18 July, 2018

मुख्य सचिव की एक चूक से IAS-IPS आमने-सामने !

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  • कप्तान नहीं, डीएम लेंगे क्राइम मीटिंग
  • समय-समय पर डीएम को देनी होगी अपराधों की जानकारी
  • आईपीएस अफसरों का मानना है कि उनके अधिकारों में हो रही कटौती

एम.एम. सरोज

लखनऊ। प्रदेश के जिलाधिकारियों को अब अपने जिलों में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने को क्राइम मीटिंग करना होगा। रविवार को मुख्य सचिव राजीव कुमार ने आदेश जारी किया है। यह आदेश सभी जिलाधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व पुलिस अधीक्षकों को शीघ्र ही मिल जाएगा। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होने वाली क्राइम मीटिंग में एसएसपी और एसपी की उपस्थिति अनिवार्य होगी। इतना ही नहीं, पूछे गये सवालों का जवाब भी देना होगा। हालांकि नियमानुसार जिलाधिकारी ही क्राइम मीटिंग करता है, परन्तु पुलिस अधिकारियों द्वारा किये जाने की परम्परा चली आ रही है।

मुख्य सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार थानाध्यक्षों की तैनाती में अब किसी तरह की औपचारिकता नहीं की जा सकेगी। थानाध्यक्षों की तैनाती कानूनन जिलाधिकारियों द्वारा की जाती है, परन्तु वर्षो से चली आ रही परिपाटी के अनुसार एसएसपी व एसपी स्वयं निर्णय लेकर जिलाधिकारियों से औपचारिक आदेश करवा लेते थे। उच्चाधिकारियों ने बताया कि जिले की पुलिस को अब हर समय कानून-व्यवस्था को लेकर सजग रहना होगा। किसी तरह की हीलाहवाली नहीं चलेगी। जिले में हो रहे अपराधों की जानकारी समय-समय पर जिलाधिकारी को अवगत कराना होगा। क्राइम की बैठकों में भी चली आ रही पुरानी परिपाटी को समाप्त कर नयापन लाना होगा।

आईपीएस अधिकारियों का मानना है कि उनके अधिकार में राज्य सरकार द्वारा कटौती की जा रही है। मुख्य सचिव राजीव कुमार द्वारा जारी आदेश के बाद प्रदेश के आईपीएस एसोसिएशन में खुसुर-फुसुर शुरू हो गयी है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल बनाकर मुख्य सचिव से वार्ता करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि शासन के अधिकारियों ने इस संबंध में अधिकारियों ने कोई भी जानकारी होने से इंकार कर दिया।

rgautamlko@gmail.com

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