20 July, 2018

डायबिटीज का कैपिटल बन रहा है भारत

World diabetes day, India, capital of diabetes, Uttar Pradesh
  • विश्व मधुमेह दिवस 
  • गर्भावस्था में जरूर कराएं ब्लड शुगर की जांच 
  • डायबिटीज रोगियों की संख्या दो गुनी बढ़ी

लखनऊ। देश में पिछले पंद्रह वर्षो में डायबिटीज रोगियों की संख्या दो गुनी बढ़ी है। यदि काबू नहीं किया गया तो विश्व में डायबिटीज रोगियों की कैपिटल भारत बन सकता है। इसका मुख्य कारण हाई कैलोरी युक्त डाइट के साथ श्रम विहीन जीवन शैली अपनाना है। यह जनाकारी आरएसएसडीआई यूपी चैप्टर के सचिव एवं किंग जार्ज चिकित्सा विविद्यालय के प्रोफेसर नरसिंह वर्मा ने सोमवार को केजीएमयू में आयोजित प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि 14 नवम्बर को प्रत्येक वर्ष विश्व मधुमेह दिवस के रूप मे मनाते है, यह डब्लूएचओ व आईडीएफ द्वारा मान्यता प्राप्त मधुमेह दिवस है। इसका प्रस्ताव वर्ष बांग्ला देश द्वारा रखा गया था। 1991 से प्रत्येक वर्ष 14 नवम्बर को विश्व मधुमेह दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि लगभग 230 देशों मे यह दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष का शीर्षक वूमेन एण्ड डायबिटीज, अवर राइट टू हेल्थी फ्यूचर है।

World diabetes day, India, capital of diabetes, Uttar Pradeshपूरे विश्व में लगभग 200 मीलियन महिलाएं मधुमेह से ग्रसित है। प्रत्येक दस में से एक मधुमेह की रोगी है। इसके अतिरिक्त हर तीन में से दो महिलाएं मधुमेह से अपने प्रजनन काल में ग्रसित हो जाती है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है कि जिस शिशु को वह जन्म देती है उसे भी मधुमेह होने का खतरा बढ़ जाता हैं। पूरे विश्व में 425 मिलियन तथा भारत में लगभग 73 मिलियन लोगों को मधुमेह से पीड़ित हैं, इसमें उत्तर प्रदेश में मधुमेह का प्रसार लगभग 10 प्रतिशत और प्री डायबटीज लगभग 13 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किए अध्ययन के अनुसार लखनऊ, कानपुर तथा गाजियाबाद में मधुमेह का प्रकोप सबसे अधिक 14 से 17 प्रतिशत तथा देवरिया और फैजाबाद में 4 से 5 प्रतिशत सबसे कम है। प्रदेश में अध्ययन के अनुसार भयावह स्थिति यह है कि बड़ी संख्या में प्री डायबटीज की है, जिसे रोका जा सकता है। इसके लिए लोगों को फास्ट फूड छोड़कर श्रमयुक्त जीवन शैली अपनाने की जरूरत है। इस मौके पर नेशनल एक्सीक्यूटिव रिसर्च सोसाइटी फार डायबिटीज इन इण्डिया के डा. अनुज माहेश्वरी और क्वीनमेरी अस्पताल की डा. अमिता पाण्डेय ने विस्तार से डायबिटीज से बचाव के बारे में बताया। संतुलित जीवन के लिए चुने प्राकृतिक मार्ग 2030 तक मधुमेह विश्व में मृत्यु के लिए सबसे बड़ी वजह बन सकता है।

मधुमेह होने का कारण या तो शरीर निर्मित इंसुलिन के प्रभावशाली उपयोग में नाकाम होने से होता है या जब पेनक्रियाज इंसुलिन को पर्याप्त मात्रा में बनाने में असमर्थ होते हैं। यह जानकारी देते हुए डा. हरि प्रसाद ने बताया कि मधुमेह के बढ़ने से अन्य रोगों का जोखिम भी बढ़ जाता है इसलिए इस पर रोक या उपया करना जरूरी है। शारीरिक व्यायाम तथा संतुलित आहार के साथ एक स्वस्थ जीवनशैली से इस रोग से बचा जा सकता है। हर्बल सप्लीमेंट को भी नियमित रूप से लेने से मधुमेह को संतुलित किया जा सकता है। दि हिमालयन ड्रग के रिसर्च साइंटिस्ट डा. हरिप्रसाद ने बताया कि शारीरिक तथा मानसिक तौर पर सक्रिय रहने के अतिरिक्त यह भी आवश्यक है कि संतुलित आहार लिया जाये। करेला, मेशाशरिंगी जैसी औषधियां शर्करा की तृष्णा को रोकने तथा संतुलित करने में मदद करती हैं। करेला सामान्य ब्लड शुगर स्तर को सपोर्ट करता है जबकि मेशाशरिंगी शर्करा की तृष्णा को कम करती है।

