22 September, 2018

‘नेता’ बनने की जद्दोजहद में पत्रकार 

लखनऊ। आगामी 15 अप्रैल को होने वाले उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव में जहां 92 उम्मीदवार मैदान में हैं वहीं चौथे स्तम्भ के प्रहरियों का यह चुनाव खर्चीला और हाईटेक हो गया है। चुनाव जीतने के लिए परदे के आगे और पीछे के चलने वाले साम, दाम, दण्ड और भेद के हथकंड़ों का दौर शुरू हो गया है। इससे सत्ता के गलियारों से लेकर पत्रकारों के बीच कई उम्मीदवारों की कार्यप्रणाली चर्चा का विषय बनी हुई है। निष्पक्ष दिव्य संदेश द्वारा किए गए सर्वे में पूर्व समितियों पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली के चौंकाने वाले तथ्य प्रकाश में आए हैं।
दो गुटों में बंटी उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव फिर से एक होने जा रहे हैं। इस चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए हेमंत तिवारी, नीरज श्रीवास्तव, अरूण कुमार त्रिपाठी, दिनेश शर्मा, प्रभात त्रिपाठी, प्रभात रंजन दीन, मनमोहन, आलोक पाण्डेय, काशी प्रसाद यादव, सतीश प्रधान, राजीव कुमार श्रीवास्तव और सत्यवीर सिंह, उपाध्यक्ष के हेमंत कुमार मैथिल, नावेद शिकोह, अजय श्रीवास्तव, राम सिंह तोमर, के.सी. विश्नोई, राजीव कुमार सिंह, रजत कुमार सिन्हा, रजनीश यादव, मोहम्मद ताहिर, अनुराग यादव, अमिताभ त्रिवेदी, अमितेश कुमार श्रीवास्तव,आकाश शेखर शर्मा, जेड.ए. आजमी, और एच.राशिद अली, सचिव के भारत सिंह, नरेन्द्र श्रीवास्तव, शबी हैदर, दिलीप सिन्हा, कुमार सौवीर, अविनाश चंद्र मिश्रा, आलोक पाण्डेय, शिवम शुक्ला, शिवशरण सिंह, नीरज कुमार तिवारी, संयुक्त सचिव के श्रीधर अग्निहोत्री, तमन्ना फरीदी, अफरोज रिजवी, अशीष कुमार सिंह, संदीप कुमार मिश्रा, शिव विजय सिंह, संजय चतुर्वेदी, कोषाध्यक्ष के जफर इरशाद, हेमत कृष्णा, आलोक कुमार त्रिपाठी, अमितेश कुमार श्रीवास्तव, दिलीप कुमार सिंह, हुमायुं चौधरी और सदस्य कार्यकारिणी के लिए 41 संजोग वाल्टर, अनिल कुमार सैनी, मोहम्मद मजहर सलीम, कौसर जहां, धीरेन्द्र बहादुर श्रीवास्तव, तारकेश्वर मिश्रा, ज्ञानेश पाठक, विक्रम राव, सैयद मोहसिन हैदर, अजय कुमार वर्मा, दया बिष्टï, मोहम्मद वसीम, अतीकुर्रहमान, अरविन्द्र कुमार मिश्रा, अब्दुल अजीज सिद्दीकी, अलाउद्दीन, आशुतोष श्रीवास्तव, अंकित श्रीवास्तव, संजीव कुमार मिश्रा, विनोद कुमार प्रजापति, रुपेन्द्र उपाध्याय, सुरेश यादव, आशुतोष गुप्ता, हरीश काण्डपाल, अशीष पाण्डेय, सुभाष चंद्र विश्वकर्मा, अभिषेक रंजन, राजेश जायसवाल, दिलीप कुमार सिंह, जितेन्द्र कुमार सिंह, मोहम्मद जुबेर अहमद, शबीहुल हसन, अभ्युदय अवस्थी, एम.एम. मोहसिन, अशीष श्रीवास्तव, तकी शिकोह, शाश्वत तिवारी, अशीष कुमार सिंह, काजिम मेंहदी और डा. विनय कुमार शर्मा मैदान में हैं। प्रत्याशियों ने धुआंधार प्रचार शुरू कर दिया है।
