18 April, 2019

घर से ही करें ईधन संरक्षण की पहल

  • कार पुलिंग से बचायें पैसा और पर्यावरण
  • रसोईघर में प्रयोग करें आईएसआई मार्का उपकरण, होगी एलपीजी की भारी बचत
  • 36,360 करोड़ की एलपीजी की गयी आयात

लखनऊ। पेट्रोलियम पदार्थो की 80 फीसद घरेलू मांग के लिए भारत विभिन्न देशों से आयात पर निर्भर है जिसपर प्रति वर्ष अरबों रुपये की विदेशी मुद्रा खर्च होती है। वर्ष 2017-18 में अकेले रसोई घरों में एलपीजी गैस की आपूत्तर्ि सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 36,360 करोड़ रुपये से 11 एमएमटी एलपीजी (रसोई गैस) आयात की गयी । जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। इस लिहाज से देखा जाय तो हम इनका उपयोग जितनी किफायत से करेंगे उतनी मांग घटेगी और इससे जो विदेशी मुद्रा बचेगी उससे देश के अन्य विकास कार्य सम्पन्न हो सकते हैं। पेट्रोलियम प्लानिंग एण्ड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के अनुसार 2016-17 में 213.93 मिलियन टन कच्चा तेल का आयात किया गया। इसके लिए 4.7 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा खर्च की गयी। इसी प्रकार वर्ष 2017-18 में 219.15 मिलियन टन कच्चे तेल का आयात किया गया जिस पर 5.65 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा खर्च की गयी। तेल की मांग वर्ष प्रति वर्ष बढ़ती ही जा रही है।

लखनऊ। शहरों में बढ़ते वाहन, ट्रैफिक जाम और वाहनों के धुएं से बढ़ते प्रदूषण से निजात दिलाने में कार पुलिंग बढ़िया साधन साबित हो सकता है। कार पुलिंग के माध्यम से एक ही कार्यस्थल पर काम करने वाले अथवा एक ही जगह जाने वाले कई लोग कार शेयर कर सकते हैं। कई महानगरों में कार पुलिंग सेवा शुरू हो चुकी है लेकिन छोटे शहरों में लोग अभी भी हिचक रहे हैं। जबकि हाल के दिनों में छोटे शहरों में भी वाहनों की संख्या दिन दूनी रात चौगुनी की दर से बढ़ रही है जिससे सड़कों पर चलना दूभर हो रहा है। कार पुलिंग से जहां लोगों की जेबें कम ढीली होंगी वहीं सड़कों पर वाहन कम होने ईधन की खपत घटेगी और ट्रैफिक जाम की समस्या से भी निजात मिलेगी।

वर्ष 2017-18 में 5.65 लाख करोड़ रुपये खर्च कर आयात किया गया 219.15 मिलियन टन कच्चा तेल

लखनऊ। देश में पेट्रोलियम पदार्थो का भंडार सीमित है तथा घरेलू मांग की तुलना में उत्पादन बहुत ही मामूली है। प्रति वर्ष पेट्रोलियम पदार्थो की घरेलू मांग पूरा करने के लिए सरकार को अरबों रुपये की विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती। वैसे भी विश्व में तेल और गैस का भंडार सीमित है इसलिए हम सब को ईधन संरक्षण के लिए एकजुट होना होगा। इसकी शुरुआत घर में रसोईघर से ही की जा सकती है। खाना पकाने के लिए एलपीजी गैस हो या केरोसिन ऑयल का प्रयोग, इसके लिए हमेशा आईएसआई मार्का एलपीजी चूल्हे, स्टोव व प्रेशर कुकर का इस्तेमाल करना चाहिए। थोड़ी सतर्कता व स्टैंर्डड उत्पादों की मदद से हम अपने घरेलू खर्चो में जहां कमी ला सकते हैं वहीं ईधन संरक्षण में भरपूर सहयोग भी। पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संघ (पीसीआरए) ऊर्जा संरक्षण के लिए घरों से लेकर कल कारखानों तक में विभिन्न तरह के कार्यक्रम आयोजित कर जन जागरूकता ला रहा है।

ऊर्जा और ईधन संरक्षण के लिए हम सभी को एकजुट होना होगा तभी सरकार का संकल्प होगा पूरा।रसोईघर में एलपीजी गैस का इस्तेमाल हो या वाहनों के लिए पेट्रोल-डीजल की खपत, हम थोड़ी सी सतर्कता और सावधानी बरत कर वाहन की लाइफ और अपनी बचत बढ़ा सकते हैं। सड़क पर वाहन की रफ्तार 45 किमी/प्रतिघंटा व उसकी समय-समय पर बेहतर देखभाल तथा ट्रैफिक सिग्नल पर गाड़ी बंद कर हम प्रति वर्ष लाखों लीटर ईधन बचा सकते हैं। इसी तरह खेती किसानी के कायरे में लगे ट्रैक्टर और पम्प सेट में डीजल की खपत आसानी से घटाई जा सकती है। किसान को हमेशा अपने कृषि यंत्रों की मानक के अनुरूप सर्विसिंग एवं तेल की खपत का ध्यान रखना होगा। एक अध्ययन के अनुसार प्रति सेकेंड एक बूंद तेल के रिसाव से एक वर्ष में 2000 लीटर ईधन की बरबादी हो सकती है इसलिए वाहन और पम्पिंग सेटों की ईधन टंकी, फ्यूल पम्प, सही ग्रेड के लुब्रीकेंट्स, एयर फिल्टर आदि का उपयोग करें। वाहनों से न होने दें तेल रिसाव, प्रति सेकेण्ड एक बूंद तेल के रिसाव से एक वर्ष में होती है 2000 लीटर ईधन की बर्बादी द थोड़ी सतर्कता से जहां हम घरेलू खर्चो में ला सकते हैं कमी, वहीं सुरक्षित भविष्य के लिए संरक्षित कर सकते हैं ऊर्जा

rgautamlko@gmail.com

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