23 January, 2018

डींगबाज आईएएस पर गिरी योगी सरकार की गाज!

Panchayat Raj Department, Uttar Pradesh, ODF villages, Former Director Vijay Kiran Anand

लखनऊ। ‘तीस मार खां’ कार्यशैली के लिए मशहूर पंचायतीराज विभाग के निदेशक को यूपी के 30 जिले 31 दिसम्बर तक खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) करवा पाने में फेल होने के कारण योगी सरकार ने आज पद से हटा दिया है। इससे संभावना है कि जहां पंचायतीराज विभाग में हुए अनियमितताओं की पोल खुलेगी वहीं नए निदेशक आकाश दीप को पटरी से उतर चुके ओडीएफ का लक्ष्य पूरा करने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

मालूम हो कि डींगों के लिए मशहूर निदेशक विजय किरन आनंद महोदय ने नौ माह पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रदेश के 30 जिलों को 31 दिसम्बर तक ओडीएफ करवाने का ऐलान करवाया था। हालत यह है कि निदेशक की शेखचिल्ली की वजह से जिला पंचायत अधिकारियों ने कागजों पर खूब शौचालयों का निर्माण करवा दिया है लेकिन ओडीएफ के निर्धारित मापदण्डों ने पोल खोल दी। भगीरथी प्रयासों के बावजूद पंचायतीराज विभाग के लिए 30 जिलों का लक्ष्य हासिल करना सपना बन गया है।

बताते चलें कि भारत सरकार की स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) योजना के तहत यूपी में वर्ष 2015-16 में 2093294 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया। इसके सापेक्ष 694674 शौचालयों का निर्माण किया गया। इन शौचालयों के निर्माण पर केन्द्र और राज्य सरकार ने 1403.04 करोड़ व्यय किए। वित्त वर्ष 2016-17 में 3450304 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसके सापेक्ष बने 1740917 शौचालयों का निर्माण हुआ। इनके निर्माण पर 2351.50 करोड़ की धनराशि खर्च हुई। चालू वित्त वर्ष 2017-18 में 7886237 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया। बीते छह माह में 1388248 शौचालयों का निर्माण किया गया है। जबकि चालू वर्ष का बजट 2027.00 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। पंचायतीराज विभाग के दावों के तहत 2 अक्टूबर 2017 तक 3837.284 शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है। अब तक 2710,917 लाख शौचालयों की फोटो वेबसाइट पर अपलोड किए जाने का दावा किया जा रहा है।

पंचायतीराज विभाग के सूत्रों का कहना है कि 19 मार्च 2017 को सूबे में योगी सरकार बनने के बाद विजय किरन आनंद को स्वच्छ भारत मिशन का निदेशक बनाया गया था। निदेशक की शेखचिल्ली आदत के कारण तीस मार खां बनने के लिए मुख्यमंत्री से 30 जिलों को 31 दिसम्बर तक ओडीएफ करवाने की घोषणा करवा दी। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जिला पंचायत अधिकारी (डीपीआरओ) को निर्देश दिया कि जैसे ही बजट का जारी हो वैसे ही शौचालय निर्माण की रिपोर्ट भेजें। दो दर्जन से अधिक जिलों के डीपीआरओ ने दबाव में रिपोर्ट भेज दी कि उनके जिले में शौचालयों का निर्माण हो चुका है।

 

चार जिले मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्घ नगर, हापुड के प्रधानों ने शौचालयों के निर्माण में हो रही अनियमिताओं की शिकायत पर मेरठ के मण्डलायुक्त प्रभात कुमार से की थी कि उनके गांवों को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। जबकि उनके यहां शौचालयों का निर्माण भी शुरू नहीं हुआ। जांच में शिकायत सही पाई गई। इस पर मेरठ के मण्डलायुक्त प्रभात कुमार ने 1 नवम्बर 2017 को मेरठ के मुख्य विकास अधिकारी को पत्र लिखकर निर्देश दिया कि जांच में दोषी साबित हुए प्रधानों, ग्राम पंचायत अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी और खण्ड विकास अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाए। इनके स्थान पर अन्य अफसरों को तैनात किया जाए। इसके साथ ही इनके वित्तीय अधिकार निलम्बित किया जाए।

पंचायतीराज विभाग के दावे के तहत बिजनौर, शामली, गौतमबुद्घ नगर, गाजियाबाद, मेरठ, हापुड, मुज्जफरनगर और बागपत ओडीएफ हो पाएंगे हैं। जबकि दावा किया कि गया था कि गंगा नदी के किनारे आने वाले यूपी के 25 जिलों के 1010 ग्राम पंचायतों के 1623 गांवों को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित कर दिया है वहीं इनके निर्माण पर लगभग 478,819,200 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। इन जिलों के ओडीएफ की फोटो अपलोड की स्थिति लगभग 40 फीसदी के करीबी हो गई है।

rgautamlko@gmail.com

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