22 October, 2018

मंडियों में मिलेगी निजी क्षेत्र को एंट्री, किसानों को होगा लाभ

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लखनऊ। किसानों को शोषण से बचने और प्रदेश के किसानों की आय साल 2022 तक दोगुनी करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार ने अपना ध्यान उपज का सही दाम दिलवाने पर केंद्रित किया है। किसानों को उपज बेचने के लिए अधिक विकल्प के साथ प्रतियोगी बाजार मिल सके, इसके लिए मंडी ऐक्ट में संशोधन पर विचार किया जा रहा है। इसके जरिए निजी क्षेत्र को भी मंडी या क्रय केंद्र स्थापित करने की सुविधा दी जा सकती है। इससे किसानों को खेत में ही खरीदार मिल सकेंगे।

किसानों के साथ सबसे बड़ी समस्या उनकी उपज का सही दाम मिलना है। उत्पादन अधिक होने पर दाम भी घट जाते हैं। इसके अलावा उपज बेचने के लिए सरकारी मंडी, स्थानीय आढ़तियों के अलावा कोई और विकल्प न होने से भी सही दाम नहीं मिल पाता है। जबकि उन्हीं उत्पादों की प्रॉसेसिंग कर कंपनियां कई गुना मुनाफा कमाती हैं। इसलिए सरकार यूपी कृषि उत्पादन मंडी समिति ऐक्ट में बदलाव कर निजी

क्षेत्र को भी मंडी या क्रय केंद्र स्थापित करने की सुविधा देने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। इससे मंडी परिषद का एकाधिकार भी खत्म होगा और किसानों को उनके कस्बे या आस-पास ही खरीदार मिलेंगे। मंडी दूर होने के चलते लगने वाली ट्रांसपोर्टेशन लागत भी घटेगी और आढ़तियों की मर्जी पर भी निर्भर नहीं रहना होगा। बड़े रिटेल स्टोर या फूड प्रॉसेसिंग कंपनियां किसानों से सीधे फसल खरीद सकेंगी।

इस व्यवस्था लागू करने में एक बड़ी बाधा मंडी परिषद की आय भी बन रही है। हालांकि, उच्चाधिकारियों का तर्क है कि मंडी परिषद को जितना मुनाफा होना चाहिए, अभी उसका आधा है। ऐसे में जिस मुनाफे की उम्मीद कर रहे हैं, वह तो मंडी परिषद को पहले से ही नहीं मिल रहा है। मंडियों में किसानों की आवाजाही में कमी से होने वाले नुकसान की भरपाई निजी क्षेत्र पर लाइसेंस शुल्क लगाकर भी की जा सकती है।

मंडी परिषद के निदेशक धीरज कुमार का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज को भी उपमंडी का लाइसेंस देने पर विचार किया जा रहा है। इसके बदले कोल्ड स्टोरेज मंडी परिषद को लाइेंसस फीस देंगे। कोल्ड स्टोरेज व्यापारियों से इसके बदले निश्चित फीस वसूल सकेंगे, हालांकि वहां माल बेचने वाले किसानों से कुछ नहीं लिया जाएगा। किसान भी संघ बनाकर स्थानीय स्तर पर मंडी खोल सकेंगे। किसानों के पास खरीदारों का अधिक विकल्प होने से उन्हें अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।

private sector,Mandi, farmers, Uttar Pradesh, mandi actकृषि उत्पादन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने कहा कि किसानों की आय उपज के सही दाम मिलने से ही बढ़ेगी। उनके पास जितने ज्यादा और सुविधाजनक विकल्प रहेंगे, मुनाफा उतना ही अधिक होगा। इसलिए हम मंडी ऐक्ट में संशोधन कर इससे जुड़े प्रावधानों को शामिल करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

rgautamlko@gmail.com

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