मधुमेह ऐसा रोग है जो व्यक्ति के जीवनपर्यन्त तक रहता है। इसके लिए संतुलित जीवनशैली के साथ उपचार भी जरूरी है। यदि लापरवाही की तो शरीर के अलग-अलग हिस्सों को नुकसान पहुंचता है। डायबिटीज को लेकर सहारा हास्पिटल के विशेषज्ञ चिकित्सकों से बात की, इस बीमारी की गम्भीरता को रोकने का उपाय मिले। इंडोक्राइनोलॉजिस्ट व डायबिटोलॉजिस्ट डा. संतोष चौबे और डा. अण पाण्डेय ने बताया कि मधुमेह (डायबिटीज) होने पर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर सीधा असर होने लगता है। डायबिटीज रोगी को चाहिए कि वह समय-समय पर अपने चिकित्सक से परामर्श लेकर हेल्थ चेकअप करवाता रहे। वरना धीरे-धीरे अंग खराब होने लगते हैं। इसका सबसे बुरा असर आंखों पर पड़ता है। आंखों का ऑपरेशन होने के बाद डायबिटीज की वजह से घाव भरने में ज्यादा समय लगता है। यदि सर्जरी नहीं हुई तो मोतियाबिंद, पलकों में संक्रमण, डायबिटिक रेटिनोपैथी और ग्लूकोमा होने की आशंका रहती है। उन्होंने बताया कि मधुमेह रोगियों की संख्या जिस तरह से भारत में बढ़ रही है उससे लगता है भविष्य में भारत विश्व का डायबिटीज कैपिटल बन सकता है।

मधुमेह रोगियों में या तो खून में ग्लूकोज की मात्रा आवश्यकता से अधिक हो जाती है या शरीर में पर्याप्त मात्रा में इन्सुलिन पैदा नहीं होता है। यदि ग्लूकोज का बढ़ा हुआ लेवल खून में लगातार बना रहे तो वह शरीर के अंग प्रत्यंगों को नुकसान पहुंचाता है। यही मधुमेह को गंभीर बीमारी में तब्दील करता है। आम लोगों की तुलना में मधुमेह रोगियों में ह्यदयघात, उच्चरक्त चाप व ब्रेन स्ट्रोक होने की आशंका अधिक रहती है। इंडोक्राइनोलॉजिस्ट व डायबिटोलॉजिस्ट डा. संतोष चौबे और डॉ.अण पाण्डेय बताते हैं कि डायबिटीज रोगियों को सबसे अधिक खतरा डायबिटीक फुट यानी पैरों के अल्सर का होता है। यह बीमारी मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों को ही होती है। इसकी मुख्य वजह पैर का सुन्न हो जाना है, इससे पैरों में चोट लगने या आग से जलने पर रोगी को पता नहीं लगता। मधुमेह की वजह से घाव भरने की क्षमता कम हो जाती है। लगभग 25 प्रतिशत लोगों की बीमारी इतनी बढ़ जाती है कि पैर काटने पड़ते हैं, इनमें से आधे मरीजों का दोबारा पैर काटने की नौबत आती है।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. अंजली सोमानी ने जस्टेशनल डाटबिटीज यानी गर्भावस्था का मधुमेह के बारे में बताती हैं कि यह बीमारी गर्भावस्था के समय होती है। इसकी मुख्य वजह गर्भावस्था में शरीर में होने वाले कई प्रकार के हार्मोनल बदलाव या उनका डिसबैलेंस होना है। जस्टेशनल डायबिटीज का असर मां और शिशु दोनों की सेहत पर पड़ता है। कहने के लिए यह बीमारी केवल गर्भावस्था में होती है लेकिन इसमें थोड़ी सी लापरवाही टाइप-वन आर टाइप-टू शुगर में बदल जाती है। इस बीमारी की वजह से प्रसव के समय मां की जान को खतरा रहता है तो शिशु में कई तरह की बीमारियां होने की आशंका रहती है। शिशु को सांस लेने में कठिनाई, पीलिया ग्रस्त होना, जल्दी ही मोटापा और शुगर के शिकार होने की आशंका बढ़ जाती है। 

rgautamlko@gmail.com

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