19 October, 2018

भ्रष्टाचार की नई-नई गाथाएँ रच रहे हैं IAS महेश गुप्ता

Secretariat administration department
  •  सचिवालय प्रशासन विभाग में उड़ रही हैं तबादला नीति की जमकर धज्जियाँ 
  • प्रमुख सचिव के कारनामों का सचिवालय संघ कर रहा है विरोध 

लखनऊ। भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात वरिष्ठ आईएएस महेश गुप्ता ने सचिवालय की तबादला नीति को कमाने-खाने का माध्यम बना लिया है, तभी तो मंत्रियों व आईएएस अधिकारियों की पसंद से योगी सरकार की सचिवालय की तबादला नीति की जमकर धज्जियाँ उडाई जा रही हैं। ज्यादातर मंत्री व अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव व सचिव स्तर के अधिकारी चाहते हैं कि पसंदीदा विभागों में उनकी पसंद के ही सचिवालय सेवा के अधिकारी तैनात रहें। यही वजह है कि सचिवालय में तबादला नीति परवान नहीं चढ़ रही है। जबकि सचिवालय संघ ने प्रमुख सचिव के द्वारा तबादला नीति की पिक एंड चूज का विरोध किया है।

बताते चलें कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे वरिष्ठ आईएएस महेश गुप्ता पूर्ववर्ती सरकारों में भी मलाई दार पदों पर तैनात रहे हैं। योगी सरकार में जोड़ तोड़ कर प्रमुख सचिव विकलांग, पिछड़ा वर्ग और सचिवालय प्रशासन विभाग हासिल कर लिया है। ऐसे एक नहीं अनेक उदाहरण हैं। कुछ अधिकारी खुद ही मलाईदार पदों की चाहत में मंत्रियों और अफसरों से दबाव बनवाते हैं। यह स्थिति तब है जब लखनऊ में सचिवालय भवनों को छोड़कर उन्हें कहीं और नहीं जाना है।

सचिवालय प्रशासन विभाग के उप सचिव बीके सिंह का तबादला होने के बाद भी वह कार्यमुक्त नहीं हुए। मुख्यमंत्री कार्यालय से स्थानांतरित उप सचिव हरिमोहन झा और राम विशाल गुप्ता ने अपने-अपने तबादले निरस्त करवा लिए हैं। समग्र ग्राम विकास से वित्त में स्थानांतरित पवित्र कुमार सिंह ने भी तबादला विशेष कारण से डेढ़ माह स्थगित करा लिया है। आबकारी में वर्षों से जमे विनोद तिवारी मुख्यमंत्री कार्यालय जैसी जगह तैनाती होने के बावजूद किसी अन्य विभाग में जाने की कोशिश में हैं। सतर्कता से हटे एक अनुभाग अधिकारी को रोकने के लिए पत्र आ गया है। 13 अनुसचिवों और नौ उप सचिवों ने नए विभाग में ज्वाइन नहीं किया है।

बजट सत्र व तबादला सत्र के नाम पर कुछ समय के लिए मोहलत लेने वाले ज्यादातर अधिकारी भी पुराने विभागों से चिपके हैं। अनुभाग अधिकारियों में भी जिनको अच्छा विभाग नहीं मिला है, वे जुगाड़ में घूम रहे हैं। संयुक्त सचिव, उप सचिव और अनु सचिवों की भी यही स्थिति है। बहरहाल, तबादलों का अगला नंबर समीक्षा अधिकारी संवर्ग का है। इनकी कुल काडर संख्या-2014 है जिसमें से करीब 400 तबादला नीति के तहत आ रहे हैं। इनके बाद सहायक समीक्षा अधिकारियों का नंबर है। क्या कहती है तबादला नीति तबादला नीति कहती है कि अनुभाग अधिकारियों, समीक्षा अधिकारियों को पांच साल, सहायक समीक्षा अधिकारियों को सात साल और विशेष सचिव, संयुक्त सचिव, उप सचिव और अनु सचिव को तीन साल एक विभाग में रहने के बाद स्थानांतरित कर देना चाहिए।

सचिवालय प्रशासन विभाग के सूत्रों का कहना है कि प्रमुख सचिव महेश गुप्ता ने अपने एक सजातीय PS के जरिये सचिवालय के भ्रष्ट बाबूओं की मलाईदार पदों पर तैनाती की जा रही है। इस खेल का माहिर खिलाडी सचिवालय प्रशासन विभाग के उप सचिव बीके सिंह पूरी निष्ठां से काम कर रहा है। सचिवालय संघ के सचिव ओंकार नाथ तिवारी ने बताया कि प्रमुख सचिव महेश गुप्ता द्वारा काफी गलत कार्य किये जा रहे हैं, जिसका समय समय पर विरोध किया जाता है। सचिवालय प्रशासन विभाग के उप सचिव बीके सिंह और प्रमुख सचिव महेश गुप्ता ने इस संबंध में को भी प्रतिकिरया देने से मना कर दिया।

rgautamlko@gmail.com

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