20 July, 2018

खादी के जरिए लाखों युवाओं को मिलेगा रोजगार

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  • नई खादी नीति को मंजूरी
  • छोटे उद्योग लगाने में प्रदेश सरकार करेगी मदद

लखनऊ। अब खादी उत्पादों के छोटे उद्योग लगाने में राज्य सरकार मदद करेगी। इसके लिए दिए जाने वाले 25 लाख रुपये तक के कर्ज पर 5% की सब्सिडी दी जाएगी। मंगलवार को कैबिनेट ने खादी एवं ग्रामोद्योग विकास एवं सतत स्वरोजगार प्रोत्साहन नीति को मंजूरी दे दी। सरकार को उम्मीद है कि इस नीति के जरिए पांच साल के भीतर एक लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। ग्रामोद्योग शुरू करने पर लोन पर इंटरेस्ट सब्सिडी के साथ-साथ कई दूसरी रियायतें भी पॉलिसी के तहत दी जाएंगी।

ऑनलाइन भी मिलेंगे खादी उत्पाद

Millions of youth, khadi, Uttar Pradesh, Yogi Government, Ias Navneet shegalखादी एवं ग्रामोद्योग के उत्पाद अब स्टोर्स के साथ-साथ ऑनलाइन भी मिलेंगे। इसके लिए भी पॉलिसी में व्यवस्था की गई है। उत्पादों का डेटाबैंक भी विभाग तैयार करेगा। खादी एवं ग्रामोद्योग की दुकानें युवाओं की भी पसंद बनें, इसके लिए प्रॉडक्ट की आकर्षक पैकेजिंग होगी और नए सिरे से प्रॉडक्ट की ब्रैंडिंग की जाएगी।

पोल्ट्री फार्म के लिए बीपीएल को मिलेगी मदद

नैशनल लाइव स्टॉक मिशन के तहत चलने वाले रूरल बैकयार्ड पोल्ट्री डिवेलपमेंट प्रोग्राम के तहत अब यूपी में 251 मदर यूनिट खोली जानी हैं। इसके लाभार्थियों के लिए बीपीएल की गणना अब 2011 में हुए Millions of youth, khadi, Uttar Pradesh, Yogi Government, Ias Navneet shegalसोशियो इकोनामिक सर्वे के आधार पर की जाएगी। इससे ज्यादा बीपीएल लोगों को मदद मिल सकेगी। कैबिनेट ने यह भी तय किया है कि इन्हें विकसित शहरों की जगह अविकसित शहरों में खोला जाएगा। गाजियाबाद में कोई यूनिट नहीं खुलेगी जबकि नोएडा में तीन और बागपत पांच यूनिट लगेगी।

स्वेटर बांटने पर खर्च होंगे 390 करोड़

प्राइमरी स्कूल के बच्चों को जाड़े में स्वेटर बांटने पर 390 करोड़ Millions of youth, khadi, Uttar Pradesh, Yogi Government, Ias Navneet shegalरुपये का खर्च आएगा। कैबिनेट ने स्वेटर बांटने के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी। ये स्वेटर 200 रुपये के खरीद गए हैं और 1.54 करोड़ बच्चों को स्वेटर बांटने हैं। सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया कि 98 लाख स्वेटर बांटे जा चुके हैं।

उद्योगों को दी जा सकेगी जमीन 

राजस्व संहिता में एक अन्य बदलाव उद्योगों को जमीन देने की व्यवस्था को सरल बनाने के लिए किया जा रहा है। धारा 89 (3) की मौजूदा व्यवस्था के अनुसार उद्योगों या शिक्षण संस्थाओं के लिए अधिकतम 12.5 एकड़ भूमि का ही अंतरण किया जा सकता है। इससे अधिक जमीन के लिए राज्य सरकार की अनुमति लेनी पड़ती है। इस प्रक्रिया को सहज बनाने के लिए इसमें बदलाव किया जा रहा है। इसके साथ ही गैर कृषक जमीन को भी उद्योगों के लिए लेने में दिक्कत आती थी। इस पर तब तक ऋण नहीं मिलता था, जब तक कि 143 की घोषणा न कर दी जाए। अब इसका भी रास्ता बदलाव से निकाल लिया जाएगा। औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए धारा 77 में भी बदलाव किया जाएगा। इसके तहत अगर उद्योग के लिए जमीन खरीदते वक्त बीच में कोई सार्वजनिक उपयोग की जमीन आ जाती है तो उसे भी खरीदा जा सकेगा।

मिट्टी खनन की नीति निर्धारित

कैबिनेट ने एनएचआई, पीडब्ल्यूडी, यूपीडा समेत निर्माण की कई इकाइयों के लिए मिट्टी खनन की नीति निर्धारित कर दी है। अब सड़क या किसी अन्य प्रॉजेक्ट के निर्माण से पहले ही इन इकाइयों के अफसर डीएम को अपनी जरूरत के अनुसार मिट्टी खनन के लिए अनुमति का पत्र दे देंगे। इससे निर्माण के लिए मिट्टी ले जाते वक्त गाड़ी जब्त नहीं होगी।

ये फैसले भी हुए

राज्य सरकार के अधीन सेवानिवृत्त सैन्य पेंशनरों की पेंशन सातवें वेतनमान के अनुसार अब 4000 की जगह 15000 करने को मंजूरी दी गई। आबकारी विभाग में लगने वाले होलोग्राम का टेंडर निरस्त, ट्रैक एंड ट्रेस पालिसी के लिए आएगा नया टेंडर। किसानों के लिए कीट से होने वाले नुकसान के लिए नीति बनी, किसानों को कीट से बचाव के लिए मिलेगा अनुदान। 155.90 करोड़ खर्च होगा। मनोरंजन कर विभाग के काम कर रहे 377 कर्मचारियों का अब वाणिज्य कर विभाग में विलय, मनोरंजन कर विभाग खत्म होने के बाद आ रही थी दिक्कत।अब आसामी पट्टेटारों और भूमिधरों के लिए अपनी कृषि भूमि या जोत को पट्टे पर देना आसान होगा। इसके लिए यूपी कैबिनेट ने राजस्व संहिता में संशोधन को मंजूरी दे दी। संशोधित प्रस्ताव में 15 वर्ष तक पट्टे पर दिए जाने की व्यवस्था की गई है। इसे विधेयक के रूप में जल्द विधानसभा में पेश किया जाएगा। राजस्व संहिता की धारा 94 से 97 तक कृषि भूमि को पट्टे पर देने की व्यवस्था दी गई है। इसके अंतर्गत मंदबुद्धि व्यक्ति के अभिभावक, नि:शक्त, वक्फ या देवस्थान, विधवा या अविवाहित स्त्री, तलाकशुदा या परित्यक्ता महिला, कोई अवयस्क, पैंतीस वर्ष से कम उम्र का व्यक्ति जो अध्ययन कर रहा हो और उसके पिता की मृत्यु हो चुकी है, उन्हें अपनी जमीन पट्टे पर देने का अधिकार है। सेना में कार्यरत व्यक्ति भी इस सूची में शामिल हैं। हालांकि, इसके अंतर्गत एक बार में मात्र तीन साल के लिए ही जमीन पट्टे पर दी जा सकती थी। इस समयसीमा को बढ़ाकर 15 साल करने का प्रस्ताव रखा गया। इसके पीछे तर्क दिया गया कि गांवों में कांट्रेक्ट फार्मिंग, उद्योगों आदि को बढ़ावा देने के लिए समयसीमा को बढ़ाया जाना जरूरी है।

rgautamlko@gmail.com

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