20 June, 2018

ड्रॉप ऑफ होप’  जलसंवर्धन व पेयजल संरक्षण प्रकल्प अमल करने के लिए

मुंबई: विश्व मे टायर और रबर का सर्वाधिक बड़ी कंपनी  ब्रिजस्टोन कॉर्पोरेशन(ब्रिजस्टोन)ने युनायटेड नेशन्स चिल्ड्रन्स फंड अर्थात ‘युनिसेफ’ के साथ सहयोग करार किया है .इसके माध्यम से  ‘ड्रॉप ऑफ होप’  यह  जलसंवर्धन और  पेयजल संरक्षण प्रकल्प सुरु किया जाने वाला है . महाराष्ट्र शासन के  जलसंवर्धन और स्वच्छता विभाग के सहयोग से यह करार किया गया है .इस प्रकल्प के प्रथम चरण के काम की सुरुवात भारत मे महाराष्ट्र राज्य के पुणे,लातूर और उस्मानाबाद इन जिलों में होगा . ब्रिजस्टोन ने ३.९ करोड़ रुपये का योगदान इस प्रकल्प के लिए दिया है यह अगले तीन वर्ष में सुरु किया जाएगा .

 

इस प्रकल्प के माध्यम से पीने का पानी की सुरक्षितता और सुरक्षा अबाधित किया जाएगा,इस पर जोर दिया जाएगा.इसमे पानी का वर्तमान हालात का अनुमान लेने के लिए आधारभूत सर्वेक्षण करना और उसी समय भविष्यकाल के हालात का जायजा भी लिया जाएगा .

 

चट्टानों और उथल जलस्त्रोत के कारण महाराष्ट्र के अनेक तालुका में दुष्काल की परिस्थिति रहता है.महाराष्ट्र के ग्रामीण भागो में गिनेचुने घरो में नल का पानी आता है और उसमें से केवल 63 प्रतिशत पानी पर प्रक्रिया किया हुआ होता है .साधारण 20 प्रतिशत ग्रामीण घरो के लोग घर के पीने के पानी के लिए दूर दूर के और असुरक्षित जलस्त्रोत पर अवलंबित रहते है .लगभग एक-षष्टांश ग्रामीण लोकसंख्या पीने के पानी के लिए सार्वजनिक हाथपम्प पर अवलंबित रहते है.पानी प्रति व्यक्ति प्रमाण   २१ से १२९ लिटर प्रती व्यक्ति है. २०२० तक यह ७० लिटर प्रतीव्यक्ति प्रति दिन होना अपेक्षित है .इस प्रकल्प के माध्यम से ग्राम स्तर पर समिति अधिक मजबूत कर पूरे वर्षभर पानी की सुरक्षा और संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याय ढूंढना लक्ष्य सामने रखा गया है .

 

ब्रिजस्टोन यह युनिसेफ को सहयोग करने वाली है उसके माध्यम से समाज के विविध घटको का व महत्वपूर्ण अधिकारियों का प्रशिक्षण और कौशल्य विकास करने पर जोर दिया जाएगा .

 

यह काम ग्राम ,तालुका और जिला स्तर पर किया जाएगा उसमे भी जलवितरण रचना अधिक सुदृढ करने और उसके योग्य तरीके से देखभाल करने जैसे बातो पर विशेष ध्यान दिया जायेगा .इस प्रकल्प का एक विशेष घटक के तौर पर इस में नए संपर्क प्रक्रिया व् साधनों का उपयोग किया जाएगा .उससे ही पानी उपयोग और व्यवस्थापन की कोशिस किया जायेगा .

 

यह प्रकल्प जमीनी स्तर पर लाने का उद्देश्य महाराष्ट्र सरकार के साथ सामंजस्य और घनिष्ट पद्धती से  करना है .इसके साथ स्त्रोतों का उपयोग करने पर विशेष ध्यान दिया जाने वाला है .

