16 December, 2018

निर्माणाधीन पोलवरम परियोजना के खिलाफ याचिका पर सुनवाई तीन दिन टली

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश में निर्माणाधीन पोलावरम बहुउद्देशीय परियोजना के खिलाफ ओडिशा सरकार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई तीन दिनों के लिए टाल दी है। सुप्रीम कोर्ट को यह सूचित किया गया कि इस मसले पर केंद्रीय जल आयोग विचार करेगा। मंगलवार को सुनवाई के दौरान वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा कि इस मामले में विवाद केवल प्रोजेक्ट की क्षमता और उसकी विशिष्टता को लेकर है, जिसके बारे में पहले बताया जा चुका है।

 

पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में संबंधित पक्षों के बीच सहमति के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। सुनवाई के दौरान ओडिशा सरकार ने कहा था कि केंद्र सरकार ने संबंधित छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक ही नहीं बुलाई है। केंद्र सरकार इस मामले के समाधान के लिए लिखे गए उसके पत्र का कोई जवाब भी नहीं दिया है। 07 नवंबर,2017 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जवाब नहीं दाखिल करने पर केंद्र सरकार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। कोर्ट ने केंद्र और आंध्रप्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

 

आंधप्रदेश के विभाजन तथा पोलावरम प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा मिलने के बाद ओडिशा सरकार ने यह याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि इस परियोजना से ओड़िशा का मलकानगिरी जिले का करीब छह हजार और छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के करीब 07 हजार हेक्टेयर भू-भाग के डूबने की आंशका है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 28 हजार करोड़ रुपये है।

 

याचिका में कहा गया है कि आंध्रप्रदेश समझौते का उल्लंघन कर परियोजना का निर्माण कर रहा है। आंध्रप्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के पोलावरम ब्लॉक के अंतर्गत गोदावरी नदी पर पापीकुंडलू ग्राम के नजदीक निर्माणाधीन पोलावरम परियोजना के बांध के पानी से सीधे तौर पर सुकमा और मलकानगिरी का क्षेत्र नहीं डूबेगा। बल्कि सुकमा में गोदावरी की सहायक नदी सबरी और मलकानगिरी में सिलेरू नदियों और उसके सहायक नदी-नालों में बांध के बैक से डूब क्षेत्र बनेगा। 

rgautamlko@gmail.com

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