23 October, 2018

कारोबारियों के गले की फांस बना जीएसटी पोर्टल

GST portal, businessmen, Uttar pradesh
  • पोर्टल पर गोदाम का नया पता नहीं घोषित कर पा रहे 
  • एसआईबी के छापों के डर से माल मंगवाना किया बंद
  • पोर्टल की व्यवस्था से विभाग के अधिकारी भी परेशान

लखनऊ। जीएसटी पोर्टल की खामियों से व्यापारी ही नहीं विभाग के अधिकारी तक परेशान हैं। अब तो एक नयी समस्या खड़ी हो जाने से कारोबारियों पर एसआईबी के छापों की तलवार लटक गयी है। इसका समाधान न हो पाने से परेशान कारोबारी विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। वहीं बहुत से कारोबारियों ने तो गोदाम में रखने के लिए प्रान्त बाहर से माल मंगवाना ही बन्द कर दिया है।पहली जुलाई को जीएसटी पोर्टल लागू करते समय जमीनी स्तर पर अध्यन न किये जाने का खामियाजा अब कारोबारी व वाणिज्य कर विभाग के अधिकारी भोग रहेहैं। सोमवार को मीराबाई मार्ग स्थित मंडल कार्यालय में दर्जनों कारोबारी भटकते नजर आए।

नियम यह है कि कारोबारी को अपनी फर्म का कार्यालय व गोदाम विभाग में घोषित करना होता है। अगर कोई कारोबारी विभाग में बिना गोदाम घोषित किये ही माल मंगवाकर किसी स्थान पर रखता है तो इसे टैक्सचोरी का माल मानते हुए विभाग की विशेष जांच टीम ( एसआईबी) को ये अधिकार है कि वह उस माल पर टैक्स व जुर्माना जमा करता। अगर कारोबारी जुर्माना व टैक्स नही जमा करता है, तो एसआईबी के अधिकारी माल समेत गोदाम को सील कर सकते हैं, इसलिए कारोबारी गोदाम य कार्यालय बदलने से पहले विभाग में इसका संशोधन कराते थे। जीएसटी पोर्टल में गोदाम के पते का संशोधन किये जाने का कालम नहीं बना है। इसके चलते जिन कारोबारियों को अपने कार्यालय व गोदाम के पते बदलने है, वे बिना ऑन-लाइन संशोधन गोदाम बदलने से घब रहा है, क्योंकि उनके द्वारा ई-वे-बिल के जरिए भी माल मंगवाकर अघोषित गोदाम में रखते ही (एसआईबी) टीम का छापा- मारना तय है।

समस्या यह भी है कि कारोबारियों द्वारा सीधे खण्ड अधिकारी को लिखित पत्र देकर गोदाम बदलने की जानकारी दी तो एसआईबी के छापे के दौरान उनके इस पत्र को विभाग मानेगा भी यह नहीं इसको लेकर भी अधिकारियों व कारोबारियों में दुविधा की स्थिति बनी हुई है। वहीं विभाग के अधिकारी भी जीएसटी पोर्टल को लेकर बेहद परेशान हैं, सेक्टर अफसरों पर मुख्यालय स्तर पर कारोबारियों से हर माह की खरीद बिक्री का रिटर्न दाखिल कराने का दबाव तो बनाया जा रहा है, लेकिन किन- किन कारोबारियों ने रिटर्न नहीं दाखिल किया है। इसकी सूची उनके लॉगिंन पर आ ही नहीं रही है। अभी तक तो सेक्टर अफसरों को यह तक नहीं पता था कि उनके नियंतण्रमें कौन कौन से कारोबारी आते हैं जिनसे उन्होंने रिटर्न दाखिल कराना है।

rgautamlko@gmail.com

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