21 October, 2018

गूगल और स्मार्ट कार्ड से जुड़े उद्योग नहीं चाहते कि आधार सफल हो : यूआईडीएआई

  • जब तक डाटा प्रोटेक्शन लॉ नहीं होगा तब तक समस्या रहेगी : जस्टिस चंद्रचूड़

नई दिल्ली। आधार की अनिवार्यता को चुनौती देनेवाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यूआईडीएआई ने कहा कि गूगल और स्मार्ट कार्ड से जुड़े उद्योग नहीं चाहते कि आधार सफल हो। सुनवाई के दौरान कैंब्रिज एनालिटिका का नाम भी उछला जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डाटा का उपयोग कर चुनावों तक में गड़बड़ी की जा सकती है। इसलिए डाटा को सुरक्षित करना सबसे बड़ी जरुरत है। इस मामले पर कल यानि 18 अप्रैल को भी सुनवाई जारी रहेगी।

आज यूआईडीएआई की तरफ से बहस की शुरुआत वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने की। उन्होंने आधार एक्ट की धारा 8 को पढ़ते हुए कहा कि सूचनाओं की शेयरिंग केवल प्रमाणीकरण तक ही सीमित है। उन्होंने कहा कि आधार एक्ट की धारा 29 के तहत भी शेयरिंग प्रमाणीकरण तक ही सीमित है। धारा 8 के तहत कोर बायोमेट्रिक सूचना को कभी शेयर नहीं किया जा सकता है। राकेश द्विवेदी ने कहा कि निगरानी से बचने के लिए कोर्ट धारा 29 की व्याख्या कर सकती है और उसे शेयरिंग को सीमित कर सकती है। इस पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि बैक एंड पर सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाए। तब राकेश द्विवेदी ने कहा कि ये तकनीकी विशिष्टताओं और प्रोफेशनल ऑडिट के जरिये हो सकता है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने धारा 8(2), 8(3), और धारा 29 के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के प्रमाणीकरण के लिए उसकी सहमति ली जा सकती है और फिर बाद में उसे प्रमाणीकरण के लिए सीआईडीआर में भेजा जा सकता है। तब द्विवेदी ने कहा कि सूचना का इस्तेमाल केवल प्रमाणीकरण के लिए किया जा सकता है। उन्होंने धारा 29 को पढ़ते हुए कहा कि केवल गैर बायोमेट्रिक डाटा ही शेयर हो सकते हैं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा जो सहमति मांगेगा वो प्रमाणीकरण की जरुरत को जानेगा लेकिन इससे द्विवेदी ने इनकार किया। द्विवेदी ने कहा कि सहमति मांगनेवाला प्रमाणीकरण की जरुरत को नहीं जानेगा। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि धारा 8(3) और धारा 29(3) में साफ उल्लेख है कि सहमति मांगनेवाला प्रमाणीकरण की जरुरत जानेगा। लेकिन राकेश द्विवेदी ने इससे साफ इनकार किया।

द्विवेदी ने कहा कि अगर हम अपोलो जाते हैं तो उसे ये पता नहीं चलेगा कि हम क्यों आए हैं दवा खरीदने के लिए या किसी डॉक्टर से मिलने के लिए। सूचना तभी पता चलेगा जब अपोलो हमसे प्रमाणीकरण की मांग करेगा। उन्होंने कहा कि मान लीजिए कि हम एयरपोर्ट पर जाते हैं और गेट पर हमें प्रमाणीकरण कराना होता है तो एयरपोर्ट अथॉरिटी हमसे ये नहीं कहेगा कि हम कहां जा रहे हैं और कौन सी फ्लाईट पकड़नी है।

