17 August, 2018

स्वास्थ्य सुरक्षा से ही होगा वास्तविक विकास

ramakant

लखनऊ। यदि 70 प्रतिशत मृत्यु उन कारणों से हो रही हो, जिनसे बचाव मुमकिन है तो निःसंदेह यह स्वास्थ्य सुरक्षा में बहुत बड़ी चूक है। 70 प्रतिशत असामयिक मृत्यु का कारण गैर संक्रामक रोग है। हृदय रोग, पक्षाघात, कैंसर, मधुमेह, दीर्घकालिक श्वास सम्बन्धी रोग, आदि से अक्सर बचाव मुमकिन है। इनका समय पर जांच और इलाज भी संभव है। यदि गैर संक्रामक रोगों को अनदेखा किया जायेगा तो यह प्रदेश-देश के विकास को चुनौती देगा।

 

यह बातें शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग में आयोजित प्रशिक्षण सभा के दौरान केजीएमयू के पूर्व सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. रमाकान्त ने कही। कार्यक्रम का आयोजन आशा परिवार, पापुलेशन फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया, फॅमिली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया व लखनऊ विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के तत्वाधान में किया गया। 

 

प्रो. रमाकान्त ने कहा कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति और संयुक्त राष्ट्र ने वादा किया है कि 2025 तक गैर संक्रामक रोगों से होने वाली मृत्यु दर में 25 प्रतिशत की गिरावट आएगी। हर जिले स्तर पर यह निगरानी जरुरी है कि गैर संक्रामक रोगों से होने वाली मृत्यु दर में बढ़ोतरी हो रही है या गिरवाट आ रही है? ध्यान देना होगा कि क्या प्रदेश और देश में इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सचेत है? सरकारों को चाहिये कि तम्बाकू नियंत्रण सख्ती से लागू हो, शराब और नमक खपत कम हो, शारीरिक व्यायाम के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिये जनजागरण का कार्य किया जाना चाहिये। 

 

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और विकास के लिए तम्बाकू एक बड़ी बाधा है जो कि लोगों को मारने के साथ-साथ देश पर पैसों का बोझ भी बढ़ाती है। स्वास्थ्य मंत्रालय के द्वारा 2014 में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2011 में तम्बाकू जनित बीमारियों से 35-69 साल के उम्र के लोगों पर 104500 करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ आया, जिसमे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष मेडिकल खर्च भी शामिल है। उत्तर प्रदेश के विकास के लिए प्रभावी तम्बाकू नियंत्रण कदम बहुत ही आवश्यक है, क्योंकि देश में तम्बाकू जनित बिमारियों के कारण पड़ने वाले कुल आर्थिक दण्ड का 28 प्रतिशत भाग उत्तर प्रदेश से ही आता है।

 

प्रो. रमाकान्त ने बताया कि तम्बाकू उद्योग युवाओं को गुमराह करती है व उन्हें तम्बाकू के प्रलोभन में फसाती है। देश में 5500 युवा हर दिन तम्बाकू उत्पादों के उपयोग की शुरुवात करते हैं। तम्बाकू, सिगरेट, सिगार, हुक्का, आदि को जलाने पर निकालने वाला धुआं अत्यधिक खतरनाक है, जिससे जानलेवा बीमारियां उत्पन्न होती हैं। हृदयरोग, श्वास संबंधी रोग, और फेफड़े का कैंसर तक होने का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है। नवजात शिशु की मृत्यु का भी यह एक कारण है। गर्भावस्था में महिलाओं के द्वारा किया गये धूम्रपान के कारण नवजात शिशु का कम वज़न होने का खतरा बढ़ जाता है। लगभग 50 प्रतिशत बच्चे परोक्ष रुप में धूम्रपान से पीड़ित होते हैं।

 

मधुमेह पर जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि लोगों के सामने मधुमेह बड़ी चुनौती है। ‘मधुमेही पांव’ से अक्सर मधुमेहिओं को अपना एक या दोनों पैर गंवाना पड़ता है। भारत में 50,000 लोगों को प्रतिवर्ष मधुमेह के कारणवश पैर गवाना पड़ता है। चिंता की बात यह भी है कि इनमें से 75 प्रतिशत पैर बचाए जा सकते थे। सरकार यदि सतत विकास चाहती है तो स्वास्थ्य सुरक्षा अत्यंत जरुरी है। सामाजिक और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के लिए शहरी विकास योजना को पुनरीक्षित करना जरुरी है, जिससे कि शहर सबके लिए स्वस्थ बने।

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