना झोली को खोल दिया है लेकिन यह वर्ग खामोशी से हवा का रुख भांप रहा है।

कर्ज माफी पर 500 अरब, ब्याज माफी में 15000 करोड़ का भार : नाराज किसानों को मनाकर एक बार फिर अपने पाले में लाने के लिए केन्द्र सरकार सभी पहलुओं पर विचार कर रही है। ऐसे में यदि किसानों के कर्ज माफ  केवल ब्याज माफ  किया जाता है तो इस पर 15 हजार करोड़ का भार केन्द्र्र सरकार पर पड़ेगा। वहीं समर्थन मूल्य का लाभ किसानों को दिलाने के लिए सरकार पर 30 अरब का भार पडऩे की संभावना है। इसके साथ ही सरकार फसली बीमा योजना में किसानों द्वारा दिये जाने वाला डेढ़ से 2 प्रतिशत का प्रीमियम भी माफ  करने पर विचार कर रही है। तेलंगाना मॉडल पर भी किसानों को राहत देने पर मंथन कर रही है। वहीं कांग्रेस किसानों का सम्पूर्ण कर्ज माफी का ऐलान करने की तैयारी में है। इससे सरकार पर 500 अरब का भार सरकारी खजाने पर पड़ेगा।

 

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