19 November, 2018

एलडीए में ‘प्रभु’ के बजाए भ्रष्टों का राज

LDA, corruption, 'VC Prabhu Narayan Singh'

त्रिनाथ के. शर्मा

लखनऊ। हम नहीं सुधरेंगे, चाहे सुधारने के जितने भी प्रयास किए जाएं। आकंठ भ्रष्टाचार तक डूबे लखनऊ विकास प्राधिकरण में ईमानदारी का तमगा लटकाए उपाध्यक्ष महोदय ने एलडीए की भ्रष्टï कार्यशैली में नाम मात्र बदलाव न ही कर पाए और न तो अवैध निर्माण पर अंकुश लगा पाए। निष्पक्षता और ईमानदारी का ढिंढोरा पीटने वाले वीसी प्रभु नारायण सिंह के राज में एलडीए जनसूचना के उन सवालों से चकरा गया है जिनका सरोकार सीधा जनता से है। शहर में अवैध निर्माणों को लेकर नोटिस और निस्तारण के खेल की पोल खुलने के डर से एलडीए ने सूचनाएं न देने के लिए पहले बहाना बनाया कि सूचनाएं अत्यंत वृहद हैं, इस वजह से नहीं दी जा सकती हैं। प्रथम अपील के बाद अपने कारनामों को छिपाने के लिए अब जवाब दिया कि सूचनाओं के प्रकटीकरण से न्यायालय और अधिकरण की अवमानना होती है, ऐसी स्थिति में आपको सूचना दिया जाना संभव नहीं है। इससे एलडीए की भ्रष्टï कार्यशैली की पोल खुल रही है।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष अप्रैल 2017 में योगी सरकार ने प्रभु नारायण सिंह को एलडीए का वीसी इसलिए बनाया था कि एलडीए से भ्रष्टïाचार खत्म कर शहर को अवैध कब्जों से  मुक्ति दिलाएंगे। साथ ही पूर्व एलडीए वीसी सतेन्द्र सिंह यादव के काले कारनामों को उजागर करके जांच करवाएंगे। पद ग्रहण करने के बाद एलडीए वीसी प्रभु नारायण सिंह ने दावा किया था कि जेपीएनआईसी, जनेश्वर मिश्र पार्क और हुसैनाबाद पार्क में हुई फिजूल खर्ची की जांच कराएंगे। छोटे कामों से लेकर हो रहे निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार को रोकना, ई गवर्नेंस के न्यूनतम उपयोग को बढ़ाकर अधिकतम करना, दो दर्जन से अधिक कालोनियों को नगर निगम को ट्रांसफर कराना तथा 400 से अधिक अवैध कॉलोनी और 5 लाख अवैध निर्माण को नियमित करने का दावा किया था।

एलडीए वीसी के दावों की पड़ताल करने के लिए निष्पक्ष दिव्य संदेश ने 18 अगस्त 2018 को जनूसचना अधिनियम के तहत पांच बिन्दुओं के तहत आवेदन किया था। इन सवालों ने एलडीए को इतना बेचैन कर दिया है कि सूचनाएं छिपाने के लिए एलडीए के अधिशासी अभियंता प्रर्वतन जोन एक ने पत्र भेजकर असमर्थता जताई कि मांगी गई सूचनाएं अत्यंत वृहद हैं, किसी विशेष भवन भूखण्ड के संबंध में आवश्कता हो तो सूचनाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इस पर प्रथम अपील करते हुए दुबारा सूचनाएं मांगी गई। जिस पर एलडीए ने जनसूचना अधिनियम की धारा 8 ख का हवाला देते हुए कहा कि न्यायालय और अधिकरण द्वारा स्पष्टï मनाही है कि सूचनाएं न दी जाए। इससे न्यायालय की अवमानना होती है। यह भी सवाल खड़ा किया गया कि मांगी गई सूचनाएं जनसामान्य को लाभांवित नहीं करेंगी। इसके साथ ही सूचना अधिनियम की धारा 6 (1) का उदाहरण देते हुए कहा है कि विस्तृत सूचनाएं मांगने से शासकीय कार्य अवरूद्घ होते हैं।
एलडीए सूत्रों का कहना है कि मांगी गई सूचनाओं से ट्रांस गोमती और सिस ट्रांस गोमती में अवैध निर्माणों पर अंकुश लगाने के लिए एलडीए ने काफी संख्या में नोटिस भेजे। नोटिस भेजने के बाद सेटिंग-गेटिंग करके अधिकतर अवैध निर्माणों की ओर एलडीए ने आंख मूंद ली है। जबकि दिखावे के लिए कुछ जगहों पर मात्र ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की है। मांगी गई सूचनाओं से एलडीए की पोल पट्टïी खुल रही है। यही वजह है कि एलडीए के भ्रष्टï अफसर सूचनाएं सार्वजनिक करने से परहेज कर रहे हैं। सरकार के चहेते अफसरों में शुमार एलडीए वीसी प्रभु नारायण सिंह शहर को सुंदर बनाने और अवैध निर्माणों पर अंकुश लगाने में पूरी तरह से फेल और फ्लाप हो गए हैं। अपने कारनामों को छिपाने के लिए एलडीए जनसूचना के तहत सूचनाएं उपलब्ध कराने से परहेज कर रहा है। इस संबंध में   एलडीए वीसी प्रभु नारायण सिंह से सम्पर्क किए जाने पर प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।
पांच सवाल खोल रहे हैं एलडीए की पोल
(1) मार्च 2017 से लेकर 18 सितम्बर 2018 तक उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 16 के तहत ट्रांस गोमती और सिस ट्रांस गोमती कितने आवंटियों को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने नोटिस जारी किया। 
(2) मार्च 2017 से लेकर 18 सितम्बर 2018 तक उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 27, 28 (1) व 28 (2) के तहत ट्रांस गोमती और सिस ट्रांस गोमती में कितने और कौन-कौन से प्रकरणों का लखनऊ विकास प्राधिकरण ने निक्षेप किया गया। 
(3) मार्च 2017 से लेकर 18 सितम्बर 2018 तक उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 27, 28 (1) व 28 (2) के तहत ट्रांस गोमती और सिस ट्रांस गोमती में कितने प्रकरण लखनऊ विकास प्राधिकरण में लम्बित और विचाराधीन हैं। 
(4) मार्च 2017 से लेकर 18 सितम्बर 2018 तक उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 27, 28 (1) व 28 (2) के तहत ट्रांस गोमती और सिस ट्रांस गोमती में कितने प्रकरणों में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने ध्वस्तीकरण आदेश पारित किया। 
(5) मार्च 2017 से लेकर 18 सितम्बर 2018 तक उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 27, 28 (1) व 28 (2) के तहत ट्रांस गोमती और सिस ट्रांस गोमती में कितने प्रकरणों को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने निक्षेप किया। 

 

rgautamlko@gmail.com

Review overview
NO COMMENTS

POST A COMMENT