15 December, 2018

माया की नाराजगी बिगाड़ सकती है कांग्रेस का खेल

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लखनऊ। देश के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में होने वाले विधान सभा चुनाव में बसपा की नाराजगी कांग्रेस पर भारी पड़ सकती है। कांग्रेसी नेता दिग्गज दिग्विजय सिंह के बयान से तिलमिलाई बसपा सुप्रीमो ने जहां राहुल और सोनिया गांधी का बचाव करते हुए दिग्विजय सिंह पर सीधा हमला किया है वहीं इस कदम से भाजपा खुश है।
उल्लेखनीय है कि देश के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनावों में हाथी की नाराजगी कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकती है।

बसपा सुप्रीमो मायावती के सख्त तेवर से कांग्रेस नेतृत्व सकते में है। मायावती द्वारा तीनों राज्यों में अलग चुनाव लडऩे की घोषणा कांग्रेस के सत्ता में वापसी के अरमानों पर पानी फेर सकती है। उम्मीद की जा रही थी कि छत्तीसगढ़ में मायावती के अलग राह चुनने के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान में पार्टी उन्हे मना लेगी लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं हो सका है।
कांग्रेस के सूत्रों की माने तो पार्टी का केन्द्रीय नेतृत्व अब इस मामले को खुद देखेगा और

मायावती की नाराजगी को दूर करने का प्रयास कर सकता है। तीनों राज्यों में बसपा के एकला चलो के राग से लोकसभा चुनाव में विपक्षी महागठबंधन की उम्मीदों को भी पलीता लगा है ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश रहेगी कि मायावती एक बार फिर से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें। फिलहाल की परिस्थितियों में हाथी की कांग्रेस से दूरी जहां पार्टी के लिये नुकसान का सबब बन सकती है तो वहीं भाजपा के लिये यह गेम चेन्जर हो सकता है। आंकड़ों के हिसाब से देखा जाये तो मध्य प्रदेश में 14 से 15 प्रतिशत दलित मतदाता है। पिछले चुनाव में बसपा को 6.4 प्रतिशत वोट मिले थे और उसके हिस्से में चार सीटें आयी थी। राज्य में 15 से अधिक सीटों पर बसपा उम्मीदवारों को तीस हजार से ज्यादा वोट मिले थे।

पिछले चुनाव में राज्य में भाजपा और कांग्रेस के बीच 8.4 प्रतिशत मतों का अंतर था। आगामी चुनाव में यदि राज्य में कांग्रेस और बसपा मिलकर चुनाव लड़ते तो भाजपा का समीकरण गड़बड़ा सकता था। राज्य के उत्तर प्रदेश से लगे इलाकों में बसपा का खासा जनाधार है। इस लिहाज से देखा जाये तो यह कांग्रेस के लिये बड़ा झटका है। राजस्थान में भी 17 प्रतिशत दलित मतदाता हैं। यहां पिछले चुनाव में बसपा को 3.4 प्रतिशत वोट मिले थे और तीन विधायक चुन कर आये थे। कई सीटों पर उसके उम्मीदवारों को दस हजार से ज्यादा वोट मिले थे। 2008 के चुनाव में राज्य में बसपा को 7.6 प्रतिशत मत मिले थे। ऐसे में जब कांग्रेस राज्य में सत्ता की वापसी की राह देख रही है तो तीन से चार प्रतिशत का मत शेयर समीकरणों को काफी कुछ बदल सकता है। इस लिहाज से राजस्थान में भी बसपा की नाराजगी कांग्रेस के लिये शुभ संकेत नहीं है। छसीसगढ़ में तो बसपा पहले ही अजित जोगी के साथ गठबंधन कर चुकी है।

rgautamlko@gmail.com

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