दलितों-पिछड़ों को छल रही हैं सरकारें

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  • बहुजन स्वराज घोषणा पत्र ने खोली पोल
  • राजनीतिक दलों को सौंपी जाएंगी बहुजन स्वराज घोषणा पत्र प्रतियां

अभय राज
लखनऊ। सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में असमानता से जूझ रहे देश के बहुजन समाज को जागरूक बनाने के लिए उत्तर अफ्रीका और दलित मामलों के अग्रणी बुद्घिजीवी डा. महेन्द्र प्रताप राना ने रविवार को राजधानी के सहकारिता विभाग के प्रेक्षागृह में बहुजन स्वराज घोषणा पत्र 2019 जारी किया। जिसमें भारत के समावेशी विकास के लिए 25 सूत्रीय कार्यक्रम का विस्तार से उल्लेख किया गया है। इस बहुजन घोषणा पत्र में जहां कई ऐसे मुद्दे उठाए गए हैं जिन पर आजादी से लेकर आज तक किसी भी राजनीतिक दल और सरकारों का ध्यान नहीं गया है वहीं शोधपरक अध्ययन तरीके से दलितों की बदहाली के कारणों का बारीकी से विश्लेषण गया है।

Jwahar lal nehru university, Dr. Mahendra Pratap Rana, Bahujan Swaraj Ghoshan Patra 2019, Divya Sandesh

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पश्चिम विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डा. महेन्द्र प्रताप राना ने निष्पक्ष दिव्य संदेश में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि आजादी से लेकर आज तक अधिकतर राज्य और केन्द्र सरकारें दलितों के हितों के लिए बड़ी-बड़ी बातें और योजनाएं बनाती हैं। लेकिन धरातल पर उसका असर नहीं दिखता है। उन्होंने कहा कि बहुजन स्वराज घोषणा पत्र 2019 को लाने के पीछे उनकी मंशा यह है कि मौजूदा समय 17वीं लोकसभा के चुनाव होने वाले हैं। अधिकतर राजनीतिक दल जनता को लुभाने के लिए अपना-अपना घोषणा पत्र लाएंगे। राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र में बहुजनों के मुद्दे गायब रहते हैं, वोट के लिए हर हथकंडे अपनाते हैं। लेकिन बहुजनों के मूलभूत मुद्दों को तरजीह नहीं देते हैं।

श्री राना ने बताया कि देश के राजनीतिक दलों का ध्यान बहुजनों के मुद्दों की ओर खींचने के लिए बहुजन स्वराज घोषणा पत्र 2019 में 14 महत्वपूर्ण मुद्दों में सर्वोच्च न्यायालय : एक परिचयन एवं वर्तमान में न्यायाधीशों की कुल संख्या में बहुजनों की भागेदारी नगण्य, भारत में कुल 25 उच्च न्यायालयों में न्यायधीशों की संख्या में बहुजनों की संख्या शून्य, सर्वोच्च न्यायालय का न्यायिक आतंकवाद के शीर्षक में उल्लेखित किय गया है कि किस तरह से न्यायपालिकों में भ्रष्टïाचार का पर्दाफाश करने वाले दलित न्यायधीश सी.एस. कर्नन को छह माह भेजा गया और उसी कृत्य के लिए सामान्य वर्ग के न्यायाधीश पुरुस्कृत किए गया। भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में समूह क संवर्ग के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति एवमं पिछड़े वर्ग की अघोषित रोक लगा रखी है।

भारत में मुस्लिम समाज का सामाजिक एवं आर्थिक पिछड़ापन एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा। जनसंख्या घोटाला। नया महिला आरक्षण बिल 2019 संसद में पारित हो। केन्द्रीय एवं राज्य विश्वविद्यालयों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़े वर्गों के प्रोफेसर, एसोसियेट प्रोफेसर एवं साहायक प्रोफेसर पदों पर संवैधानिक आरक्षण की अवहेलना। मोहन धारिया कमेटी की रिपोर्ट के सुझावों के अनुरूप प्रत्येक भूमिहीन को 5 एकड़ कृषि भूमि कब दी जाएगी। आरक्षण का सच ब्राहम्णों ने अंग्रेजी शासन में आरक्षण लिया। अनुसूचित जातियों और जनजातियों के सामाजिक व आर्थिक पिछड़ेपन के लिए भारतीय योजना आयोग व केन्द्र सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार। अनुसूचित जाति उप योजना और जनजाति उप योजना। सिर पर मैला ढोने वाले परिवारों का सम्मानजनक उद्यमों में पुर्नवास हो, के जरिए बहुजनों का उद्घार किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि लखनऊ में बहुजन स्वराज घोषणा पत्र 2019 को जारी करने के बाद अब राजनीतिक दलों को यह घोषणा पत्र भेजा जाएगा। जिसमें बहुजन हितों का दम भरने वाले दलों से गुहार लगाई जाएगी कि बहुजन स्वराज घोषणा के मुद्दों को शामिल करें। इसके साथ ही बहुजन स्वराज घोषणा पत्र 2019 के सभी मुद्दों के प्रति बहुजनों को जागृति करने के लिए समय-समय पर बैठकें, सम्मेलन आदि कार्यक्रम आहूत किए जाएंगे।

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