19 November, 2018

योगी सरकार में सरकारी दामाद बना ‘अर्नेस्ट एंड यंग’

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राजेन्द्र के. गौतम
लखनऊ। सूबे के विभिन्न विभागों में नियुक्त सलाहकार एजेंसी उन विभागों के लिए दाद में खाज साबित हो रहे हैं, जिन्होंने अपने आर्थिक ढांचे को मजबूत बनाने और विस्तारीकरण का सपना देखा था। विभाग में आमूल-चूल परिवर्तन के लिए रखे गए सलाहकारों की सलाह से भले ही विभाग को रत्ती भर फायदा न पहुंचा हो, लेकिन ये सलाहकार एजेंसियां सेहतमंद हो गई है। नौकरशाहों के संरक्षण के चलते जनता की गाढ़ी कमाई को भारी भरकम फीस के रूप में डकारने के बाद अब सरकारी दामाद बनकर आर्थिक दोहन कर रही हैं। इसका खुलासा उद्योग बंधु में सेवाएं दे रही कारोबारी सलाहकार एजेंसी अर्नेस्ट एंड यंग को दी जा रही भारी-भरकम फीस और हवाई यात्राओं का विवरण जनसूचना अधिनियम से प्राप्त सूचनाओं से होता है।

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मालूम हो कि वर्ष 2011 से लेकर अक्टूबर 2018 तक कारोबारी सलाहकार एजेंसी अर्नेस्ट एंड यंग की सेवाएं उद्योग बंधु ले रहा है। अब औद्योगिक एवं अवस्थापना विकास विभाग और उद्योग बंधु की कारोबारी सलाहकार एजेंसी अर्नेस्ट एंड यंग पर काफी निर्भरता बढ़ गई है। यही कमजोरी और अफसरों के संरक्षण की वजह से अर्नेस्ट एंड यंग को भुगतान की जाने वाली करोड़ों रुपए में पहुंच गई है। सरकारी सुविधाओं के साथ ही देश और विदेश की यात्राएं भी सरकारी खर्च पर कर रहे हैं। जनसूचना के तहत प्राप्त सूचनाओं के अनुसार उद्योग बंधु अब तक अर्नेस्ट एंड यंग के प्रतिनिधियों डी.पी. दास, रोहित भूटानी, सुकांता रॉय और गौरव पाण्डेय की विदेश यात्रा पर 10,37,012.00 रुपए खर्च कर चुका है। इसमें सबसे अधिक खर्च योगी सरकार के कार्यकाल में हुआ है। उद्योग बंधु में अर्नेस्ट एंड यंग ने वर्ष 2011-12 में 12 लाख 16 हजार 250 रुपए में अपनी सेवाएं देना शुरू कर दिया था। अब यह धनराशि करोड़ों रुपए में पहुंच गई है। 20 अगस्त 2018 तक उद्योग बंधु अर्नेस्ट एंड यंग 1 करोड़ 49 लाख 75 हजार 200 रुपए का भुगतान कर चुका है। जबकि चालू वित्त वर्ष में अभी छह माह शेष हैं। यह धनराशि दोगुनी होने की संभावना है।

औद्योगिक एवं अवस्थापना विकास विभाग और उद्योग बंधु के सूत्रों का कहना है कि आला अफसरों की कमाओ-खाओ कार्यप्रणाली की वजह से सरकारी विभाग कमजोर हो रहे हैं और सलाहकार एजेंसियां मजबूत हो रही हैं। अफसरों को अपने इशारे पर नाचने वाले आदमियों की जरूरत होती है। इस वजह से इनको वरीयता दी जाती है। देश-विदेश में दौरे पर गए अफसरों को हर तरह की सुख-सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। इस कमजोरी की वजह से सलाहकार एजेंसियों का निरंतर उपयोगिता बनाई रखी जाती है। अर्नेस्ट एंड यंग सरकारी आफिस से लेकर उद्योग बंधु की हर सुविधाओं का उपभोग कर रहा है। उद्योग बंधु के संयुक्त अधिशासी निदेशक अरूण कुमार ने कहा कि अर्नेस्ट एंड यंग के प्रतिनिधियों को विदेश यात्राओं के भुगतान की व्यवस्था का प्रावधान एग्रीमेंट में है। इसी व्यवस्था के तहत भुगतान किया जा रहा है। औद्योगिक एवं अवस्थापना विकास विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि सलाहकार एजेंसियों की उपयोगिता इस वजह से अधिक है, सरकारी कर्मचारी उतने न तो दक्ष होते हैं और न ही अनुभव रखते हैं। इस वजह से सलाहकार एजेंसियों को वरीयता दी जाती है। विदेश यात्राओं के संबंध में कहा कि सलाहकार एजेंसियों को इस वजह से विदेश यात्रा पर ले जाया जाता है कि वहां पर उद्योगपतियों से मिलवाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
ब्याज माफी का खेल शुरू
बसपा सुप्रीमो मायावती के करीबी अफसरों में शुमार रहे वरिष्ठï आईएएस अफसर राजेश कुमार सिंह मौजूदा योगी सरकार में प्रमुख सचिव औद्योगिक एवं अवस्थापना हैं। मायावती सरकार में मण्डी निदेशक पद पर थे, और कई कारनामें आज भी सुर्खियों में हैं। अब प्रमुख सचिव के कारनामों से औद्योगिक एवं अवस्थापना विकास विभाग भी चर्चाओं में आ गया है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि लग्जीरियश लाइफ के शौकींन प्रमुख सचिव महोदय की आंख-कान यूपीएसआईडीसी का एक दागी अफसर मंसूर कटियार बना हुआ है। इस अफसर का प्रमुख सचिव के कार्यालय में सीधा दखल है। यह अफसर कभी पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा का करीबी करिंदा था। बाबू सिंह कुशवाहा के कार्यकाल में यूपीएसआईडीसी में नौकरी लगवाई गई थी। इसकी जांच अभी चल रही है। सूत्रों का कहना है कि यूपीएसआईडीसी का एक दागी अफसर मंसूर कटियार अब बिल्डरों का एजेंट बनकर प्रमुख सचिव से ब्याज शुल्क माफ करवाने का खेल शुरू कर दिया है। इससे जहां सरकार को लाखों रुपए के राजस्व को चूना लगने की उम्मीद है वहीं योगी सरकार की साख भी दांव पर है।
इंवेस्ट यूपी के गठन की तैयारी
भंग होगा पिकप और उद्योग बंधु!
औद्योगिक और निवेश गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए राष्टï्रीय स्तर पर बनी इंवेस्ट इंडिया एजेंसी की तर्ज पर प्रदेश में औद्योगिक एवं अवस्थापना विभाग इंवेस्ट यूपी स्वायत्तशासी संस्था के गठन के लिए भगीरथी प्रयास शुरू कर दिए हैं। इंवेस्ट यूपी में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने वाले राष्टï्रीय और अंतर्राष्टï्रीय विशेषज्ञों की सेवाएं ली जाएंगी। जिससे प्रदेश में पूंजी निवेश को बढ़ावा मिले और सूबेवासियों को रोजगार के अवसर प्राप्त हों। इसके साथ ही इंवेस्ट यूपी के ढांचे को मजबूत करने के लिए योगी सरकार द प्रदेशीय इंडस्ट्रियल एंड इंवेस्टमेंट कारपोरेशन ऑफ यूपी लिमिटेड (पिकप) और उद्योग बंधु को भंग कर नया स्वरूप देने की तैयारी है। यह जानकारी औद्योगिक एवं अवस्थापना विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह ने निष्पक्ष दिव्य संदेश को दी।

 

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