जस्टिस एके सिकरी ने कहा कि समस्या धारा 29 में है जो सूचनाओं को शेयर करने की अनुमति देता है। तब द्विवेदी ने कहा कि कोर बायोमेट्रक शेयर नहीं किया जा सकता है। जस्टिस सिकरी ने कहा कि प्रमाणीकरण के इस्तेमाल को शेयर किया जा सकता है। तब द्विवेदी ने कहा कि प्रमाणीकरण के आग्रह का हां या ना में इस्तेमाल किया जा सकता है। द्विवेदी ने कहा कि हमारे पास दूसरी कोई सूचना नहीं है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ये दलील केवल यूआईडीएआई के लिए मान्य हो सकती है लेकिन प्रमाणीकरण का आग्रह करनेवाले के लिए नहीं। तब द्विवेदी ने कहा कि अगर कोर्ट को आशंका है तो वो एक्ट की व्याख्या कर उसे बाहर कर सकती है। जस्टिस सिकरी ने कहा कि धारा 8(3) की इस मामले में क्या जरुरत है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि मान लें कि अपोलो प्रमाणीकरण का आग्रह करता है या किसी दूसरी प्रमाणीकरण एजेंसी को सूचना देता है। तब इस बात का रिकॉर्ड होगा कि कोई व्यक्ति अपोलो अस्पताल गया था और प्रमाणीकृत किया गया था। ऐसा फार्मा कंपनियां या इन्श्योरेंस कंपनियां कर सकती हैं। राकेश द्विवेदी ने कहा कि इसके लिए आधार की जरुरत नहीं है। आप दस अस्पतालों में जा सकते हैं और पता कर सकते हैं। तब जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जब तक डाटा प्रोटेक्शन लॉ नहीं होगा तब तक समस्या रहेगी। तब राकेश द्विवेदी ने कहा कि कोई भी डाटा प्रोटेक्शन लॉ आधार एक्ट की तरह सुरक्षित नहीं है। तब जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ये कुछ ज्यादा हो रहा है। उन्होंने कहा कि आप ईयूजीडीपीआर की ओर देखिए। वो अगले साल से लागू होने जा रहा है। तब राकेश द्विवेदी ने कहा कि हमें किसी की नकल की जरुरत नहीं है। हमें एक्ट के निरोधात्मक उपायों की ओर देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में सौ फीसदी कुछ भी श्योर नहीं है। अगर कोई व्यक्ति केरल भाषण देने जाता है और उसकी मौत हो जाए। हमें भगवान भी सौ फीसदी दावा नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी याचिकाकर्ता ने ये नहीं कहा कि हमें और क्या करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक्ट में डाटा के एनालिसिस को रोकने के लिए कोर्ट व्याख्या कर सकता है। तब जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि वाणिज्यिक सरलता का कोई अंत नहीं है। जस्टिस सिकरी ने कहा कि इलाज के बारे में सूचना अस्पताल के पास होगी और उसे ज्यादा सूचना के लिए आधार की जरुरत नहीं होगी।

जस्टिस सिकरी ने कहा कि इस बात की आशंका है कि डाटा का गलत इस्तेमाल होगा। असली आशंका ये है कि चुनावों में गड़बड़ी के लिए व्यक्तिगत डाटा का इस्तेमाल हो सकता है। इसलिए हमें डाटा की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की जरुरत है। तब राकेश द्विवेदी ने कहा कि कैंब्रिज एनालिटिका को इसमें मत लाइए। उन्होंने कहा कि हमें गूगल की तरह का प्रमेय नहीं आता है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को प्रमेय बताकर कंफ्युज कर दिया है। उन्होंने कहा कि हमने पिछले चार महीने में प्रमेय को समझने के लिए पचास हजार रुपये का किताब खरीदा है। लेकिन इसके बावजूद इसके बारे में वे बहुत कुछ नहीं जानते हैं। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने हमें डराने का काम किया है। आधार एक एटम बम नहीं है, बल्कि ये हमें हमारे बारे में बताता है।

राकेश द्विवेदी ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने स्मार्ट कार्ड की वकालत की है क्योंकि स्मार्ट कार्ड के हित यूरोप से जुड़े हुए हैं। अगर भारतीय प्रयोग सफल होता है तो वे खतरे में पड़ जाएंगे। स्मार्ट कार्ड की लॉबी नहीं चाहती कि आधार सफल हो। गूगल कभी ये नहीं चाहेगा कि आधार सफल हो।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि आधार प्लेटफॉर्म निजी क्षेत्र के लिए क्यों खोला गया। तब राकेश द्विवेदी ने कहा कि निजी और सरकारी का भेद बदल रहा है। अब रिलायंस भी रक्षा क्षेत्र में आ रहा है। निजी क्षेत्र टेलीकॉम और उड्डयन के क्षेत्र में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्रों को भी बैंकों द्वारा फंड दिया जाता है जहां हमारा भी पैसा होता है। तब निजी और सरकार कहां है हम सभी भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी काम करनेवाले निजी क्षेत्रों को संवैधानिक नियमों के तहत लाया जा सकता है। इस पर दूसरे दिन भी बहस हो सकती है। हमें ये समझना होगा कि निजी क्षेत्र भी इस एक्ट के तहत नियंत्रण में हैं। उन्होंने कहा कि कई याचिकाकर्ता ऐसे हैं जो हिटलर से तुलना कर रहे हैं। शायद याचिकाकर्ता ये कह रहे हैं कि इतिहास संख्या से शुरु होकर हिटलर पर खत्म हुआ। लेकिन सारा इतिहास संख्याओं का है और संख्या भारत से शुरु हुई। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट में प्रवेश के लिए प्रोक्जिमिटी कार्ड पर भी एक नंबर है। हवाई टिकट पर भी पीएनआर नंबर है। उन्होंने कहा कि हिटलर के नंबर के साथ दिक्कत थी कि वो पहचान से जुड़ा हुआ था लेकिन आधार पहचान से जुड़ा हुआ नहीं है। अब तो क्रेडिट कार्ड पर भी नंबर है। 

rgautamlko@gmail.com

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