 

इस सहकार्य करार में मॉडल तैयार कर उसका उपयोग करने पर जोर दिया जायेगा उससे पिने के पानी की सुरक्षा अधोरेखित किया जायेगा .गाव के विकास के लिए जो निधि रखा गया उसका उपयोग करने के लिए नागरिको को प्रोत्साहित किया जाएगा

 

इस भागीदारी के बारे में बोलते हुए ब्रिजस्टोन एशिया पॅसिफिक प्रायव्हेट लिमिटेड मंडल के सदस्य, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और मुख्य कार्य अधिकारी श्री योशीकाझु शीदा कहा, “ब्रिजस्टोन कॉर्पोरेशनने अपने आसपास के समाज के घटको के लिए योगदान देने पर हमेशा जोर दिया है . ‘सर्व्हिंग सोसायटी विथ सुपीरियर क्वॉलिटी’  इस मिशन के माध्यम से उदिष्ट प्रतीत होता है . मिशन ब्रिजस्टोन केा ‘अवर वे टू सर्व्ह’ इस सीएसआर जिम्मेदारी के लिए मार्गदर्शक साबित हो रहा हैे.इस के लिए  गतिशीलता, नागरिक और पर्यावरण यह हमारे लिए प्राथमिकता है . ब्रिजस्टोनने युनिसेफ के साथ किया  भागीदारी यह लोगों के प्रति जिम्मेदारी को अधिक मजबूत करता है. भारत मे यह प्रकल्प  ब्रिजस्टोन के विश्व स्तर के  सीएसआर जिम्मेदारी के साथ है .हम आगे भी कई भागीदारों के साथ और सामाजिक कामो से जोड़े जाएंगे .

 

ब्रिजस्टोन इंडिया प्रायव्हेट लिमिटेड के व्यवस्थापकीय संचालक श्री पराग सातपुते कहा, “युनिसेफ जैसे प्रतिष्ठित  संगठन के साथ जलसंवर्धन जैसे  महत्वपूर्ण विषय के लिए जोड़े जाने पर हमें आंनद हो रहा है .  महाराष्ट्रत में सर्वाधिक दुष्कालग्रस्त तालुका है इन राज्यो में कार्यरत होने से हम यहां के लोगो के प्रति और उसमें भी खास कर आने वाले पीढ़ियों के लिए कुछ करना हम अपना जिम्मेदारी मानते है .

 

पानी को बचाने का अधिकार मूलभूत घटको में होता है और यह मूलभूत अधिकार उनसे नजर अंदाज किया गया है इस से उनके जीवन असहाय हो गया है.यूनिसेफ के साथ भागीदारी किये जाने से अपना जो स्त्रोत है उनका सुलाभिकरण संघटित  पद्धती से करना आसान होगा ।महाराष्ट्र शासन के जलापूर्ति और स्वच्छता विभाग के भी हम आभारी है क्योंकि उन्होंने इस काम के लिए सपना सहयोग दिया है  .

 

युनिसेफ इंडिया के प्रतिनिधी डॉ यास्मिन अली हक ने कहा की, “पानी की कमी या संकट कुछ मिथक नही रहा . इस कमी का अनुभव पूरा विश्व ले रहा है . हम सभी को एक बात जानकारी है की जब स्त्रोत कम होता है उस समय छोटे बच्चे और महिलाओं को सर्वाधिक कष्ट सहन करना पड़ता है.इस परिस्थिती पर मात करने के लिए समाज और नागरिको को अधिक सक्षम करने की कोशिश में हमे   ब्रिजस्टोन का साथ मिल रहा है हमे अधिक आनंद है.महाराष्ट्र में भूजल संबंधित कानून अस्तित्व में है .इसके कारण पीने का पानी का सुरक्षितता और सुरक्षा संदर्भ में समस्या जानने में अधिक आसान है . महाराष्ट्र शासन के जलापूर्ति और स्वच्छता विभाग के सहयोग से इस प्रकल्प को अमल कर रहे है .इस से पानी समस्या को हल किया जा सकेगा .यह कोशिस सफल रहा तो यह मॉडल पूरे देश मे किया जाएगा ।

rgautamlko@gmail.com

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