20 November, 2017

ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा की ईमानदारी पर उठे सवाल

एनडीएस ब्यूरो

लखनऊ। छाती ठोंक-ठोंक कर ईमानदारी का दावा करने वाले सूबे के तेजतर्रार ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। निजी बिजली कम्पनियों से महंगी बिजली खरीदने के फैसले से जहां ऊर्जा मंत्री की निजी बिजली कम्पनियों पर खास मेहरबानी की झलक मिलती है, वहीं बिजली उपभोक्ताओं को महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

बताते चलें कि यूपी में भाजपा की सरकार बनने से पहले केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री और वर्तमान यूपी ऊर्जा मंत्री महंगी बिजली खरीद को लेकर पूर्ववर्ती सरकार पर सवाल खड़ा करते थे। अब ऊर्जा मंत्री की सहमति से उत्तर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन की वितरण कंपनियां निजी क्षेत्र में बजाज हिन्दुस्तान से सबसे महंगी बिजली खरीदेंगी। 7.22 रुपये प्रति यूनिट की दर से साल भर में 1773 करोड़ रुपये की बिजली खरीद प्रस्तावित है। रिलायंस की रोजा तापीय परियोजना से मिलने वाली बिजली की दर भी 5.04 रुपये प्रति यूनिट प्रस्तावित है। कंपनियों द्वारा ज्यादा दर वाली निजी क्षेत्र की  बिजली खरीदने से विद्युत उपभोक्ताओं को महंगी बिजली का कहीं अधिक झटका लगने के आसार हैं।

पॉवर कॉरपोरेशन की मध्यांचल, पूर्वाचल, पश्चिमांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण कंपनियों ने नियामक आयोग में बीते बुधवार को दाखिल किए गए एआरआर (वार्षिक राजस्व आवश्यकता) में मौजूदा वर्ष के दौरान विभिन्न विद्युत उत्पादन गृहों से कुल करीब 1,28,908 मिलियन यूनिट बिजली की खरीद प्रस्तावित की है। जिसकी कुल लागत 52,919 करोड़ रुपये है। जबकि प्रति यूनिट खरीद की औसत दर 4.11 रुपये बताई गई है। इसमें निजी घरानों से करीब 57,580 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी जानी है। जिसकी कुल लागत 25,457 करोड़ रुपये है। यह औसत पांच रुपये प्रति यूनिट से अधिक का है।

निजी घरानों से जहां सवा सात रुपये प्रति यूनिट तक की दर से बिजली खरीदने का प्रस्ताव बनाया गया है, वहीं सरकारी व्यवस्था के तहत यह बिजली आधी कीमत यानी चार रुपये प्रति यूनिट से भी कम दर पर उपलब्ध है। बिजली कंपनियों द्वारा दाखिल एआरआर के मुताबिक मौजूदा वर्ष में वितरण कंपनियां करीब 2,507 मिलियन यूनिट बिजली की खरीद पॉवर एक्सचेंज व द्विपक्षीय समझौतों के तहत महज 3.80 रुपये प्रति यूनिट की दर से करेंगी।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने एमओयू रूट के तहत निजी घरानों से महंगी बिजली खरीद का विरोध करने की चेतावनी देते हुए इन उत्पादन गृहों से खरीद का करार निरस्त करने की मांग की है। वर्मा का कहना है कि निजी घरानों से महंगी बिजली खरीदने का खामियाजा अंतत: विद्युत उपभोक्ताओं को ही भुगतना पड़ता है।

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