20 June, 2018

ईमानदारों पर गाज, भ्रष्ट पर नाज

एम.एम. सरोज
लखनऊ। अगर आप किसी सरकारी विभाग के मुखिया हैं, और विभाग को नियमों को ताक पर रखकर अपने इशारों पर चलाना चाहते हैं तो इसका प्रशिक्षण आप खेल विभाग के निदेशक से ले सकते हैं। अगर आपके विभाग में ईमानदार अफसर हैं, तो उस पर नकेल लगाने के लिए खुरापात करने के फार्मूला को भी सीख सकते हैं। खेल के विकास के नाम पर करोड़ों का बजट हजम करने की कला और खेल अफसरों पर नकेल लगाने के लिए फर्जी शिकायतों का ऐसा मजबूत जाल बुनते हैं कि जांच के नाम पर अफसर जल बिन मछली की तरह छटपटाते हैं। खेल निदेशक के कारनामों से अजिज कई अफसरों ने मुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव खेल निदेशक से शिकायत की है। लेकिन खेल निदेशक अपने मैनेजमेंट के बल पर जहां मंत्री और अपर मुख्य सचिव खेल को मोहित कर रखा है वहीं शिकायतों को ठंडे बस्ते में फिंकवा दिया है।
उल्लेखनीय है कि खेल निदेशक डा. राम प्रकाश सिंह पूर्ववर्ती सरकार में भ्रष्टचार के आरोप में निलम्बित हो चुके हैं। लेकिन अपने जोड़-तोड़ और दंद-फंद के माहिर खिलाड़ी होने की वजह से जहां खेल निदेशक का पद भी हासिल कर लिया है वहीं अपने खिलाफ होने वाली घपलों की शिकायतों को भी दबवा रखा है।
खेल विभाग के सूत्रों का कहना है कि खेल निदेशक डा. राम प्रकाश सिंह ने अपने अधीनस्थ अफसरों और कर्मचारियों को काबू में करने के लिए अनूठा फार्मूला निकाला है। फार्मूले के तहत पहले उस अफसर और कर्मचारी की फर्जी शिकायत करवाई जाती है, जिसको काबू में करना होता है। शिकायतकर्ता से बगैर कोई शपथ पत्र लिए जांच बिठाकर उस अफसर को दोषी भी ठहरवा दिया जाता है। अफसर अपने खिलाफ कार्रवाई होने के डर से चुपचाप खेल निदेशक को वे सब मौखिक आदेश मानने को मजबूर हो जाते हैं। बगैर कोई निर्माण और खेल उपकरण में खरीद के भुगतान के लिए दबाव बनाया जाता है। इस तरह के अनूठे फार्मूलेे में अधिकतर खेल अफसर फंसे हुए हैं। क्रीडा अधिकारी रानी प्रकाश ने खेल निदेशक द्वारा किए जाने रहे अपने साथ अन्याय को लेकर एक पत्र मुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव खेल मोहम्मद इफ्तेखारूद्दीन को लिख कर अवगत कराया है। साथ ही जांच की मांग की है। खेल अफसर मुद्रिका पाठक को खेल निदेशक ने इस बात का आरोपी बनाया कि आरटीआई से सूचनाएं मांगने से खेल विभाग की बदनामी होती है। इसी तरह खेल अफसर अनीता कनौजिया को भी फर्जी शिकायत करवाकर दबाव में लाने का खेल किया जा रहा है। ईमानदारी से नौकरी करने वाले अफसरों को प्रताडि़त करने के लिए जानबूझ कर ऐसी जगह तबादला किया जाता है, जिससे अफसरों का मनोबल टूटे। भ्रष्टïाचार को स्वीकार करने वाले अफसरों को खेल निदेशक नियमों को ताक पर रखकर मलाईदार पदों पर तैनात करते हैं। खेल विभाग के अफसरों का कहना है कि अगर निष्पक्ष जांच हो जाए तो खेल विभाग में बहुत बड़े-बड़े घपलों का खुलासा होगा।
खेल निदेशक डा. राम प्रकाश सिंह ने कहा कि विभाग के कुछ विरोधी अफसर उनके खिलाफ मंतगढ़ंत शिकायतें करवा रहे हैं। वे पूरी ईमानदारी और निष्ठïा से अपने दायित्वों का निर्वाहन कर रहे हैं। अपर मुख्य सचिव खेल मोहम्मद इफ्तेखारूद्दीन ने कहा कि उनके पास खेल निदेशक को लेकर कुछ शिकायतें आई हैं। जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच के बाद ही कोई कार्रवाई संभव है।

rgautamlko@gmail.com

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