20 January, 2018

सचिवालय के नटवरलाल बाबुओं पर IAS महेश गुप्ता मेहरबान

Secretariat administration department

लखनऊ। सचिवालय के समीक्षा अधिकारियों की तबादला सूची सिफारिशों के चक्रव्यूह में फंस गई है। सूत्रों के अनुसार सचिवालय प्रशासन विभाग के अधिकारियों के पास मंत्रियों और अफसरों की इतनी सिफारिशें आ रही हैं कि फिलहाल उन्होंने समीक्षा और सहायक समीक्षा अधिकारियों के तबादले का ख्याल ही छोड़ दिया है।

यह बात दीगर है कि इसके पीछे सचिवालय प्रशासन के अधिकारियों का तर्क है कि सचिवालय की तबादला नीति के तहत उन्होंने विशेष सचिव, संयुक्त सचिव, उप सचिव, अनुसचिव और अनुभाग अधिकारियों के तबादले किए हैं। इसलिए एक साथ विभागों में सभी अफसरों को हटाना ठीक नहीं होगा। इससे कामकाज प्रभावित हो सकता है। इसलिए वे एक या दो माह बाद समीक्षा अधिकारियों और सहायक समीक्षा अधिकारियों के तबादले करेंगे। हालांकि यह तर्क ज्यादातर लोगों के गले नहीं उतर रहा है।

सचिवालय की तबादला नीति दो मई को जारी हुई थी। इस तरह तबादला नीति को जारी हुए तीन माह से ज्यादा का समय गुजर चुका है लेकिन समीक्षा अधिकारियों और सहायक समीक्षा अधिकारियों के तबादले जारी नहीं हो सके हैं। चर्चा है कि मलाईदार विभागों में जमे समीक्षा अधिकारी फिर से ऐसे ही विभागों में जाने की जुगाड़ भिड़ाने में जुटे हैं। सचिवालय का सबसे बड़ा संवर्ग समीक्षा अधिकारियों का ही है यानी समीक्षा अधिकारियों की कुल संख्या 2,014 है। सहायक समीक्षा अधिकारी 810 हैं।

तबादला नीति के हिसाब से समीक्षा अधिकारी एक विभाग में पांच साल और सहायक समीक्षा अधिकारी सात साल रह सकते हैं। इस तरह करीब 400 समीक्षा अधिकारी और 100 सहायक समीक्षा अधिकारी तबादला नीति के दायरे में आ रहे हैं। स्वाभाविक है, इनकी तबादला सूची के जारी होने से पूरे सचिवालय में खलबली मचेगी।

एक वरिष्ठ अधिकारी तर्क देते हैं कि सचिवालय में तबादलों की कोई अंतिम तारीख नहीं होती। इसलिए पूरे साल तबादले होते रहने चाहिए। जिस का जिस दिन तबादला नीति के हिसाब से समय पूरा हो जाए, उसको वहां से स्थानांतरित कर देना चाहिए। क्योंकि उनको शहर के बाहर नहीं जाना है। घूम-फिरकर पूरा सेवाकाल लखनऊ के सचिवालय भवनों में ही गुजारना है। केवल कार्यालय ही बदलना है।

rgautamlko@gmail.com

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