मान्यता प्राप्त संवाददाताओं के इस चुनाव में कई दिग्गज पत्रकार परदे के पीछे से अपने-अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए रणनीति बना रहे हैं। बीते 15 दिनों के अंदर 724 मान्यता प्राप्त संवाददाताओं में से लगभग 300 पत्रकारों से किए गए सर्वे में कई बातें चौंकाने वाली निकल कर आई हैं। अधिकतर पत्रकारों का कहना था कि मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति पत्रकारों के हितों के बजाए अपना हित करने में लग जाती हैं। इसी वजह से विश्वसनीयता का संकट है। कुछ पत्रकारों का कहना है कि पूर्व समिति के कुछ पदाधिकारियों के व्यक्तिगत प्रयासों से पीजीआई में पत्रकारों को मेडिकल की सुविधा मिल पाई थी। पत्रकारों के असमयिक निधन पर मिलने वाली सहायता धनराशि में काफी असंगतियां हैं। किसी पत्रकार को मिल गया, किसी को नहीं। पूर्व समितियां कोई स्थायी शासनादेश नहीं करवा पाए। जिससे पत्रकारों में जबरदस्त रोष है। आवासों के आवंटन में दिग्गज पत्रकारों की नीतियां भेदभाव पूर्ण हैं। जिन वरिष्ठï पत्रकारों ने सरकार से सब्सिडी पर मकान, प्लॉट आदि ले लिए हैं, इसके बावजूद सरकारी मकान में बने रहने के लिए हर हथकंडे अपना रहे हैं। पूर्व समितियों के कुछ पदाधिकारी ऐसे दिग्गज पत्रकारों के आवास को बचाने के लिए सरकार से पैरवी कर रहे हैं, जिसको लेकर युवा और जरूरतमंद पत्रकारों में जबरदस्त रोष है। कई पत्रकारों का कहना है कि बगैर कोई एजेंडे और संकल्प पत्र के बजाए वोट मांगने के लिए उम्मीदवार आ रहे हैं। जिससे यह पता चलता है कि मात्र पदाधिकारी बनने और चर्चा में बने रहने के लिए मैदान में हैं। यूं तो अध्यक्ष पद के लिए कई प्रत्याशी मैदान में हैं। वरिष्ठï पत्रकार हेमंत तिवारी और नीरज श्रीवास्तव के बीच है। हेमंत तिवारी चुनाव जीतने के लिए सभी संभावनाओं पर पसीना बहा रहे हैं। जबकि नीरज श्रीवास्तव को अपने सहयोगी पदाधिकारियों का पूर्ण समर्थन नहीं मिल पाने के बावजूद अपना संकल्प पत्र लेकर मैदान में आ जाने से कांटे की टक्कर दे रहे हैं। कई चुनाव में जबरदस्त हार का सामना करने वाले वरिष्ठï पत्रकार मनमोहन फिर मैदान में हैं। चूंकि मनमोहन का व्यक्तित्व और कृत्तिव साफ सुथरा है इसलिए साजातीय वोटरों पर पकड़ है। वरिष्ठï पत्रकार प्रभात कुमार त्रिपाठी पत्रकारों के मुद्दों को कई महत्वपूर्ण मंचों पर उठाने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन ज्यादा बोलना और गंभीरता के अभाव की वजह से वोटर पत्रकार ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे हैं। यही हाल वरिष्ठï पत्रकार दिनेश शर्मा का भी है। अपने तीखी लेखनी की वजह से चर्चित वरिष्ठï पत्रकार प्रभात रंजन दीन भी मैदान में हैं। कुछ युवा पत्रकारों के रोल मॉडल भी हैं, लेकिन भारी संख्या नापसंदगी वालों की भी है। टीवी के वरिष्ठï पत्रकार आलोक पाण्डेय का नामांकन काफी चर्चा में रहा। सात-सात गाडिय़ों के साथ नामांकन की खबरें आई। इनके कुछ चेले पत्रकार सोशल मीडिया पर जिताने के लिए शमा बांधे हुए हैं। लेकिन हकीकत में जहां टीवी के पत्रकारों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं वहीं प्रिंट मीडिया के आंखों का काजल भी नहीं बन पाए हैं। युवा पत्रकार अरूण कुमार त्रिपाठी जोर-खरोश से पूर्व पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। जिसकी वजह से कुछ तो सुर में सुर मिला रहे हैं, कुछ सुर को नजरअंदाज कर रहे हैं। पहली बार कई प्रत्याशी अपने चुनाव को हाईटेक अंदाज में लड़ रहे हैं। वोटरों को लुभाने के लिए कुछ ने जहां रिकार्डेड संदेश, एसएमएम संदेश का सहारा ले रहे हैं वहीं कुछ शाम की पार्टियां देकर शमा बांध रहे हैं।

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