15 August, 2018

यूपीएससी परीक्षा पास किये बिना हो सकते हैं ज्वाइंट सेक्रेटरी

नई दिल्ली। अब वे लोग भी केन्द्र सरकार में ज्वाइंट सेक्रेटरी पद नियुक्त हो सकते हैं जो यूपीएससी की कठिन परीक्षा पास नहीं कर पाये हैं, या कभी यह परीक्षा भी नहीं दी है। केन्द्र सरकार ने इसके लिए फरमान जारी कर दिया है । कांग्रेस पार्टी ने फरमान पर प्रतिक्रिया देकर इसके दुरूपयोग की आशंका जताई है। कई कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि यदि इसमें ईमानदारी नहीं बरती गई तो इस बैक डोर के मार्फत सत्ताधारी पार्टी या इसकी जननी संगठन के बहुत से कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण मंत्रालयों में ज्वाइंट सेक्रेटरी पद पर नियुक्त कर दिया जायेगा। कई केन्द्रीय मंत्रियों , बड़े अफसरों के चहेतों-चहेतियों को इसके मार्फत महत्वपूर्ण मंत्रालय में साहब बना दिया जायेगा। बहुतों के बेटे-बेटियों, रिश्तेदारों,चहेते मैनेजरों को भी इस बैक डोर के मार्फत पावरफुल ब्यूरोक्रेसी में पद दिला दिया जा सकता है, क्योंकि इसके लिये योग्यता मात्र स्नातक है। उम्र 40 वर्ष होना चाहिए। निजी कंपनी, विश्वविद्यालय, अस्पताल, एनजीओ आदि में काम करने वाले भी ज्वाइंट सेक्रेटरी बन सकते हैं। 10 विभागों में ज्वाइंट सेक्रेटरी के 10 पदों पर नियुक्ति से संबंधित औपचारिक सूचना सरकार ने रविवार 10 जून 2018 को दिशा-निर्देश के साथ जारी कर दी । 

 

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने इस बारे में कहा कि इससे उपलब्ध स्रोतों में से सर्वश्रेष्ठ को चुनने का मौका मिलेगा। जारी अधिसूचना के अनुसार मंत्रालयों में ज्वाइंट सेक्रटरी के पद पर नियुक्ति 3 साल के लिए होगी ,यदि कार्य अच्छा रहा तो और 5 साल तक के लिए नियुक्ति की जा सकती है। वेतन वही होगा जो केन्द्र सरकार के संयुक्त सचिव का होता है। गाड़ी ,बंगला भी संयुक्त सचिव वाला ही होगा। इनका चयन साक्षात्कार के मार्फत होगा और यह साक्षात्कार कबिना सचिव की एक समिति करेगी । किसी भी संस्थान, चाहे वह निजी हो या सरकारी में, 15 वर्ष तक कार्य का अनुभव रखने वाले 40 वर्ष से अधिक उम्र वाले इसके लिए 30 जुलाई 2018 तक आवेदन कर सकते हैं ।
अभी निम्न 10 मंत्रालयों में नियुक्ति के लिए अधिसूचना जारी हुई है-

 

सिविल एविएशन ,फाइनांस सर्विस, पर्यावरण, इकनॉमिक अफेयर्स, रोड ट्रांसपोर्ट, कृषि, शिपिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, कॉमर्स। मालूम हो कि इसका पहला प्रस्ताव 2005 में यूपीए-1 की मनमोहन सिंह सरकार में आया था, जब प्रशासनिक सुधार पर पहली रिपोर्ट आई थी। लेकिन तब इसे यूपीए सरकार ने मंजूरी नहीं दी। इसके बाद दूसरी प्रशासनिक सुधार रिपोर्ट में 2010 में भी इसकी अनुशंसा की गई। मनमोहन सिंह की यूपीए-2 सरकार ने भी उसको खारिज कर दिया। लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार ने 2016 में इसके लिए एक और समिति बनाकर , उसकी रिपोर्ट को आधार बनाकर , इसे अब लागू कर दिया । लेकिन सचिव स्तर के नौकरशाहों के विरोध के डर से सचिव पद पर नियुक्ति के लिए अभी पहल नहीं की गई । समझा जाता है कि इसपर पहल होगी 2019 में मोदी सरकार आने के बाद। अभी जो हुआ है, उसको भी लेकर बहुत से नौकरशाह व पूर्व आइएएस आपसी बातचीत में कहने लगे हैं कि यदि इसमें पूरी ईमानदारी नहीं बरती गई तो इसके माध्यम से यादव, सिंह, जाटव जैसे भयंकर भ्रष्ट लोग केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में संयुक्त सचिव हो जायेंगे। जो किसी महाभ्रट केन्द्रीय मंत्री या उसके आका का कृपा पात्र बन मंत्रालय के सचिव से भी अधिक शक्तिशाली हो जायेगा। 

rgautamlko@gmail.com

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