18 April, 2019

अंगद के पांव की तरह जमा है सिंचाई विभाग का दागी बाबू!

बगैर लगान के फाइलों में नहीं होती है कलम की सिंचाई

राजेन्द्र के. गौतम

लखनऊ। प्रदेश में कई सरकारें आई और गई, लेकिन सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के एक बाबू की कुर्सी कभी नहीं बदली। यह बाबू सुविधा शुल्क के लिए ऐसे-ऐसे कारनामें अंजाम दे रहा है जहां सिंचाई विभाग की छवि धूमिल हो रही है वहीं पीडितों को न्याय न मिल पाने के कारण कोर्ट की शरण में जाना पड़ रहा है। बीते 14 सालों से सिंचाई विभाग के जांच अनुभाग में यह दागी बाबू अंगद के पांव की तरह जमा हुआ है। पूर्व और वर्तमान मुख्यमंत्रियों से बाबू की अनियमितताओं की कई शिकायतें हुई, लेकिन कोई कार्रवाई मंत्री और आला अफसरों के संरक्षण के कारण नहीं हो पाई है।

बताते चलें कि यूपी में बीते 14 सालों में कई राजनीतिक दलों की सरकारें बनी और चली भी गई। लेकिन सिंचाई विभाग के जांच अनुभाग में तैनात प्रधान सहायक मुकुल कुमार यहीं बाबू की नौकरी पाए और यहीं पदोन्नति पाई। कभी न तो तबादला हुआ और न ही पटल परिवर्तन। जबकि मौजूद योगी सरकार ने अपनी स्थानातंरण नीति में प्रावधान कर रखा है कि कोई भी कर्मचारी तीन साल से एक ही पद और एक ही अनुभाग में नहीं रहेगा। लेकिन यह आदेश प्रधान सहायक मुकुल कुमार के ऊपर लागू नहीं हो पाया है। यूं तो सिंचाई विभाग भ्रष्टïाचार की सिंचाई के लिए अपनी एक बड़ी पहचान बना चुका है। अधिकतर घपलों-घोटालों की जांच इसी अनुभाग द्वारा की जाती है। इस वजह से यह अनुभाग काफी महत्वपूर्ण और कमाई वाला माना जाता है।

सिंचाई विभाग के सूत्रों का कहना है कि  प्रधान सहायक मुकुल कुमार के पिता बाल कृष्ण इसी विभाग में मुख्य अभियंता के पद से रिटायर हुए थे। अपने पिता के प्रभाव के चलते मुकुल कुमार को सिंचाई विभाग में नियुक्ति मिली थी। प्रभाव और पैसे की ताकत के कारण इस बाबू को न तो कोई सरकार हटा पाई और न ही इसके कारनामों की जांच। अपने तिकड़म के बल पर इस बाबू ने लखनऊ से लेकर नोएडा तक आकूत चल-अचल सम्पत्ति खड़ी की है।

सहायक प्रधान मुकुल कुमार ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद और आधारहीन बताया है। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष विनय कुमार राठी और सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव टी. वेंकेटेश से सम्पर्क किए जाने पर प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।

घपले में रसूखदार हुए बरी, कमजोर फंसे

वित्त वर्ष 2008-2009 में उन्नाव और हरदोई शाखा की नहरों की कटान को रोकने और सर्विस रोड की मरम्मत तथा काउंटर वर्म का कार्य बाहर की मिट्टïी से कराए कराने को लेकर ऑडिट ने आपत्ति जताते हुए संभावना बताई कि उन्नाव में 82,175,76 रुपए और हरदोई 1,00,234,30 रुपए की अनियमितता हुई। इस मामले में ऑडिट ने सिंचाई विभाग के तत्कालीन सहायक अभियंता के.सी. गुप्ता और अजय कुमार श्रीवास्तव को दोषी ठहराते हुए कार्रवाई करने की सिफारिश की। साथ ही इस प्रकरण में पूर्व अवर अभियंता अमर सिंह, पूर्व अवर अभियंता जुमना प्रसाद, पूर्व अवर अभियंता अनिल कुमार, पूर्व प्रारूपकार पवनसूत दीक्षित, पूर्व प्रारूपकार शशि चंद्र भारती, पूर्व वरिष्ठï सहायक मोहम्मद जुरार, पूर्व वरिष्ठï सहायक पी.एस. वाजपेयी, पूर्व वरिष्ठï सहायक रामबिलास समेत आठ कार्मिक आरोपी बनाए गए। सबसे रोचक बात यह है कि एक और हुई विभागीय जांच में सभी कार्मिक दोष मुक्त हो गए। लेकिन मात्र जेई अनिल कुमार और जमुना प्रसाद अभी तक इस मामले में बरी नहीं हो पाए हैं।

सिंचाई विभाग के सूत्रों का कहना है कि सहायक प्रधान मुकुल कुमार ने सभी आरोपी अफसरों से एक-एक लाख रुपए की डिमांड की थी। जिन्होंने डिमांड पूरी कर दी। उनको बरी करवा दिया। जिन्होंने डिमांड पूरी नहीं की, उनको फंसाने के लिए साम, दाम, दण्ड और भेद का सहारा लिया जा रहा है। इसके पीछे यह भी वजह बताई गई कि दोनों आरोपी अफसरों की पदोन्नति होनी है। इसी वजह से खुन्नस में इस प्रकरण को हवा दिया जा रहा है। आला अफसरों से न्याय की गुहार लगाने के बाद जब कामयाब नहीं हुए तो जेई अनिल कुमार और जमुना प्रसाद ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने चार सप्ताह में सिंचाई विभाग को पक्ष रखने का आदेश दिया था। इसके बावजूद सिंचाई विभाग ने कोर्ट के आदेश पर आंख मूंद ली। इसके बाद दोनों जेई ने कोर्ट में अवमाननावाद दायर किया।

rgautamlko@gmail.com

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