18 February, 2019

रजिस्ट्रार की सख्त कार्रवाई का दावा खोखला

  • नोटिस की मियाद खत्म, लेकिन नहीं हो रही कार्रवाई
  • किट बेचने व ज्यादा फीस वसूलने की जांच भी नहीं हुई पूरी

लखनऊ। लखनऊ विविद्यालय के बार बार कहने के बाद भी राजधानी के दर्जनों डिग्री कालेज उनकी बात नहीं मानते और मांगी गयी जानकारी भी नहीं देते। दरअसल कई वर्षो से कार्रवाई के मामले में लविवि के ढुलमुल रवैय्ये के चलते डिग्री कालेजों को कोई डर नहीं रह गया है। बीते एक वर्षो की बात करें तो राजेन्द्र प्रसाद डिग्री कालेज, रजत गर्ल्स कालेज व सिटी लॉ कालेज ने भी मिले नोटिस का कोई सटीक उत्तर नहीं दिया। हालांकि आईटी.कालेज एक अपवाद रहा, जिस पर बीएड सीटों में घोटाला करने पर सख्त कार्रवाई की गयी। लविवि रजिस्ट्रार एस.के.शुक्ला ने एक बार फिर विवि से सम्बद्ध करीब 32 डिग्री कालेजों को उनकी सम्बद्धता, छात्र संख्या और संसाधनों की जानकारी पन्द्रह दिनों में देने को लेकर नोटिस भेजा है। यह नोटिस कई बार भेजे जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद कई मनबढ़ कालेज नोटिसों का जवाब ही नहीं दे रहे हैं। विवि प्रशासन ने सख्त रूख अपनाते हुए इन कालेजों को एक बार फिर नोटिस जारी किया है। प्रशासन का कहना है कि कालेजों ने 15 दिनों के भीतर विवि के डाटा र्रिसोस सेंटर को जानकारी उपलब्ध नहीं कराई तो इनकी सम्बद्धता को समाप्त कर दिया जाएगा। साथ ही नए सत्र से कालेज में चलने वाले कोसोर्ं के संचालन पर रोक भी लगा दी जाएगी।

हालांकि इस ‘‘बंदर घुड़की’ से ढीठ डिग्री कालेज डरते नहीं है। कालेजों में नकल के मामले हों, या छात्राओं से ज्यादा फीस वसूलने की घटना हो, सभी में विवि द्वारा नोटिसें दी जाती हैं, लेकिन कालेजों के मैनेजर विवि में तेजी से फैली ‘‘लिफाफा’ संस्कृति के चलते इसका ‘‘नोटिस’ तक नहीं लेते। यही कारण रहा कि करीब एक वर्ष पहले राजाजीपुरम के डा.राजेन्द्र प्रसाद डिग्री कालेज में छात्राओं ने जब शिकायत की कि उनके यहां पर ग्यारह-ग्यारह हजार Rs की किटें मनमाने व अवैध ढंग से बेची जा रही हैं, जिसके बाद लविवि ने उक्त कालेज को नोटिस तो दी, लेकिन कार्रवाई नहीं की। जिसका खामियाजा उन छात्राओं को भुगतना पड़ा, जिन्होंने शिकायत की थी। कालेज प्रबन्धन ने उन छात्राओं को कई प्रकार से परेशान किया, जिसके चलते वे कोर्स ही छोड़कर घर बैठ गयीं। कुछ ऐसा ही मामला फैजाबाद रोड स्थित रजत गर्ल्स कालेज का भी रहा, जहां पर छात्रों से विवि के फी स्ट्रक्चर को गलत बयानी करते हुए ज्यादा पैसे वसूले। जब दर्जनों छात्रों ने विवि आकर प्रदर्शन किया और इसे समाचार पत्रों ने प्रमुखता से छापा तो लविवि ने नोटिस तो भेजी, लेकिन कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। ठीक इसी तरह लविवि से ही सम्बद्ध सिटी लॉ कालेज में भी कई प्रकार की अनियमितता मिली, लेकिन विवि ने नोटिस भेजकर ही वाहवाही लूट ली। कभी भी कालेज प्रशासन पर सख्त कार्रवाई नहीं की।

शायद यही कारण रहा कि लविवि का डाटा रिसरेस सेन्टर हो या रजिस्ट्रार कार्यालय, नोटिस पर नोटिस देता रहता है, लेकिन डिग्री कालेजों के कान पर जूं तक नहीं रेंगता। कौन कौन से हैं विवि से सम्बद्ध कालेज : नकल के लिए बदनाम रहे राधेश्याम डिग्री कालेज, बीएड में तय सीट से अधिक सीटों पर एडमिशन करने के लिए चर्चित महावीर प्रसाद महिला महाविद्यालय के साथ ही रामा कांवेंट महाविद्यालय, राम दुलारी आलोक कुमार महिला कालेज, आरडीएसजे कालेज ऑफ मैनेजमेंट, वनस्थली ज्ञानपीठ गर्ल्स डिग्री कालेज, प्रबुद्ध मेडिकल कालेज एंड रिसर्च सेंटर, इंस्टीटय़ूट ऑफ आयुष मेडिकल साइंसेज, श्री रामचंद्र वैद्य आयुव्रेदिक मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल, गीता लॉ कालेज, रेडियंट कॉलेज ऑफ लॉ, सरदार पटेल इंस्टीटय़ूट ऑफ आयुव्रेदिक मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर, विद्यांत हिंदू पीजी कालेज, कृष्णा देवी गर्ल्स डिग्री कालेज, नर्वदेश्वर लॉ कलेज, वीर बहादुर सिंह महिला महाविद्यालय व लखनऊ लॉ कालेज शामिल है। आईटी कालेज ही रहा अपवाद : लविवि से सम्बद्ध अकेले आईटी कालेज ही अपवाद रहा, जिस पर विवि के मौजूदा कुलपति ने सख्त कार्रवाई की। अन्यथा बड़े से बड़े घोटाले के बाद भी विवि से सम्बद्ध डिग्री कालेजों के खिलाफ जल्दी कार्रवाई नहीं होती। पिछले दिनों आईटी कालेज में बीएड के एडमिशन में तय सीटों से इतर तथा अपने हिसाब से सीटें भरने, विवि के संयुक्त प्रवेश परीक्षा द्वारा चुने गये छात्राओं के एडमिशन न करने, शिक्षकों की गिनती व अन्य चीजें न बताने सहित कई मामलों का भंडाफोड़ हुआ। जिसके बाद लविवि ने न केवल बीएड छात्राओं की परीक्षाएं रोक दीं बल्कि कई अन्य प्रकार की भी रोक लगा दी। जिसके बाद आईटी कालेज हाईकोर्ट पहुंचा, लेकिन वहां से उसे फौरी राहत तो मिली, लेकिन अन्तत: लविवि की ही जीत हुई।

rgautamlko@gmail.com

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